लॉकडाउन में पुलिस की सख्ती से बचने के लिए कुछ लोग वाहनों पर केमिस्ट का स्टीकर लगाकर चल रहे हैं। वहीं कुछ डॉक्टरों के पुराने प्रिस्क्रिप्शन दिखाने लगते हैं। कई तो फार्मास्यूटिकल कंपनियों के पुराने लेटर हेड तक का सहारा ले रहे हैं। जब इनका फर्जीवाड़ा पकड़ा जाता है तो गुहार लगाते हैं- सर दो डंडे मार लो, लेकिन केस दर्ज मत करो। बजरिया पुलिस ने 80 फीट राेड की टर्निंग पर बैरियर लगाया है। जब पुलिस पर्चे देखती है तो पता चलता है कि पर्चा तो दो साल पुराना हैं। यहां ड्यूटी कर रहे साबिर खान ने बताया कि हर दिन पुराने लेटर हेड, मेडिकल स्टोर का फॉर्म-20, प्रिस्केप्शन, ओपीडी की रसीद आदि दिखाने वाले 50 लोगों को पकड़ते हैं।
एक व्यक्ति ने स्कूटर पर केमिस्ट का स्टीकर लगाया था। जब पुलिस ने दस्तावेज मांगे तो वह दिल्ली के डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन दिखाने लगा, वह भी 2010 का। पुलिस ने केस दर्ज करने की बात कही तो वह मांफी मांगने लगा। बाद में समझाकर छोड़ दिया।
जो डॉक्टर दुनिया में नहीं, उनका पर्चा दिखा रहे
बजरिया नगर सुरक्षा समिति के एसपी यादव ने बताया कि वे पुलिस के साथ 6 घंटे की ड्यूटी करते हैं। ऐसे ही एक व्यक्ति ने डेट बदलकर डॉ. एसके दुबे का पर्चा दिखाया, जिनकी मौत 3 साल पहले हो चुकी थी।
उमेश यादव, थाना प्रभारी बजरिया के मुताबिक, कई लोग लॉकडाउन का उल्लंघन वाजिब तरीके से करने की कोशिश करते हैं। इसमें असामाजिक तत्व अधिक हैं। अनुभवी स्टॉफ ऐसे लोगों को आसानी से पकड़ लेता है। जब केस दर्ज करने की बात करो तो पैर पकड़ लेते हैं या फिर भाग जाते हैं। हमारा पूरा स्टाफ पूरी तरह से चौकन्ना है। ऐेसे लोगों को समझाइश देकर छोड़ना पड़ता है।
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