कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में 12 ज्योतिर्लिंग, 52 शक्तिपीठ और 106 वैष्णव दिव्य देशों में एक साथ अनुष्ठान हुआ। आरोग्य भारत के नाम से यह आयोजन सभी पीठों पर वहां के धार्मिक संस्थाओं ने किया। इस दौरान महामृत्युंजय, चंडी यज्ञ व सुदर्शन होम हुए। अथर्व वेद के उन तीन सुक्तों का पाठ किया, जिनसे महामारी को रोकने की मान्यता है। दो दिन चले इस अनुष्ठान की पूर्णाहुति मंगलवार को हुई। महाकालेश्वर मंदिर परिसर की यज्ञशाला में 62 पंडितों ने जप और 25 ने यज्ञ में आहुतियां दी।
महाकालेश्वर में यह आयोजन गोदा रंगनाथ सेवा ट्रस्ट ने किया। रामानुज कोट के युवराज स्वामी माधव प्रपन्न के अनुसार ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग में भी इसी संस्था ने यह अनुष्ठान कराया। उन्होंने बताया कोरोना संकट से दुनिया जूझ रही है। हमारे शास्त्रों में ऐसी महामारियों को रोकने के लिए अनुष्ठान का आदेश है। अनुष्ठान से महामारी को रोका जा सकता है। देशभर के शैव, शक्ति और वैष्णव संप्रदाय के विद्वानों ने मानवता की भलाई के लिए पूरे देश में एक ही दिन एक ही समय अनुष्ठान का निर्णय लिया। यह भी तय हुआ 12 ज्योतिर्लिंग, 52 शक्तिपीठ और 106 दिव्य देशों में वहां के संस्थान आरोग्य भारत के नाम से यह अनुष्ठान करेंगे। उज्जैन में यह जिम्मेदारी गोदा रंगनाथ सेवा ट्रस्ट को दी गई। सोमवार को 62 पंडितों ने रुद्राभिषेक, रुद्रपाठ, महामृत्युंजय पाठ, देवी अथर्वशीर्ष, चंडी पाराण, सुदर्शन होम व अथर्व वेद के विद्वानों ने सुक्त पाठ किया। मंगलवार को महाकाल यज्ञशाला में इन सभी अनुष्ठानों की पूर्णाहुति की गई। 25 पंडितों ने रुद्र, महामृत्युंजय हवन, चंडी यज्ञ और सुदर्शन होम कर दुनिया को कोरोना से मुक्ति की प्रार्थना की।
लैपटॉप पर दी यज्ञ-अनुष्ठान की जानकारी
स्वामीजी ने पंडितों को इस अनूठे यज्ञ अनुष्ठान की जानकारी लैपटॉप पर दी। उन्होंने अंग्रेजी में समझाया कि पूरे अनुष्ठान में क्या-क्या होगा। यज्ञशाला में लैपटॉप भी मंच पर रखा हुआ था।
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