स्कूल, कॉलेजों की तरह साफ-सफाई की सालाना परीक्षा पर भी कोरोना वायरस का साया मंडराता नजर आ रहा है। अभी पूरा सरकारी अमला कोरोना वायरस से लोहा लेने में लगा है। यह क्रम जुलाई-अगस्त या उसके बाद तक चल सकता है। ऐसे में सरकार स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 को स्थगित कर सकती है। ऐसा नहीं हुआ तो भी सर्वेक्षण का स्वरूप बदलकर बहुत सीमित कर रैकिंग की जाएगी।
शहरी विकास मंत्रालय ने तैयारी शुरू कर दी है। सबसे मजबूत वजह यह है कि 2021 में होने वाले सर्वेक्षण को लेकर सरकार ने गाइडलाइन या निर्देश जारी नहीं किए हैं, जबकि बीते साल जून में पहली स्वच्छता लीग (तिमाही आकलन) निपट चुकी थी। इतना ही नहीं 2020 का रिजल्ट भी घोषित नहीं हो पाया है। इसके बाद 15 जून के आसपास आने की उम्मीद है।
इन कारणों से आगे बढ़ सकता है स्वच्छता सर्वेक्षण
- सरकार का सारा फोकस फिलहाल कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने पर है। तमाम नगरीय निकाय भी इसी के इंतजाम में लगे हैं।
- अगस्त-सितंबर में वायरस का असर कम या खत्म हो भी गया तो गाइडलाइन जारी होने और फिर तैयारी करने के लिए निकायों के पास सिर्फ तीन माह का समय बचेगा।
- 2020 के सर्वे का रिजल्ट सरकार जारी नहीं कर पाई है। यह अप्रैल या मई में आ जाता है।
- सरकार और निकाय दोनों के पास बजट की कमी है। अकेले रतलाम में इस पर हर साल 40 से 60 लाख रुपए खर्च होते हैं।
हर साल बदल जाते हैं मापदंड
सरकार ने 2016 में स्वच्छता सर्वेक्षण की शुरुआत की थी, तब से हर साल सर्वेक्षण के मापदंड बदल रहे हैं। 2020 में अप्रैल से दिसबंर तक तीन स्वच्छता लीग और जनवरी में फाइनल सर्वे हुआ था। यह 6000 अंक का था। यह 2019 में 5000 तथा 2018 व 2017 में 4000 अंक का था। वहीं पहली बार सरकार ने बिना तैयारी के सीधे सर्वे कराकर रैंक जारी की थी।
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