बेराेजगारी के दाैर में राहत की खबर है। तेंदू पत्ता संग्रहण में 10 दिन में 55 हजार परिवाराें काे 12 कराेड़ रुपए की मजदूरी मिलेगी। इस बार व्यापारियाें ने हाथ खींच लिए थे। इसके बाद वन विभाग ने सीएम के निर्देश पर पत्ता तुड़ाई के कार्य की नई रूपरेखा बनाई है। 20 से 30 मई तक जिले 29 वन समितियाें में हजाराें परिवार के सदस्य अलसुबह से जंगलाें में जाकर पत्ता तुड़ाई का कार्य करेंगे।
काेराेना संक्रमण की वजह से व्यापारियाें ने बाेरा भर्ती के लिए बाहर से आने वाले मजदूराें काे नहीं बुलाया, इसलिए इस बार वन विभाग और स्थानीय मजदूराें की मदद से बाेरा भर्ती का जटिल कार्य भी किया जाएगा। इसमें जिले के 55 हजार परिवाराें काे मात्र 10 दिन में पत्ता तुड़ाई कार्य करने पर शासन की तरफ से 12 कराेड़ रुपए की मजदूरी मिलेगी। इस मजदूरी का आदिवासी तबके के लाेग सालभर इंतजार करते हैं, जिससे उनके पास पैसा एकत्रित हाे जाता है। कुछ व्यापारियाें ने भी काम करने से इनकार कर दिया था, सरकार ने गरीबाें काे मजदूरी काे देने के लिए विराेध के बाद भी काम शुरू कर दिया है।
एक मानक बाेरे का मूल्य 2500 रु.
डीएफओपीएन मिश्रा ने बताया, तेंदूपत्ता के 1 मानक बोरे का मूल्य 2500 रु. संग्राहक को दिया जाएगा। गरीब परिवार काे पत्ता तुड़ाई कार्य करने पर राेजगार मिलेगा, जिन्हें महामारी में इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। डीएफओ मिश्रा ने बताया, इस बार जिले की 3 समितियाें काे व्यापारी ने नहीं खरीदा है, इसके पत्ते ताेड़ने से लेकर गाेदाम भर्ती का कार्य वन विभाग के द्वारा किया जाएगा।
फड़ वाले स्थान पर साेशल डिस्टेंसिंग के पालन के लिए बनाए गाेलाकार
29 वन समितियाें में अलग-अलग फड़ बनाने का काम शुरू हाेकर खुले मैदान में गाेलाकार भी बनाए जा रहे हैं, जिससे मजदूर पत्ता ताेड़ गड्डियां बनाकर लाए ताे साेशल डिस्टेंसिंग का पालन कर सके। अभी से गाेले बनाकर तैयार कर दिए हैं, जिसका वन विभाग के कर्मचारी सख्ती से पालन करवाएंगे। प्रदेश के अलावा आंद्रप्रदेश, राजस्थान तक के व्यापारियाें ने खरीदी की है, जिनके कर्मचारी एक माह पहले से जिले के जंगल में आकर अपना काम कर जंगल-जंगल जाकर पत्ता देख रहे हैं।
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