उज्जैन में एसिमटोमेटिक मरीज भी अब सामने आने लगे हैं। ऐसे मरीजों में कोरोना संक्रमण के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते हैं लेकिन उनमें वायरस होता है। हाथ, पैर और कमर दर्द या उल्टी-दस्त आदि बीमारी होने पर दवाइयां लेने के बाद भी मरीज एक-दो दिन में स्वस्थ नहीं हो रहा है तो संभवतः उसमें कोरोना का वायरस हो सकता है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है मरीज के अंदर कोरोना वायरस के लक्षण भले हीदिखाई नहीं दे लेकिन उसमें वायरस हो सकता है। अब तक उज्जैन में 185 एसिमटोमेटिक मरीज पाए जा चुके हैं। इनमें सामान्य लक्षण या लक्षण ही नहीं दिखाई दिए थे लेकिनकांटेक्ट हिस्ट्री या कंटेंटमेंट एरिया में रहने की वजह से जब इनके सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए तो ये लोग संक्रमित पाए गए। ऐसे मरीजों की रिपोर्ट आने तक इन्हें होम कोरेनटाइन किया जाता है।
जाने क्या है एसिमटोमेटिक
मरीज संक्रमित नहीं दिखाई देता है लेकिन उसमें वायरस होता है। वह जिन लोगों के संपर्क में आता है, वे भी संक्रमित हो जाते हैं क्योंकि सामान्य लक्षण के मरीज में भी वायरस पाया जाता है।
ये लक्षण तो एसिमटोमेटिक.... ऐसे जाने : {पैरों में सूजन आना और इलाज के बाद भी ठीक नहीं होना। {शरीर में या किसी हिस्से में चकत्ते पड़ना। {हाथ-पैर व कमर दर्द बने रहना, दवाइयां भी बेअसर होना। {उल्टी-दस्त होना। शरीर में पानी की कमी होना।
एसिमटोमेटिक के ये पांच कारण
1 भीड़ वाले स्थान पर आना-जाना।
2 हॉस्पिटल में आना- जाना लगा रहना या हॉस्पिटल से कोई आपके यहां आया हो।
3 आप कंटेंनमेंट एरिया में रहते हो और घर से बाहर निकलते हो।
4 कांटेक्ट हिस्ट्री- संक्रमितों के संपर्क में आना।
5 ट्रेवल हिस्ट्री- आप शहर से कहीं बाहर गए हो या आपके घर कोई आया हो।
दो दिन में ठीक नहीं हो तो स्क्रीनिंग
हल्का बुखार हो या उल्टी दस्त या फिर हाथ-पैर दर्द व पांव में सूजन होने पर दवाई लेने के बाद एक-दो दिन में आप स्वस्थ नहीं होते हैं तो आप एसिमटोमेटिक हो सकते हैं। ऐसे में आपको स्क्रीनिंग और सैंपलिंग करवाना होगी।
कोरोना के मुख्य लक्षण : बुखार आना, गले में खराश, सर्दी और खांसी होना। सांस लेने में तकलीफ होना। पुरानी बीमारी का बढ़ जाना।
सुधार नहीं हो तो सैंपल दें लोग, दूसरे लोगों में संक्रमण का खतरा
कोरोना के लक्षण दिखाई नहीं देने के बावजूद मरीजों में वायरस पाया जाता है। इन्हें एमटोमेटिक कहा जाता है। ऐसे लोगों को उल्टी-दस्त या हाथ-पैर दर्द या पैर में सूजन में दवाइयां लेने के बाद भी स्वास्थ्य में सुधार नहीं होता है तो उनके सैंपल लेना जरूरी है। नहीं तो ऐसे मरीज कोरियर स्टेज में रहते हुए दूसरे लोगों को भी संक्रमित कर सकते हैं।
- डॉ.एचपी सोनानिया, नोडल अधिकारी कोविड-19
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