कोरोना महामारी की इस लड़ाई को जीतने के लिए सरकारी के साथ निजी अस्पतालों व डाॅक्टरों की भी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए सोमवार को संभागायुक्त आनंद कुमार शर्मा और कलेक्टर आशीष सिंह ने बैठक ली।
मेला कार्यालय में हुई बैठक में कुछ निजी अस्पतालों के संचालकों व डाॅक्टरों ने हमेशा की तरह जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करना चाही लेकिन संभागायुक्त व कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया कि किंतु-परंतु बिल्कुल नहीं चलेगा। आप लोग न केवल उज्जैन शहर बल्कि आसपास के जिलों के मरीजों को भी देखते रहे हैं। इस कठिन दौर में सभी को मिलकर अपना सर्वश्रेष्ठ देना होगा, तभी इस बीमारी से जीत पाएंगे। निर्देश दिए कि किसी भी मरीज का इलाज करने से नर्सिंग होम में मना नहीं किया जाएं।
ये निर्देश...मरीज को रात में रेड अस्पताल में शिफ्ट न करें, रात में विशेष राउंड पर जाएं
- प्रत्येक निजी हॉस्पिटल में बेसिक स्क्रीनिंग की सुविधा हो, जहां राेगियों में बुखार,ऑक्सीजन लेवल आदि की जांच की जा सकें।
- सभी निजी हॉस्पिटल संचालक अपने यहां तीन-चार बेड का आइसोलेशन वार्ड तैयार कर संदिग्ध कोरोना मरीजों का इलाज करें।
- डॉक्टर व अन्य पैरामेडिकल स्टाफ आदि को पर्याप्त पीपीई किट एवं सुरक्षा सामग्री प्रदान की जाए।
- रात में भी विशेषज्ञों द्वारा राउंड लेकर इन मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता रहे।
- मरीजों को स्टेबल करने के बाद रैफरल टीम की अनुमति से ही रेड हॉस्पिटल माधवनगर या फिर आरडी गार्डी में शिफ्ट किया जा सकेगा।
- रैफरल करने के पहले मरीज की हिस्ट्री तैयार की जाए ताकि संबंधित रेड हॉस्पिटल में उसका इलाज करने में आसानी हो।
- यथासंभव रात में मरीज को रेड हॉस्पिटल में शिफ्ट नहीं किया जाए, जब तक ज्यादा इमरजेंसी ना हो।
- ये भी ध्यान रखा जाए कि रेड हॉस्पिटल में मरीज को भेजने के पहले रेड हॉस्पिटल के प्रभारी से चर्चा कर ली जाए ताकि मरीज को भर्ती करने में देरी न हो।
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