साेमवार सुबह करीब छह बजे हल्की बारिश होने से दिन का पारा तीन डिग्री लुढ़ककर 33.8 डिग्री पर आ गया। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के असर से पाकिस्तान के ऊपर चक्रवात बना हुआ है। साथ ही राजस्थान से लेकर अंचल से होते हुए छत्तीसगढ़ तक ट्रफ लाइन जा रही है और अरब सागर से नमी आ रही है। सोमवार को 1 मिमी बारिश हुई। इससे दिन का तापमान लुढ़क गया। इससे मौसम में ठंडक रही। वरिष्ठ मौसम वैज्ञानिक वेद प्रकाश सिंह ने कहा, नया पश्चिमी विक्षोभ 23 अप्रैल से सक्रिय हो रहा है, इससे अंचल में 24 अप्रैल से बारिश और आंधी का दौर आएगा।
5 दिन में अधिकतम तापमान में 7.2 डिग्री लुढ़का
16 अप्रैल को अधिकतम तापमान 41 डिग्री था। जबकि सोमवार को यह 33.8 डिग्री दर्ज किया गया। इस तरह 5 दिन में तापमान में 7.2 डिग्री गिरावट दर्ज की गई। अरब सागर से नमी आने और राजस्थान से अंचल से होते हुए छत्तीसगढ़ तक ट्रफ लाइन जा रही है इससे सोमवार को सुबह की आर्द्रता 17% बढ़त के साथ 57% दर्ज की गई। यह सामान्य से 24% अधिक रही। तापमान पिछले दिन की तुलना में अधिकतम तापमान 2.6 डिग्री गिरावट के साथ 33.8 डिग्री दर्ज किया गया। जबकि न्यूनतम तापमान 1 डिग्री गिरावट के साथ 21.6 डिग्री दर्ज किया गया।
सुबह 2.1 डिग्री तो शाम को 4.3 डिग्री लुढ़का पारा
सोमवार सुबह 6 बजे से पहले 20 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवा चली। इसके बाद हल्की बारिश हुई। इसके बाद पिछले दिन की सुबह की तुलना में 8:30 तापमान 2.1 डिग्री कम (25.6 डिग्री) रहा। जबकि शाम को पारा 4.3 डिग्री गिरावट के साथ 30.6 डिग्री दर्ज किया गया।
तापमान में गिरावट से स्वास्थ्य पर प्रभाव
जीआरएमसी के मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अजयपाल सिंह का कहना है कि नमी बढ़ने के साथ तापमान में गिरावट आने से कोरोना वायरस के संक्रमण का फैलाव हो सकता है, क्योंकि एमआईटी कैम्ब्रिज में हुई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि तापमान में गिरावट आने से कोरोना वायरस का संक्रमण फैलने की संभावना ज्यादा रहती है, जबकि तापमान बढ़ने पर इसका फैलाव कम होगा। डॉ. सिंह के मुताबिक ऐसे मौसम में ठंडा पानी पीने से बचें। साथ ही एसी और कूलर बिल्कुल नहीं चलाएं।
ग्रामीण क्षेत्र में फसलों को नहीं हुआ नुकसान
कृषि विज्ञान केंद्र ग्वालियर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजसिंह कुशवाह का कहना है कि डबरा और भितरवार में केवल बूंदाबांदी हुई है। इससे फसलाें को नुकसान नहीं हुआ। यदि बारिश होती तो खेतों में खड़ी फसल और खलियान में पड़ी फसल को नुकसान होता।
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