रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर ही मैंने ठान लिया था कि जल्दी स्वस्थ होकर फिर मरीजों की सेवा में फील्ड में उतरूंगा। मैं और मेरे परिवार के तीन सदस्य कोरोना संक्रमण से जूझे हैं। मैं बीमार लोगों के दर्द को महसूस कर चुका हूं, इसलिए दोगुना हौंसले के साथ फील्ड में जाने का निर्णय लिया। 8 मई को मैं स्वस्थ होकर घर लौटा था। उसके बाद होम क्वॉरेंटाइन रहा। मैंने बुधवार सुबह अपने विभाग में जाकर कहा मैं फिर से ड्यूटी के लिए आ गया हूं। मैं पहले की तरह आरआरटी में ही सेवाएं देने का इच्छुक था और विभाग ने मुझे फिर से इसी टीम में शामिल कर लिया। जिस तरह से देश की सीमाओं पर हमारे सैनिक मुस्तैदी से ड्यूटी कर हमारी रक्षा करते हैं उसी तरह से एक डॉक्टर का फर्ज भी है कि वह कोरोना संक्रमण काल में मरीजों की सेवा में अपनी पूरी ताकत झोंक दें। इसी प्रेरणा ने मुझे वापस ड्यूटी पर लौटने और आरआर टीम में काम करने का साहस दिया।
- डॉ. जलील अहमद कुरैशी
सैंपल लेते समय संक्रमित
डॉ.अहमद कुरैशी उम्र 40 साल निवासी बेगम बाग कॉलोनी आरआर टीम में शामिल होकर संदेही मरीजों के सैंपल लेने का कार्य कर रहे थे। 22 अप्रैल को मरीजों के सैंपल लेने के दौरान वे संक्रमित हो गए थे। उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद आरआर टीम के डाॅक्टर्स और स्टाफ ने रोटेशन ड्यूटी और 7 दिन के रेस्ट की मांग को लेकर काम करना बंद कर दिया था। स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन की समझाइश के बाद टीम काम पर लौट गई थी।
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