प्रदेश सरकार ने निजी अस्पतालों और डायग्नोस्टिक सेंटर में रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट करने की अनुमति दे दी है। अब बायोसेफ्टी लेवल-2 स्तर की किसी भी लैब में यह जांच हो सकेगी। खास बात यह है कि 10 से 15 मिनट में जांच होने से मरीज का बेवजह अस्पताल में भर्ती होना बंद होगा और बेड व रूम जरूरतमंद मरीजों के काम आ सकेंगे। फिलहाल जांच रिपोर्ट आने में 5 से 6 दिन का समय भी लग रहा है। शहर में सेंट्रल पैथोलॉजी लैब और अरबिंदो अस्पताल इस जांच के लिए प्रस्ताव दे चुके हैं। एमजीएम मेडिकल कॉलेज भी इस जांच के लिए तैयार है। सेंट्रल लैब इंडियन काउंसिल फॉर मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) से रजिस्टर्ड है और उसने खुद की क्षमता प्रतिदिन 4000 सैंपल की जांच की बताई है। हालांकि आईसीएमआर प्रदेश को 30 हजार रैपिड एंटीबॉडी जांच किट उपलब्ध करवा रही है। सबसे पहले ये इंदौर को मिल रही हैं। गौरतलब है कि सरकार ने 9 अप्रैल को कुछ उपकरण, पीपीई किट और मास्क के लिए टेंडर बुलवाए थे। उसमें प्रदेश में दो लाख किट सप्लाई करने के लिए तीन कंपनियों ने आवेदन दिया है।
ये जांच बताएगी, मरीज अस्पताल में रुके या नहीं
सांस लेने में तकलीफ के साथ फ्लू पीड़ित सैकड़ों लोगों के सैंपल रोज लिए जा रहे हैं। रिपोर्ट आने तक मरीज आइसोलेट रहता है। रैपिड टेस्ट में 5-10 मिनट में पता चल जाएगा कि मरीज में पॉजिटिव होने की संभावना कितनी है। पॉजिटिव आने पर कन्फर्मेशन के लिए जरूरी पीसीआर टेस्ट होगा। एमजीएम में तेजी से टेस्ट करने के बावजूद 5-6 दिन का वेटिंग चल रहा। इसी के चलते 1142 सैंपल दिल्ली भेजना पड़े थे। फिलहाल स्वैब सैंपल लेकर पीसीआर जांच की जा रही है, जिसमें 12 घंटे लगते हैं। यह तीन चरणों में होती है। पूरी टीम लगाने के बाद भी हर दिन 200 जांच ही हो पा रही है।
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