नानाखेड़ा स्टेडियम के समीप वैकल्पिक जगह उपलब्ध होने के बावजूद प्रशासन ने समर्थन मूल्य का गेहूं रखने के लिए फिर स्टेडियम की खेल संरचना को बर्बाद कर दिया है। समर्थन मूल्य का गेहूं रखने के लिए प्रशासन ने जिस तरह मैदान का स्वरूप बिगाड़ा है, इससे खिलाड़ियों में आक्रोश है। बीते साल खेल संगठनों ने 3 लाख रुपए अपनी जेब से खर्च कर स्टेडियम को खेलने लायक मैदान बनाया। श्री महाकालेश्वर खेल संकुल द्वारा यहां फुटबाल मैदान, क्रिकेट पिच और एथलेटिक्स ट्रैक बनाया था। दो दशक से मैदान की स्थिति जर्जर था, जब मैदान खेलने लायक हुआ तो ख़िलाडी प्रैक्टिस के लिए आने लगे थे। कोरोना काल में खिलाड़ियों की आवाजाही नही है तो यहां गेहूं का भंडारण शुरू कर दिया है। एक तरफ खिलाड़ियाें का नुकसान और दूसरी तरफ खुले में गेहूं रखकर सरकार भी बड़ा नुकसान उठा सकती है क्योंकि मानसून की दस्तक हो गई है। मैदान पर 5 से 7 डंपर चूरी बिछाकर कीचड़ की रोक का प्रयास किया है। इस चूरी से मैदान बारिश के बाद वापस उबड़ खाबड़ हो जाएगा। इधर जिला खाद्य अधिकारी एमएल मारू ने बताया भंडारण के लिए ज्यादा जगह चाहिए, 20 हजार क्विंटल का भंडारण करना है। नानाखेड़ा स्टेडियम में आज से शुरुआत की है।
प्रशासन ने खिलाड़ियों के भविष्य और सपनों को दरकिनार किया
श्री महाकालेश्वर खेल संकुल के पार्षद विजय सिंह दरबार ने बताया प्रशासन ने खिलाड़ियों के भविष्य और सपनों को दरकिनार किया है। गेहूं का भंडारण नानाखेड़ा प्राइवेट बस स्टैंड में भी किया जा सकता था। यहां शेड बने हुए हैं, गेहूं बारिश में भी सुरक्षित रहते। खाद्य विभाग द्वारा यहां फिलहाल 2500 क्विंटल गेहूं रखा गया है, यहां 20 हजार क्विंटल गेहूं रखा जाएगा। क्रिकेट टीम के नितिन श्रीवास्तव, फुटबाॅल कोच विशाल कोकाटे ने विरोध दर्ज किया है। फोटो | शाहिद खान
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