काेराेना संक्रमण के चलते बदले हालाताें ने लाेगाें का जीवन उलट-पलट कर दिया है। लाॅकडाउन के कारण प्रदूषण का स्तर कम हाेने से अाबाेहवा जरूर सुधरी है, लेकिन राेज कमाने-खाने वालाें की हालत खराब हाे गई है। फल-सब्जी का उत्पादन जहां खराब हाे रहा है, वहीं गांवाें से धार पहुंचने वाला दूध न ताे अा रहा है अाैर न ही यहां से इंदाैर जा रहा है। कई दुग्ध उत्पादकाें काे इसके चलते नुकसान उठाना पड़ रहा है। अाखातीज पर शादी-ब्याह में बजने वाली शहनाइयां भी अब खामाेश ही रहेंगी। बैंड-बाजा, घाेड़ी की बुकिंग आदि हो चुकी थी। विवाह सामग्री की खरीदारी भी हाे चुकी थी, लेकिन अब इंतजार करना हाेगा। भास्कर ने जाना लाेगाें के जीवन पर लाॅकडाउन का क्या असर हुआ।
छत डाली ली, दीवार नहीं उठा पाए, नेट लगाया : तिरुपति नगर के प्रदीप चाैहान ने बताया कि घर पर निर्माण कार्य चल रहा था। इसके चलते आगे की दीवार तुड़वा दी थी, छत बढ़ाई थी, लेकिन इसके बाद ही 24 मार्च से लाॅकडाउन हाे गया। जिसके कारण दीवार नहीं बन पाई, अब पर्दा लगाकर रहना पड़ रहा है। रातभर ठीक से नहीं साे पाते हैं। घर के एक सदस्य काे रात में रखवाली करनी पड़ती है। हम दाेनाें भाई मिलकर छह-छह घंटे की पहरेदारी कर रहे हैं। सुबह 6 से 9बजे की छूट में सामान लेने भी जाना हाेता है। जब लाॅकडाउन खुलेगा तब ही आगे का काम हाे पाएगा।तिरला के पवन पाटीदार ने बताया कि उनकी बेटी का विवाह 26 अप्रैल काे अाखातीज के दिन हाेना था। दहेज का सामान सहित अन्य सभी तैयारियां पूरी कर ली थी, लेकिन लाॅकडाउन के चलते विवाह निरस्त करना पड़ा। जब लाॅकडाउन खुलेगा तब विवाह करेंगे, लेकिन अाखातीज पर पूर्ण मुहूर्त हाेता है उसका लाभ नहीं मिलेगा। चिकल्या से बारात आने वाली थी। इसी प्रकार दिनेश माेदी ने बताया कि उनके बेटे के विवाह के लिए बैंड-बाजा, घाेड़ी बुक कर ली थी। कपड़े-बर्तन सहित अन्य सामान भी खरीद लिया था। अब विवाह आगे बढ़ा रहे हैं।
10 बीघा में लगाया वीएनआर प्रजाति का बड़ा जाम, परिवहन नहीं होने से सड़ गया
ताेरनाेद के मनाेज बाेरदिया का गांव के पास 10 बीघा में जाम का बगीचा है। मनाेज के अनुसार उन्हाेंने वीएनअार प्रजाति का बड़ा जाम लगाया है। सवा साै क्विंटल का उत्पादन हुआ। अभी 15 मई तक सीजन है, करीब 50 क्विंटल माल और निकलेगा। लेकिन जाम का परिवहन नहीं हाेने से बगीचे में ही खराब हाे रहा है। लाॅकडाउन के कारण घर भी नहीं ले जा पा रहे हैं। गांव में और रिश्तेदारों में बांटा, लेकिन फिर भी काफी फल खराब रहा है। दिल्ली-मुंबई की मंडी में यह जाम 75 से 80 रुपए किलाे तक बिकता है। हम धार और बांसवाड़ा भेज रहे थे। दाे साल पहले बगीचा लगाया था।
काेई हम्माली ताे काेई करता है माेटर बाइंडिंग का काम, अब वह भी नहीं
उटावद दरवाजा क्षेत्र में रहने वाले मैकेनिक राजाबाबू गाड़ियाें में ग्रीसिंग का काम करते हैं, मुन्ना धार में अाश्रम के पास माेटर बाइंडिंग का काम करते हैं। अनवर भाई अाैर मुमताज खान बस स्टैंड पर हम्माली करते हैं। जमील छाेटी गाड़ियाें पर ड्राइवरी करता है। इन सभी की कमाई 200 से 300 रुपए राेज है। लाॅकडाउन के बाद बेराेजगार हाे गए हैं। अब जाे राहत सामग्री अाती है उसी से गुजारा हाेता है। कंटेनमेंट एरिया घाेषित हाेने के बाद से वह भी नहीं मिल पा रही है। सभी लाॅकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे हैं ताकि वे कुछ काम कर सकें।
दूध काे लेकर 16 दिनाें से परेशानी
जिले के ग्राम झाड़ी बरोदा के बड़े दूध उत्पादक दिलीप सिंह कामदार का कहना है अधिकतर दूध इंदौर जाता है। इंदौर की सीमाएं सील हैं। खुले तौर पर दूध की बिक्री बंद कर दी गई है। जिला प्रशासन के निर्णय के खिलाफ नहीं जा सकते। बड़ा नुकसान उठाना पड़ रहा है। वे 1 दिन में वे 3000 लीटर दूध इंदौर की डेरियों पर भेजते थे। पूरा दूध खराब हो रहा है। जिला प्रशासन किसी विशेष संस्था के माध्यम से लोगों तक दूध पहुंचाए जिससे दूध खराब न हो। यहीं के नारायण सिंह ने बताया 16 दिन से दिक्कतों का सामना कर रहे हैं। उनके पास एक समय का 250 लीटर दूध हाेता है।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/3ajsKMi
via IFTTT
