स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से स्वास्थ्य विभाग का एक कर्मचारी एक महीने से परेशान है। कोरोना के इस दौर में कर्मचारी की पत्नी की सामान्य बीमारी के चलते मौत हुई थी। डॉक्टरों ने उन्हें कोरोना संदिग्ध मानकर सैंपलिंग की, जिसकी रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं आई है।
स्वास्थ्य विभाग के एंटी लार्वा यूनिट के कर्मचारी राकेश मिश्रा ने बताया उनकी पत्नी उमा को सांस की बीमारी थी। 8 अप्रैल को उन्हें सांस लेने में परेशानी और एसिडिटी बढ़ने पर उपचार के लिए जिला अस्पताल लेकर गए। कोरोना संदिग्ध मानकर डॉक्टरों ने उन्हें माधवनगर अस्पताल में भर्ती किया। यहां दो दिन तक उनकी एसिडिटी की तकलीफ खत्म नहीं हो पाई। डॉक्टरों ने उनकी जांच कराई। इसी दौरान 11 अप्रैल को उनका निधन हो गया। पत्नी की मौत के बाद कोरोना के डर से एक भी रिश्तेदार अंतिम यात्रा में शामिल होने के लिए नहीं पहुंचा। मिश्रा ने अकेले पत्नी का अंतिम संस्कार किया। इसके बाद जब वे घर आए तो पड़ोसियों के बीच यह बात चल रही थी कि उनकी पत्नी की कोरोना से मौत हुई है। इसके कारण उनसे सबने बात करना बंद कर दिया। उन्हें दूधवाले ने दूध देना बंद कर दिया। पत्नी के 10वें का कार्यक्रम के लिए किसी रिश्तेदार ने मदद नहीं की।
डॉक्टर बोले- आपकी जांच के बाद पत्नी की रिपोर्ट मिलेगी
मिश्रा ने बताया पत्नी की रिपोर्ट नहीं मिलने पर उन्होंने 1 मई को सीएमएचओ से संपर्क किया तो उन्होंने कहा आप भी जांच करवा लीजिए। मिश्रा ने जांच करवाई। मिश्रा की जांच रिपोर्ट निगेटिव आई। मिश्रा ने सीएमएचओ से पत्नी की रिपोर्ट के बारे में पूछा तो उन्होंने जवाब दिया- आपकी निगेटिव आई है तो आपकी पत्नी की भी निगेटिव ही होगी।
उमादेवी की मौत हो चुकी है लेकिन रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। उनके पति की जांच रिपोर्ट निगेटिव पाई गई है। इसी आधार पर माना जा रहा है कि उनकी कोरोना से मौत नहीं हुई थी।
अनुसुइया गवली, सीएमएचओ
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