लॉकडाउन से हर वर्ग का व्यक्ति आर्थिक रूप से कमजाेर हाे गया। राेजगार व काराेबार चौपट हाेने से मजदूर व मध्यमवर्गीय लाेगाें पर राेजी-राेटी का संकट हाे गया। इस बार गांधीसागर बांध में मछली पकड़ने का काम भी डेढ़ महीने से बंद है। इसी से कमाई करके घर-परिवार चलाने वाले करीब 2 हजार से अधिक मजदूरों पर संकट आ गया। मछुआरा महासंघ ने इनकी परेशानी को देखते हुए जून माह में दिया जाने वाला बोनस 1200 पंजीकृत मछुआरों को बांट दिया। इन लोगों को अब बारिश के तीन महीने परेशानी का सामना करना पड़ेगा।
गांधीसागर डैम में 15 अगस्त के बाद से मछली पालन का काम शुरू हो जाता है। कोलकाता, महाराष्ट्र, दिल्ली सहित अन्य राज्यों में यहां से मछली सप्लाई की जाती है। पिछले वर्ष औसत से अधिक बारिश होने के कारण डैम व डूब क्षेत्र में जलस्तर सिंतबर तक अधिक रहा था। इस कारण पिछले वर्ष मत्स्य खेट का काम देरी से शुरू हुआ। यहां रोज करीब मछली पकड़ने के काम में करीब 2000 से अधिक मछुआरे लगते हैं। जो अपनी स्वयं की नाव तैयार कर डैम में उतारते हैं। 8 महीने तक इसी से कमाई करते है और बारिश के चार महीने घर बैठते हैं। इस बार लॉकडाउन के कारण डैम से मछली पकड़ने का काम बंद होने से सभी मजदूर 25 मार्च के बाद से ही घर पर बैठे हैं। जो बचत की थी वह भी खत्म हो गई। कई परिवार की हालत अधिक खराब हो गई। इसको देखते हुए मछुआरा महासंघ ने निर्णय लिया और जून की जगह अप्रैल में ही इनको बोनस बांट दिया।
जनप्रतिनिधि व प्रशासन ने नहीं की मदद
नीमच-मंदसौर जिले के दो हजार से अधिक मछुआरों पर लॉकडाउन के कारण आर्थिक संकट आ गय। जनप्रतिनिधि व प्रशासन द्वारा जरूरतमंद लोगों को राशन व भोजन की व्यवस्था की गई। लेकिन इन मछुआरा परिवारों की तरफ किसी ने ध्यान नहीं दिया। इनमें से अधिकांश परिवार गांधीसागर डूब क्षेत्र में ही रहते हैं। कई परिवारों के सामने डेढ़ महीने से रोजी-रोटी का संकट है।
महासंघ ने 84 लाख रु. का बाेनस बांटा
लॉकडाउन में डेढ़ महीने से मजदूर घर पर है। आर्थिक संकट काे देखते हुए समितियों के माध्यम से पंजीकृत 1200 मछुआरों काे मत्स्य महासंघ ने 84 लाख रुपए का बाेनस बांट दिया है। 800 मजदूर एेसे हैं जिन्हें बाेनस नहीं मिलता उन्हें 8 माह की कमाई से ही घर चलाना पड़ता है।
लॉकडाउन में मजदूरी दी जाए
जब से लॉकडाउन हुआ है काम बंद हो गया। मछुआरों के सामने घर चलाने का संकट हो गया। डेढ़ माह से मजदूरी नहीं मिल रही। सरकार व मत्स्य महासंघ को चाहिए कि वह लॉकडाउन के दौरान भी सभी को मजदूरी का भुगतान करें। इस कारोबार से जुड़े मजदूरों के बाद कमाई का दूसरा माध्यम नहीं है। प्रशासन या जनप्रतिनिधि हमारी परेशानी ने तक नहीं आए। बारिश के चार महीने भी घर पर ही बैठना है।
सत्यनारायण भोई, सदस्य आदर्श मत्स्य समिति, रामपुरा
सरकार ने भी हमारी सुध नहीं ली
लॉकडाउन में मत्स्य महासंघ ने तो बोनस देकर इतिश्री कर ली। लेकिन सरकार या प्रशासन ने हमारी सुध नहीं ली। अधिकांश परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया है। जो बोनस राशि मिली वह भी खर्च हो गई। अब अगले चार महीने घर खर्च चलाने में परेशानी का सामना करना पड़ेगा। कई परिवार ऐसे हैं जो रोज की मजदूरी से भोजन की व्यवस्था करते हैं।
दुधमल भोई, मुछआरा जमालपुरा समिति
महासंघ से की थी आर्थिक मदद मांग
डेढ़ महीने से सभी मछुआरे घर पर है। डैम किनारे नाव छोड़ रखी है। लॉकडाउन के कारण मछली पकड़ने का काम बंद हो गया। मजदूरों की परेशानी को देखते हुए महासंघ से आर्थिक मदद की मांग की थी। मजदूरों के वेतन में काटे जाने वाली राशि जून के अंत में काम बंद होने पर बोनस के रूप में दी जाती है उसका भुगतान कर दिया। महासंघ ने अपनी तरफ से मदद नहीं की।
-सत्यनारायण भोई, अध्यक्ष, मछुआरा समिति-हाड़ाखेड़ी
दो-दो हजार रु. का भुगतान करें
मछुआरों की परेशानी का निराकरण करने के लिए मत्स्य महासंघ बना रखा है। इसका काम मछली पालन से जुड़े मजदूरों की मदद करना है। लॉकडाउन में सभी पर आर्थिक मार पड़ी है। सभी समिति के सदस्यों ने मांग की तो महासंघ को प्रत्येक मजदूर को दो-दो हजार रुपए का भुगतान करना था। लेकिन उसने बोनस की राशि ही बांट दी। जबकि यह तो मजदूरों का हक है जो उसे मिलना ही था। इस संबंध में सरकार को पत्र लिखकर अवगत कराएंगे।
दिनेश पडायपंथी, सदस्य-जल भूमि अधिकार समिति भोपाल
महासंघ मछुआरों का ध्यान रख रहा
लॉकडाउन में काम नहीं होने से मछुआरों ने मदद मांगी थी। 1200 मछुआरों को राेज 4 रु. प्रति किलाे दिए जाते हैं तथा 4 रुपए मछुआरे की मजदूरी में से काटे जाते हैं। इस तरह एक दिन में आठ रुपए इनके जमा हाेते हैं। इस तरह इन्हें 84 लाख रुपए बाेनस का भुगतान इस बार जून की जगह अप्रैल में ही कर दिया। मप्र ही अकेला राज्य है जहां मछुआरे काे 32 रुपए मजदूरी दी जाती है। महासंघ हमेशा मछुआरों के हितों को ध्यान में रखकर निर्णय लेता है।
नैनसिंह यादव, क्षेत्रीय प्रबंधक-गांधीसागर जलाशय
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