चौथे लॉकडाउन में प्रशासन ने 29 गांवों को छूट दी, लेकिन यह रियायत उन्हीं गांवों तक सीमित है, यानी यहां के लोग न बाहर जाएं और न बाहरी व्यक्ति अंदर आएं। इसके लिए सभी जगह बल्लियां गाड़ दी गईं। दूसरी तरफ रेड जोन से निकलकर शहर के लोग कहीं भी आ जा सकते हैं। ये अजीब सख्ती है, जहां आप पास के 29 गांवों में तो नहीं जा सकते, लेकिन दूसरे जिलों में आसानी से आ जा सकते हैं।
मैं शुक्रवार सुबह बेटमा के लिए निकला। चंदन नगर चौराहे पर जरूर पुलिसकर्मी थे, लेकिन बेटमा तरफ जाने वालों की कोई चेकिंग नहीं हो रही थी। रास्ते में दो जगह पुलिसकर्मी बैरिकेड्स लगाकर बैठे थे। वे न तो वाहनों की एंट्री कर रहे थे और न ही किसी से पूछताछ। इंदौर से बड़वाह तक रास्ते में भंवरकुआं, तेजाजी नगर, सिमरोल, बलवाड़ा और बड़वाह पांच थानों की सीमाएं थी, लेकिन कोई पुलिसकर्मी रोक-टोक नहीं कर रहा था। तेजाजी नगर ब्रिज के नीचे पुलिसकर्मी जरूर खड़े थे, लेकिन उनका ध्यान सिर्फ लोडिंग वाहनों पर था। बाकी जगह चेकिंग नहीं हुई।
इंदौर से देवास के बीच भी कोई चेकिंग पोस्ट नहीं थी। राऊ गोल चौराहे से बायपास पर कई थाना क्षेत्रों की सीमाएं हैं। यहां भी कहीं पुलिसकर्मी नहीं थे, यानी आप आसानी से देवास चले जाओ।
पीथमपुर और उज्जैन का भी रास्ता साफ
यही हाल राऊ से पीथमपुर और इंदौर से उज्जैन रोड का था। आप इंदौर से दूसरे जिलों में जा सकते हो, लेकिन शहरी सीमा के 29 गावों में नहीं जा सकते। जैसे बिचौली मर्दाना और भानगढ़ में गड्ढे खोदकर बल्लियां गाड़कर रास्ते बंद कर दिए गए हैं।
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