इंदौर में लाॅकडाउन और केंद्रीय गृह मंत्रालय की गाइडलाइन के उल्लंघन से कोविड-19 की स्थिति गंभीर हो गई है। इसी को देखते हुए केंद्र सरकार ने विशेषज्ञ डाॅक्टरों का एक छह सदस्यीय दल सोमवार को इंदौर भेजा। दल ने यहां पहुंचते ही काॅल सेंटर, टेलीमेडिसिन सेंटर, लाॅक डाॅउन की जमीनी हकीकत और कलेक्टर की व्यवस्था को देखा। मंगलवार से इन सभी व्यवस्था में जो संभावित बदलाव की जरूरत होगी, उस पर अमल शुरू होने की संभावना है।
केंद्र का कहना है कि हॉटस्पॉट वाले जिलों या उभरते हॉटस्पॉट अथवा यहां तक कि व्यापक प्रकोप या क्लस्टरों की आशंका वाले स्थानों पर संबंधित दिशा-निर्देशों के उल्लंघन की घटनाएं किसी भी सख्त उपाय के बिना निरंतर होने की अनुमति दी जाती है।
तो वैसी स्थिति में इन जिलों की आबादी के साथ-साथ देश के अन्य क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए भी गंभीर स्वास्थ्य का खतरा उत्पन्न होगा। प्रमुख हॉटस्पॉट वाले जिलों में इस तरह के उल्लंघन की व्यापकता का विश्लेषण करने के बाद केंद्र सरकार ने माना कि हालात गंभीर हैं। इसी के बाद केंद्र की एक्सपर्ट टीम इंदौर भेजी गई।
मप्र ने कर दी देरी, पहले ही भेजना था टीम : पूर्व मुख्य सचिव केएस शर्मा ने कहा कि केंद्र ने यदि अब टीम भेजी है तो इसमें कमी मप्र की है। मुंबई और इंदौर के हालात एक जैसे होते जा रहे हैं, जबकि दोनों में जनसंख्या के साथ-साथ कई चीजों में काफी अंतर है। जब पता चला था कि इंदौर के हालात बिगड़ रहे हैं तो राज्य सरकार को तुरंत अपनी एक एक्सपर्ट टीम भेजनी थी, जो जिला प्रशासन की मदद करती। आंकलन करती कि कहां दिक्कत आ रही है। अब इंदौर पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
तीन अन्य राज्यों में भी दल : दल का नेतृत्व केंद्र में अतिरिक्त सचिव व हरियाणा कैडर के 1991 बैच के अधिकारी अभिलाक्ष लिखी कर रहे हैं। केंद्र ने पश्चिम बंगाल (कोलकाता, हावड़ा, मेदिनीपुर पूर्व, 24 परगना उत्तर, कलिम्पोंग और जलपाईगुड़ी) में दो, महाराष्ट्र (मुंबई एवं पुणे) में दो और राजस्थान के जयपुर में भी एक दल भेजा है।
गाइडलाइन नहीं मानीं
लॉकडाउन के उपायों, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, सोशल डिस्टेंसिंग, डाॅक्टर व स्वास्थ्य टीम की सुरक्षा, श्रमिकों एवं गरीब लोगों के लिए बनाए गए राहत शिविरों की स्थितियों के संबंध में केंद्र सरकार को कई शिकायतें मिली हैं। उन्हीं पर केंद्रीय दल फोकस करेगा। केंद्र ने आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 की धारा 35(1), 35(2)(ए), 35(2)(ई) और 35(2)(आई) के तहत इन दलों का गठन किया है। इस एक्ट के तहत ही केंद्र ने गाइडलाइन जारी की है। साथ ही बताया कि गाइड लाइन नहीं मानी गई तो इसी एक्ट में संबंधितों पर कार्रवाई होगी।
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