सरकार ने मंडी अधिनियम 1972 के अध्यादेश में संशोधन करते हुए मॉडल एक्ट लागू किया है। इस संबंध में किसी भी संगठन ने मांग नहीं की। अगर ये अमल में आया तो इससे मंडी व्यापारी, किसान, हम्माल-तुलावटियों की आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा इसलिए इसे निरस्त किया जाए।
इस संबंध में कृषि उपज मंडी कर्मचारियों ने मप्र राज्य कृषि विपणन बोर्ड भोपाल के नाम ज्ञापन विधायक डॉ. राजेंद्र पांडेय को सौंपा। इसमें बताया कि अगर सरकार संशोधन लागू करना चाहती है तो पहले कर्मचारियों को निम्न आश्वासन चाहिए। इसमें मंडी बोर्ड व समितियों के कर्मचारियों को शासन के कर्मचारी घोषित किया जाए। सभी कर्मचारियों को शासन के अधीन कर राज्य शासन द्वारा समय पर वेतन दिया जाए। कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति पूर्व सेवा से पृथक नहीं किया जाए। दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को मंडी के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घोषित किया जाए। प्राइवेट मंडी, इलेक्ट्राॅनिक प्लेटफार्म, ट्रेडिंग को मंडी समितियों के नियंत्रण में रखा जाकर विपणन संबंधी प्रक्रियाओं का संचालन मंडी समिति से कराने सहित अन्य बिंदुओं पर निर्णय लिया जाए।
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