ताल और मरम्याखेड़ी के बीच 200 बीघा के खेत में मंगलवार को आग लग गई। दमकल ने मशक्कत कर आग पर काबू पाया। शुक्र है ज्यादातर किसान पहले ही गेहूं निकाल चुके थे, नहीं तो ज्यादा नुकसान हो सकता था। आग का कारण किसी किसान द्वारा नरवाई जलाई जाना है। जो हवा के साथ फैल गई, लेकिन किस किसान की गलती से आग लगी ये स्पष्ट नहीं है।
मरम्याखेड़ी के किसानों को सूचना लगी कि उनके खेतों में आग लग गई है| किसान मौके पर पहुंचे लेकिन जब तक कोई कुछ समझ पाते आग एक खेत से दूसरे और दूसरे से तीसरे में फैल गई। मरम्याखेड़ी, कीटखेड़ी, मुंडलाखुर्द के किसानों के छोटे-बड़े मिलाकर 200 बीघा के खेत में आग लग गई। लोगों ने फायर ब्रिगेड को सूचना दी लेकिन आग पर काबू नहीं हुआ तो आलोट नगर परिषद की फायर ब्रिगेड पहुंची और मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका। किसान दशरथलाल ने बताया तीन दिन पहले गेहूं की कटाई कर फसल लाए थे। आधे बीघा से कम के गेहूं बचे थे, जिनकी कटाई करना थी, जो आग में जल गए। अन्य किसान के गेहूं खेत में कटे पड़े थे, उसका भी नुकसान हुआ। नारायण कहार ने बताया नरवाई सुखी होने के कारण तेजी से हवा के साथ आग फैल गई। 30 खेत जल गए। शुक्र है आग की लपटें गांव तरफ नहीं पहुंची, नहीं तो लोगों के मकान जल सकते थे। पटवारी ओमप्रकाश डोडियार ने बताया मौका मुआयना कर पंचनामा बनाया है। दो किसानों की डेढ़ बीघा की गेहूं की फसल काे नुकसान हुआ है। कुछ किसानों के खेत के पाइप और बिजली के तार जल गए। नुकसानी का आंकलन कर रिपोर्ट शासन को भेजेंगे। तहसीलदार पारसमल कुन्हारा ने बताया किसी किसान के नरवाई जलाने से आग लगी है। नुकसानी का आंकलन कर नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा।
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