प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशभर में 3 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने की घोषणा कर दी। अब 19 दिन और कोई घर से बाहर नहीं निकल सकेगा, इसके आगे क्या होगा यह भी स्पष्ट नहीं। कोरोना संक्रमण को रोकने का यही एकमात्र उपाय है इसलिए अमल जरूरी हो गया। इसकी सबसे ज्यादा मार उन दिहाड़ी व अन्य मजदूर परिवारों पर पड़ रही है जिनका रोजगार ठप हो गया। मजदूरी भी नहीं और सरकारी मदद नहीं मिलने से दो जून की रोटी के लाले पड़ रहे हैं। भास्कर ने विभिन्न गांवों में जाकर इन दिहाड़ी मजदूरों की जिंदगी में झांककर उनकी स्थिति व सुरक्षा व्यवस्था समझने की कोशिश की।
माननखेड़ाः बच्चे भूखे हैं, कैसे सुलाएं साहब
माननखेड़ा टोल प्लाजा के पास बनी झोपड़ी में रहने वाले दिहाड़ी मजदूर परिवार के राधेश्याम माली, पत्नी शकुंतला अपने दो बच्चों को बासी रोटी खिला रहे थे। जाते ही वे बोले हम कोरोना से ज्यादा तो सुबह-शाम के भोजन का इंतजाम नहीं होने से परेशान है। मजदूरी नहीं मिल रही। सरकारी मदद अब तक नहीं आई। रिश्तेदार व अन्य लोगों से आटा-दाल मांगकर खा रहे हैं लेकिन ये कब तक। हम तो फिर भी भूखे रह जाएंगे लेकिन बच्चों को कैसे भूखा सुलाएंगे। दो-तीन दिन से खेतों में जाकर जहां किसान गेहूं फसल समेट चुके हैं, वहां से बालियां बीनकर गेहूं निकाल रहे ताकि बच्चों का पेट भर सकें। सरपंच यशवंतसिंह सिसौदिया उर्फ सोनू बना ने कहा किहमें इस परिवार की जानकारी नहीं थी, अब इनकी भी भोजन व्यवस्था करवा देंगे।
पिंगरालाः गुमटी टूटी, राशन भी खत्म
पिपलौदा तहसील के गांव पिंगराला में भूमिहीन 40 वर्षीय मदनसिंह का कहना है कोरोना के साथ-साथ परिवार के लिए सुबह-शाम भोजन पानी की व्यवस्था करना बड़ी समस्या बन गई है। पत्नी व दो बच्चों का पेट पालने के लिए पहले फोरलेन किनारे बरखेड़ी फंटे पर चाय की गुमटी लगाता था लेकिन पिछले दिनों भूमाफिया मुहिम के दौरान गुमटी हटा दी गई। फिर पत्नी व हम दोनों दिहाड़ी मजदूरी करने लगे लेकिन अब तो वह भी बंद है। राशन खत्म हो गया है। सरपंच प्रतिनिधि डॉ. राधेश्याम कुमावत ने कहा कि जनपद से पांच परिवारों के लिए राशन आया था जो बांट दिया। इस परिवार के लिए जनपद को डिमांड भेजी जाएगी।
ढोढरः बेटा बीमार, राशन नहीं, बिजली भी कट गई
ढोढर में 60 वर्षीय विधवा गीताबाई 35 साल के बीमार पुत्र गोपाल के साथ रहती हैं और सामान्य दिनों में लोगों के घर बर्तन साफ करके रोजी-रोटी का इंतजाम करती थीं लेकिन अब वह काम भी नहीं रहा। सरकारी आश्वासन और जमीनी हकीकत का अंतर बता रही गीताबाई की आंख में आंसू आ गए। वे बोलीं बेटा बीमार है। राशनकार्ड नहीं। काम बंद हो गया। बिजली बिल नहीं भर पाई तो कनेक्शन कट गया। अंधेरे में रह रहीं और मोहल्ले वालों के सहयोग से काम चला रही हूं। आगे भगवान है। ढोढर की ही नई आबादी में रहने वाले ट्रक ड्राइवर अमजद खान पत्नी, चार बच्चों, दिव्यांग मां व दिव्यांग भाई के साथ रहता हूं लेकिन काम बंद हो गया। बेरोजगार हैं और अब जैसे-तैसे दिन काट रहे हैं। सरपंच प्रतिनिधि राकेश चौहान ने कहा कि कुछ लोगों के लिए जनपद से सामग्री आई थी, बाकी के लिए और डिमांड भेजी है। इनकी भी जरूरी मदद की जाएगी।
इधर, किसान परेशान, ग्रामीण क्षेत्र में चोरी-शराब तस्करी भी बढ़ गई
पिपल्याजाेधा के किसान पंकज राठौर कहते हैं कि मंडी चालू नहीं हो रही। खेत में फसल का ढेर लगा है लेकिन इसे बेच नहीं पा रहे। भाजपा ग्रामीण मंडल अध्यक्ष मुकेश बग्गड़ ने कहा कि जनपद को शासन से फंड मिला लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण लोगों को लाभ नहीं मिल पा रहा। क्षेत्र में चोरियां बढ़ गईं और अवैध शराब बिक्री भी धड़ल्ले से हो रही है। विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय ने कहा कि पुलिस की मिलीभगत से अवैध शराब तस्करी बढ़ी है। चोरियां भी पुलिस की लापरवाही का नतीजा हैं। मैंने इस बारे में एसपी से शिकायत की है। देखते हैं कब तक सुधार होगा।
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