प्रधानमंत्री फसल बीमा को केंद्र सरकार ने स्वैच्छिक कर दिया है। जिले में किसान संगठनों ने बीमा प्रीमियम को लेकर सोसायटियों में काटी जा रही जबरिया राशि को लेकर कड़ा विरोध किया था। किसान इस बात से खुश है कि उनकी बात को सुना गया है। हालांकि प्रतिनिधियों का यह भी मानना है कि फसलों की प्राकृतिक नुकसानी के लिए बीमा बेहद जरूरी है।
यह अच्छी बात है कि सरकार ने उनकी बात को सुना। लेकिन किसानों को इस बात के लिए प्रेरित किया जाएगा कि वे फसल बीमा जरूर कराएं। खरीफ फसल के लिए 2 प्रतिशत व रबी फसल के लिए 1.5 प्रतिशत प्रीमियम दर से बीमा राशि काटी। फसल खराब होने पर बीमा कंपनी प्रतिनिधि राजस्व व कृषि विभाग की टीम के साथ सर्वे कर क्लेम दिलाती है।
खरगोन-बड़वानी जिलों में साढ़े 3 लाख से ज्यादा सदस्य
जिला सहकारी बैंक से जुड़ी खरगोन व बड़वानी जिलों की 192 सहकारी साख संस्थाएं हैं। जिनमें साढ़े तीन लाख से ज्यादा किसान सदस्य हैं। नियमित ऋण लेने वाले किसानों के खातों से हर बार फसल बीमा की राशि काट ली जाती है। यह बीमा सोसायटी स्तर पर होता है। फसल बीमा दो तरीकों से होता है। इसमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में कपास, सोयाबीन, मूंग, उड़द, ज्वार व अन्य फसलों काे अधिसूचित क्षेत्र में शामिल किया गया है। मौसम आधारित फसलें जैसे मिर्च, टमाटर केला, गन्ना सहित अन्य फसलों का बीमा किया जाता है। कपास के लिए फसल ऋण का 5 प्रतिशत व अन्य फसल पर 2 प्रतिशत प्रीमियम लेते हैं।
इसलिए किया था विरोध
किसानों व संगठनों के आरोप है किसानों को बीमा का लाभ नहीं होता है। सरकार के माध्यम से बीमा कंपनियां किसानों की जेब से पैसा हलका कर रहे हैं। इसे लेकर कई सोसायटियों में प्रस्ताव लेकर सहकारी बैंक को पारित कर भेजे गए। प्रस्ताव में संचालक मंडलों ने कहा कि किसानों की इच्छा हाेने पर ही बीमा प्रीमियम की राशि काटी जाए। किसान प्रतिनिधियों का कहना है बिना किसानों की राय जानें सीधे जबरिया रकम काट लेना उचित नहीं है। इसके लिए किसान की इच्छा होना जरूरी है।
- किसान बीमा को जबरन बोझ मान रहे थे। इसलिए विरोध किया था। अब रिस्क देखकर ही बीमा कराएंगे। हालांकि प्राकृतिक आपदा में राहत के लिए बीमा कराने के लिए किसानों को जरूर प्रेरित किया जाएगा। श्यामसिंह पंवार, जिलाध्यक्ष भाकिसं
- अभी लिखित में आदेश का इंतजार है। नई मुख्यमंत्री फसल बीमा पॉलिसी का ड्राफ्ट तैयार हुआ है। अभी उसके क्रियान्वयन संबंधी आदेश भी नहीं है। 2019 में अतिवृष्टि से जिले में 50 फीसदी से ज्यादा किसानों का नुकसान हुआ है। अच्छी राशि मिलेगी।एमएल चौहान, उपसंचालक कृषि
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