लॉकडाउन के दूसरे चरण की शुरुआत में सोशल डिस्टेंसिंग के नियम टूटते नजर आए। इसकी दो वजह रही। एक तो कियोस्क और बैंकों के सामने जबरदस्त भीड़ उमड़ी। दूसरे टोटल लॉकडाउन की वजह से लगभग एक हफ्ते बंद रहने के बाद खुली किराना दुकानों पर भी जमकर खरीददारी हुई। इन दुकानों का समय ऐसा रखा गया है कि एक साथ बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर आ गए। पिछले दिनों जब जनधन योजना की राशि खातों में आई, तभी सोशल डिस्टेंसिंग की समस्या खड़ी होने लगी थी। अब तो किसान सम्मान निधि, कर्मकार मंडल, सहरिया भरण पोषण और उज्जवला योजना की राशि भी खातों में आने लगी है। इससे एकाएक दबाव बढ़ने लगा है। आराेन में तो बैंकों व कियोस्क के सामने मजमा सा लग गया। वहां भीड़ को नियंत्रित व व्यवस्थित करने के लिए कोई मौजूद नहीं था। इधर शहर में भी हालात खराब रहे। बैंकों के सामने लाइन तो लगी लेकिन एक मीटर की दूरी वाला नियम टूटता रहा।
कियोस्क व बैंक पर अब तक नहीं लगा जुर्माना
सोशल डिस्टेंसिंग के नियम टूटने पर दुकानदारों के खिलाफ तो कार्रवाई होती रही है लेकिन कियोस्क व बैंक के मामले में ऐसा नहीं हुआ। यहां लगातार नियम टूटने के बावजूद जवाबदेही तय नहीं होती। यही वजह है कि इन संस्थाओं को किसी तरह की कोई फिक्र नहीं रहती।
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