गांव के कुम्हारों ने गर्मी के सीजन के लिए राझन व मटके बनाकर तैयार कर लिए हैं लेकिन लॉकडाउन के कारण अब इन्हें ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। इससे गांव के 100 से ज्यादा कुम्हार परिवारों को नुकसान हो रहा है। कुम्हारों ने बताया गांव में एक से डेढ़ लाख राझन व मटकों का स्टाक रखा हुआ है लेकिन खरीददार नहीं मिलने से लागत फंस कर रह गई है। इससे घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है। रवि प्रजापत ने बताया महाराष्ट्र व गुजरात तक मटके सप्लाय करते थे लेकिन इस बार लॉकडाउन से घर पर ही स्टाक रखा है। कर्ज लेकर मटके व राशन बनाए थे। रविंद्र प्रजापत ने बताया गणगौर के बाद मटके बेचने का सोचा था। ताकि मटकों के भाव ज्यादा मिल सकें लेकिन अब ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Rajan and Matki ready, not buyer


गांव के कुम्हारों ने गर्मी के सीजन के लिए राझन व मटके बनाकर तैयार कर लिए हैं लेकिन लॉकडाउन के कारण अब इन्हें ग्राहक नहीं मिल रहे हैं। इससे गांव के 100 से ज्यादा कुम्हार परिवारों को नुकसान हो रहा है। कुम्हारों ने बताया गांव में एक से डेढ़ लाख राझन व मटकों का स्टाक रखा हुआ है लेकिन खरीददार नहीं मिलने से लागत फंस कर रह गई है। इससे घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है। रवि प्रजापत ने बताया महाराष्ट्र व गुजरात तक मटके सप्लाय करते थे लेकिन इस बार लॉकडाउन से घर पर ही स्टाक रखा है। कर्ज लेकर मटके व राशन बनाए थे। रविंद्र प्रजापत ने बताया गणगौर के बाद मटके बेचने का सोचा था। ताकि मटकों के भाव ज्यादा मिल सकें लेकिन अब ग्राहक नहीं मिल रहे हैं।



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