कैंट एरिया में गरीबों को राशन बांटने के नाम पर धर्मांतरण की कोशिश का वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो वायरल होने के बाद जब भास्कर ने संबंधित लोगों से बात कि तो उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि मानव विकास सेवा संघ के स्वयंसेवियों ने मुफ्त खाद्यान्न देने के बहाने उन्हें चर्च, मिशनरीज के ऑफिस बुलाया। जहां उनसे मसीही समाज की प्रार्थना कराई गई। यह सारा खेल लॉकडाउन के दौरान और उसके बाद के कई दिन तक चलता रहा।
ईसाई मिशनरीज के धर्मांतरण के मुद्दे पर लंबे समय से काम कर रहे समाजसेवी ओमकारसिंह का कहना है कि मिशनरीज, प्रार्थना के जरिए ही धर्मांतरण कराते हैं। यह एक गंभीर विषय है। इस मामले पर जिला प्रशासन को स्वतंत्र कमेटी से जांच करानी चाहिए। मैं स्वयं राज्य शासन को इसकी शिकायत करूंगा।
गेहूं दिए फिर बोले- प्रार्थना करो, चर्च भी बुलाया: गुड्डू
बाछलोन गांव के निवासी गुड्डू ने बताया कि मैं मैहर का रहने वाला हूं। मानव विकास सेवा के कुछ लाेग आए, उन्होंने मुझे गेहूं-चावल दिए। फिर बोले यीशु के नाम पर प्रार्थना करो। बाद में उन्होंने अनाज लेने के लिए गांव में ही बने एक चर्च में बुलाया। गुड्डु ने दावा किया कि गांव के दो-तीन लोग इसी संस्था के प्रभाव में आकर ईसाई बन चुके हैं।
एक किलो टमाटर-चावल देकर प्रार्थना कराई: रामवती
बाछलोन की एक अन्य महिला रामवती ने बताया कि संस्था के एक मास्टर ने एक-एक किलो चावल-आटा, एक किलो टमाटर दिए। इसके पहले वे गेहूं व अन्य सामग्री भी दी थी। फिर उन्होंने मुझसे हे प्रभु...बोलकर प्रार्थना कराई। एक अन्य महिला रामबाई ने बताया कि मानव विकास सेवा संघ के द्वारा यहां 20-25 परिवारों को आटा-दाल व सब्जियां दी जा रही हैं। पटकुई गांव की सरोज अहिरवार ने बताया कि मुझे राशन दिया गया। इसके बदले मुझसे प्रार्थना कराई। बरारू गांव के निवासी नन्हें भाई ने बताया कि मिशनरीज के लोग हे पिता... परमेश्वर। आमीन वगैरह कराया गया।
फादर बोले - कोरोना से बचने के लिए प्रार्थना कराते हैं
इस आरोप को लेकर मानव विकास सेवा संघ डायरेक्टर फादर थॉमस फिलिप बोले कि ऐसा कहना सही नहीं है कि हम लोग धर्मांतरण कर रहे हैं। चूंकि कोराना वायरस की भयावहता इतनी है कि हम लोगों से बोलते हैं कि वे इस महामारी खत्म करें, इसलिए उनसे प्रार्थना कराई जाती है। वैसे जिन लोगों ने जिन लोगों को खाद्यान्न दिया। उसकी सूची सरकार से मिली थी। हम लोग 80 हजार से ज्यादा लोगों की भोजन-खाद्यान्न की मदद कर चुके हैं। यहां 90 प्रतिशत लोग हिंदु वर्ग से हैं।
कलेक्टर बोले, पुलिस को जांच सौंपी जा रही है
कलेक्टर दीपक सिंह का कहना है किसागर में 50 हजार से ज्यादा प्रवासियों के परिवार लौटे थे। उनके भोजन-पानी के लिए सामाजिक संस्थाओं की मदद ली गई। इस दौरान अगर किसी संस्थान ने इसका फायदा उठाने की कोशिश की है तो उसकी जांच कराएंगे। फिलहाल इस मामले की जांच पुलिस को दी जा रही है। प्रमाण मिलने पर संबंधितों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
चल पड़ी चर्चा : प्रशासन कार्रवाई कर पाएगा
इधर शहर में चर्चा है कि प्रशासन बड़ी कार्रवाई कर पाए इसमें बहुत शक है। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन इस संस्था के कुछेक छोटे-बड़े ऐहसान में दबा है। लॉकडाउन के दौरान सरकारी सूची के मुताबिक लाखों रुपए का खाद्यान्न व भोजन के पैकिट बांट चुकी इस संस्था ने हाल ही में प्रशासन को कुछ थर्मस भी दिए हैं। इधर एक चर्चा ये भी है कि इस संस्था को सत्ताधारी दल के एक विधायक का वरदहस्त है। इसके चलते पूर्व में भी यतीम बच्चों के धर्मांतरण की शिकायत फाइलों में दब चुकी है।
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