लॉकडाउन के चलते गांव से रैसलपुर उप मंडी तक परिवहन का साधन नहीं मिलने से चने की आवक बहुत कम है। अभी तक 686 क्विंटल चना ही आया है, जबकि खरीदी का लक्ष्य 9 हजार क्विंटल रखा गया है। उप मंडी में खरीदी कर रही घाटली सोसाइटी प्रबंधक एहसान खान ने बताया चने का समर्थन मूल्य 4875 रुपए प्रति क्विंटल है। इस समय छोटे किसानों की उपज ही खरीदी केंद्र में आ रही है। दो-तीन छोटे किसान मिलकर एक ट्रॉली में माल ला रहे हैं। बड़े किसानों को अभी चना बेचने के एसएमएस नहीं मिले हैं। खरीदी केंद्र पर किसी छोटे किसान का चना रिजेक्ट नहीं किया गया है। खरीदी केंद्र से उपज के परिवहन में कोई दिक्कत नहीं है। शुक्रवार को ही चार गाड़ी चना पवारखेड़ा भेजा गया है। एफएक्यू का नियम पत्थर की लकीर बना क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष लीलाधर राजपूत का कहना है कि होशंगाबाद जिले में सिवनी मालवा, सोहागपुर, पिपरिया, बनखेड़ी तक चने की उपज ज्यादा है। बाकी जगह किसानों ने गेहूं लगाया है। फसल कटाई के पहले हवा के साथ बारिश और ओले गिरे जिससे फसल आड़ी हो गई। हार्वेस्टर से कटाई में कुछ मिट्टी तो आएगी, लेकिन खरीदी केंद्र पर किसानों की उपज रिजेक्ट की जा रही है। एफएक्यू का मापदंड पत्थर की लकीर बन गया है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


लॉकडाउन के चलते गांव से रैसलपुर उप मंडी तक परिवहन का साधन नहीं मिलने से चने की आवक बहुत कम है। अभी तक 686 क्विंटल चना ही आया है, जबकि खरीदी का लक्ष्य 9 हजार क्विंटल रखा गया है। उप मंडी में खरीदी कर रही घाटली सोसाइटी प्रबंधक एहसान खान ने बताया चने का समर्थन मूल्य 4875 रुपए प्रति क्विंटल है। इस समय छोटे किसानों की उपज ही खरीदी केंद्र में आ रही है। दो-तीन छोटे किसान मिलकर एक ट्रॉली में माल ला रहे हैं। बड़े किसानों को अभी चना बेचने के एसएमएस नहीं मिले हैं। खरीदी केंद्र पर किसी छोटे किसान का चना रिजेक्ट नहीं किया गया है। खरीदी केंद्र से उपज के परिवहन में कोई दिक्कत नहीं है। शुक्रवार को ही चार गाड़ी चना पवारखेड़ा भेजा गया है।

एफएक्यू का नियम पत्थर की लकीर बना
क्रांतिकारी किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष लीलाधर राजपूत का कहना है कि होशंगाबाद जिले में सिवनी मालवा, सोहागपुर, पिपरिया, बनखेड़ी तक चने की उपज ज्यादा है। बाकी जगह किसानों ने गेहूं लगाया है। फसल कटाई के पहले हवा के साथ बारिश और ओले गिरे जिससे फसल आड़ी हो गई। हार्वेस्टर से कटाई में कुछ मिट्टी तो आएगी, लेकिन खरीदी केंद्र पर किसानों की उपज रिजेक्ट की जा रही है। एफएक्यू का मापदंड पत्थर की लकीर बन गया है।



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