शहर में दो लाख जरूरतमंद परिवार हैं और इनके लिए राज्य, केंद्र सरकार की याेजना की तरह 112 लाख किलाे गेहूं और आटा बांटा जा चुका है। रोजाना 50 हजार खाने के पैकेट भी बांटे जा रहे हैं। बावजूद इसके राशन को लेने के लिए कंट्रोल की दुकानों से लेकर नेताओं के घर तक भीड़ टूट रही है। सवाल ये है कि जब इतना राशन बांटा गया है ताे ये भीड़ और हायताैबा क्याें?
दैनिक भास्कर ने पड़ताल में पाया कि शहर के 1.98 लाख गरीब परिवाराें काे मार्च से लेकर मई तक का 107 लाख किलाे गेहूं राज्य सरकार ने पहले ही दे दिया। जबकि 10 लाख किलो गेहूं का कोटा, केंद्र सरकार की घोषणा के बाद जारी हुआ। इस गेहूं को पिसवाकर लोगों को तक पहुंचाया जा रहा है। अभी तक इसमें से करीब 5 लाख किलो आटा गरीबों को मिल चुका है। इस तरह कुल 112 लाख किलो गेहूं और आटा बांटा जा चुका है। यदि सामाजिक संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा बांटेे जा रहे लगभग पांच लाख किलो राशन काे इसमें जाेड़ लें ताे यह मात्रा बढ़ जाती है। इस सबके बीच भी कई ऐसे गरीब लोगों तक आटा नहीं पहुंच रहा, जिनके हाथ खाली हैं। इसके पीछे कारण है, प्रशासन और खाद्य विभाग का आवंटन सिस्टम, जिसके कुप्रबंधन की वजह से यह हालात बिगड़ रहे हैं।
शहर में दाे लाख जरूरतमंद परिवार, कितना बंटा सरकारी राशन
- शहर में आटे के 52 हजार पैकेट गरीबों को बांटने का लक्ष्य है। एक पैकेट में 10 किलो आटा है। यानि 5.20 लाख किलो आटा शहर में बांटा जाना है।
- 300-300 क्विंटल गेहूं प्रत्येक जनपद पर पहुंचाया है। जबकि 400 क्विंटल गेहूं का कोटा एक-एक नगर पालिका में दिया है।
- दावा : खाद्य विभाग का कहना है कि शहर में अभी तक 35 हजार आटे के पैकेट बंट गए हैं। यानि लगभग 3.50 किलो आटा बांटा जा चुका है। वहीं ग्रामीण इलाकों में 1.50 लाख किलो आटा बंट चुका है।
माह गेहूं
मार्च 35.46 लाख किलो
अप्रैल 42.25 लाख किलो
मई 29.91 लाख किलो
नाेट: कुल 1.98 लाख परिवारों को 107.62 लाख किलो गेहूं पीडीएस की दुकानाें से बांटा गया है।
मिस मैनेजमेंट... इस वजह से बिगड़ रहे हैं हालात
खाद्य विभाग चार से पांच वार्ड का एक समूह बनाकर दो से तीन कंट्रोल की दुकानों तक राशन पहुंचा रहा है। ऐसे में सिर्फ उन्हीं को दुकानों से राशन दिया जाना है, जिन वार्डों का नंबर है। लेकिन दूसरे वार्ड के लोग भी यहां राशन लेने पहुंच रहे हैं। लश्कर के लोग मुरार और हजीरा तक राशन लेने जा रहे हैं। सबसे बड़ी खामी है, इसकी न कोई लिस्ट तैयार की है और न ही कोई रिकॉर्ड रखा जा रहा है। सिर्फ सील और सेल्समैन के हस्ताक्षर देखे जा रहे हैं।
लोग दिल खोलकर कर रहे दान
शहर की समाजसेवी संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों द्वारा जरूरतमंदों को अब तक पांच लाख किलो से अधिक राशन बांटा जा चुका है। इसमें आटा, चावल, दाल, मसाले, तेल और नमक आदि शामिल है। इसके अलावा शहर में रोजाना 20 हजार पैकेट बने हुए खाने के बांटे जा रहे हैं। खास बात यह है कि जो लोग जरूरत बताकर राशन ले रहे हैं, वे ही पके हुए भोजन के पैकेट भी ले रहे हैं।
जो जरूरतमंद नहीं, वे भी ले रहे गरीबों के कोटे का आटा
पिछले चार दिन में शहरी क्षेत्र के 49 वार्डों में 10-10 किलो आटे के पैकेटों का वितरण हो चुका है। मुफ्त आटा पैकेट ऐसे परिवारों को बांटे जा रहे हैं जो गरीब हैं और जिनके पास 24 कैटेगरी में से किसी में भी पात्रता नहीं है। इसी कारण आटा पैकेटों का वितरण सिर्फ एपीएल (सफेद) कार्ड व समग्र आईडी के आधार पर हो रहा है। अफसरों के मुताबिक दो दिन में आटा लेने वाले लोगों की लाइन में ऐसे लोग भी देखे गए हैं जिनकी गिनती क्षेत्र के संपन्न परिवारों में है या फिर जो काम-धंधा नौकरी पेशा हैं।
जिसे राशन मिल चुका है वह दाेबारा कतार में लग रहा
एक बार सामान ले चुका व्यक्ति दोबारा पहुंच रहा है। इसे सुधारने के लिए हम वॉलेंटियर की संख्या बढ़ा रहे हैं। सभी को निर्देश दिए हैं, एपीएल कार्ड वाले जो लोग राशन ले जाएं उनके राशन कार्ड पर सील लगाई जाए और तारीख के साथ हस्ताक्षर कर दिए जाएं। इसमें पुलिस से अतिरिक्त फोर्स की भी मांग करेंगे।
-सीएस जादौन, जिला खाद्य आपूर्ति नियंत्रक
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