उज्जैन जिले की शराब की दुकानों को नहीं खोलने के पीछे ठेकेदार व शासन की बीच की खींचतान सामने आई है। ये खींचतान इस हद तक बढ़ गई कि मामले में ठेकेदार ने हाईकोर्ट में आर्थिक राहत के लिए याचिका दायर की है, सुनवाई बुधवार को होना है।
शराब के ठेके जब हुए, तब प्रदेश में कांग्रेस सरकार थी। उसने एक जिले में एक ठेकेदार पद्धति से टेंडर प्रक्रिया पूरी करवाई। उज्जैन जिले की 141 दुकानों के वित्तीय वर्ष 2020-21 के लिए 16 मार्च को टेंडर हुए। इस समय स्थिति सामान्य थी। शासन ने इस प्रक्रिया में पिछले वित्तीय वर्ष की तुलना में ठेके की राशि में 25 फीसदी तक का इजाफा करके सरकारी बोली तय की। ऐसे उज्जैन जिले को ठेका अब तक की सर्वाधिक अधिक कीमत पर 438 करोड़ में गया। पिछले वित्तीय वर्ष ये ठेका 357 करोड़ का था। यानी इस बारसीधे-सीधे 81 करोड़ रुपए अधिक। ठेका होने के बाद दुकानें खुलीऔर सत्ता परिवर्तन हुआ, भाजपा सरकार आ गई। साथ ही कोरोना महामारी ने भी दस्तक दे दी। तब से जिले की शराब की सभी दुकानें बंद हैं। दो महीने के लाॅकडाउन के बाद हाल ही में शासन ने 20 मई से जिलेकी नगरीय क्षेत्रों की शराब दुकानें छोड़कर अंचल की 101 दुकानें खोलने के निर्देश दिए लेकिन व्यापार के अनुकूल परिस्थितियां नहीं होने से दुकानें नहीं खोली गई। ठेकेदार विवेक जायसवाल ने बताया शासन से आग्रह किया था पिछले वित्तीय वर्ष की लाइसेंस व ठेका फीस पर ही कारोबार करने दें। मांग नहीं मानी गई तो आर्थिक रूप से राहत के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है। मामले में सुनवाई बुधवार को है।
आरएच पचौरी, एडीईओ, आबकारी: सर्कुलर से ठेकेदार को अवगत करवा रहे हैं
शासन के निर्देश थे नगरीय क्षेत्रों को छोड़ अंचलों में शराब की दुकानें खोली जाए लेकिन नहीं खोली गई। आगे क्या स्थिति बनती है कुछ नहीं कहा जा सकता है। शासन के हर सर्कुलर से ठेकेदार को अवगत करवा रहे हैं।
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