एम्स भोपाल कोरोना से बचाव के लिए तैयार किए गए इम्युनो मॉड्यूलेटर दवा ‘माइक्रोबैक्टीरियम-डब्ल्यू’ का क्लीनिकल ट्रॉयल करेगा। यह दवा एक इंजेक्शन के रूप में हैं। क्लीनिकल ट्रॉयल कोरोना से संक्रमित गंभीर रूप से कमजोर मरीजों पर किया जाएगा, ताकि इस वैक्सीन के असर और सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन किया जा सके। एम्स ने अधिकृत बयान जारी कर बताया है कि माइक्रोबैक्टीरियम-डब्ल्यू नाम के इम्युनो मॉड्यूलेटर इंजेक्शन का निर्माण अहमदाबाद (गुजरात) की दवा निर्माता कंपनी कैडिला फॉर्मास्युटिकल ने किया है। इस पर क्लीनिकल ट्रॉयल के अध्ययन को यूएसए और भारत की शीर्ष स्वास्थ्य शोध संस्थाओं एफडीए (यूएस-फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) और आईसीएमआर दोनों ने मंजूरी दी है। यह ट्रॉयल एम्स के डॉयरेक्टर डॉ. सरमन सिंह के नेतृत्व में 4 डॉक्टरों की टीम करेगी। इस टीम में प्रो. रजनीश जोशी, प्रो. देबासीस विस्वास, डॉ. सौरभ सैगल, डॉ. सागर खडंगा शामिल हैं। डॉ. सरमन सिंह ने बताया कि इस रिसर्च अध्ययन के लिए आईसीएमआर भोपाल एम्स को फंडिंग करेगा। 3 महीने का लगेगा समय इस रिसर्च अध्ययन के लिए 3 माह की मियाद तय की गई है। डॉ. सरमन सिंह के मुताबिक अगले एक सप्ताह के अंदर ट्रॉयल प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह ट्रॉयल 100 मरीजों पर होगा। इसके लिए जल्द ही वैधानिक प्रक्रिया के तहत कोविड-19 पॉजिटिव मरीजों को एम्स में भर्ती किया जाएगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today भोपाल स्थित एम्स (फाइल फोटो)


एम्स भोपाल कोरोना से बचाव के लिए तैयार किए गए इम्युनो मॉड्यूलेटर दवा ‘माइक्रोबैक्टीरियम-डब्ल्यू’ का क्लीनिकल ट्रॉयल करेगा। यह दवा एक इंजेक्शन के रूप में हैं। क्लीनिकल ट्रॉयल कोरोना से संक्रमित गंभीर रूप से कमजोर मरीजों पर किया जाएगा, ताकि इस वैक्सीन के असर और सुरक्षा मानकों का मूल्यांकन किया जा सके।

एम्स ने अधिकृत बयान जारी कर बताया है कि माइक्रोबैक्टीरियम-डब्ल्यू नाम के इम्युनो मॉड्यूलेटर इंजेक्शन का निर्माण अहमदाबाद (गुजरात) की दवा निर्माता कंपनी कैडिला फॉर्मास्युटिकल ने किया है। इस पर क्लीनिकल ट्रॉयल के अध्ययन को यूएसए और भारत की शीर्ष स्वास्थ्य शोध संस्थाओं एफडीए (यूएस-फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन) और आईसीएमआर दोनों ने मंजूरी दी है।

यह ट्रॉयल एम्स के डॉयरेक्टर डॉ. सरमन सिंह के नेतृत्व में 4 डॉक्टरों की टीम करेगी। इस टीम में प्रो. रजनीश जोशी, प्रो. देबासीस विस्वास, डॉ. सौरभ सैगल, डॉ. सागर खडंगा शामिल हैं। डॉ. सरमन सिंह ने बताया कि इस रिसर्च अध्ययन के लिए आईसीएमआर भोपाल एम्स को फंडिंग करेगा।

3 महीने का लगेगा समय
इस रिसर्च अध्ययन के लिए 3 माह की मियाद तय की गई है। डॉ. सरमन सिंह के मुताबिक अगले एक सप्ताह के अंदर ट्रॉयल प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। यह ट्रॉयल 100 मरीजों पर होगा। इसके लिए जल्द ही वैधानिक प्रक्रिया के तहत कोविड-19 पॉजिटिव मरीजों को एम्स में भर्ती किया जाएगा।



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भोपाल स्थित एम्स (फाइल फोटो)


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