लॉकडाउन के प्रभावित स्थानीय उद्योगों में कार्यरत श्रमिकों के हित में मंगलवार को भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) आगे आया है। संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं मप्र असंगठित कामगार बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष सुल्तानसिंह शेखावत के नेतृत्व में स्थानीय शाखा के संगठन पदाधिकारियों ने एसडीएम को ज्ञापन दिया। इसमें मांग करते हुए कहा कि शहर में स्थापित ग्रेसिम, केमिकल डिविजन, लैंक्सेस एवं गुलब्रांडसन उद्योग में कार्यरत श्रमिकों को लाॅकडाउन अवधि 31 मई को समाप्त होने के बाद रोटेशन के आधार पर ड्यूटी पर बुलाना चाहिए, ताकि सभी श्रमिकों को हाजरी मिले, जिससे वे परिवार चला सके। शेखावत ने बताया कि फिलहाल उद्योगाें में 30 से लेकर 60 प्रतिशत तक उत्पादन शुरू हाे चुका है। लाॅकडाउन के बाद जब तक 100 प्रतिशत उत्पादन नहीं होता, तब तक रोटेशन प्रणाली अपनाने से श्रमिकों में भी असंतोष नहीं होगा।
लॉकडाउन का वेतन दें उद्योग प्रबंधन
ज्ञापन में स्थानीय उद्योग प्रबंधन द्वारा लॉकडाउन अवधि का वेतन नहीं देने के मुद्दे पर भी बीएमएस नेताओं ने आपत्ति लेते हुए कहा कि 23 मार्च को ड्यूटी पर मौजूद ठेका श्रमिकों को वेतन नहीं देना केंद्र सरकार के निर्देशों की अवहेलना है। इस मामले का जल्द पटाक्षेप किया जाना चाहिए, ताकि किसी तरह का असंतोष श्रमिकों में नहीं पनपे।
10-10 हजार की मदद दें
ज्ञापन में बीएमएस नेताओं ने जिले भर के असंगठित मजदूर, निर्माण श्रमिक, कृषि खेती, हाथ ठेला, ऑटो रिक्शा, सैलून का काम करने वाले, फूटकर व्यवसायी आदि को लाॅकडाउन अवधि में बंद रहे कारोबार पर आर्थिक सहायता के रूप में 10-10 हजार रु. की सहायता देने की मांग की है।
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