दो महीने से लॉकडाउन के कारण सभी काम ठप पड़ गये हैं, काम बंद होने से आर्थिक गतिविधियों पर भी लगभग विराम लग गया था। यह जरूर है कि रजिस्ट्री दफ्तर खुलने से प्राॅपर्टी की खरीदी और बिक्री के काम जो अटके थे उनमें तेजी आ गई है। लोगों ने प्लाॅट के साथ ही कृषि भूमि की भी खरीदी शुरू कर दी है। पिछले 10 दिनों में ही 4 सौ से ज्यादा रजिस्ट्रियाँ हुई हैं और इससे शासन के खजाने में 7 करोड़ से ज्यादा की आय हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में रजिस्ट्रियों का आँकड़ा और बढ़ेगा। हालाँकि कोरोना वायरस को देखते हुए पूरी सावधानी बरती जा रही है और एक या दो लोगों को ही ऑफिस में जाने की परमीशन मिलती है। जिले में 21 मार्च से लॉकडाउन हो गया था, जिसके कारण दफ्तरों को भी बंद कर दिया गया था। इस दौरान जो रजिस्ट्रियाँ होनी थीं, नहीं हो पाईं। वहीं आर्थिक गतिविधियों को पटरी पर लाने सरकार ने कुछ रियायतें दीं और पंजीयन कार्यालय खोले जिसके बाद पंजीयन कार्यालय जबलपुर-2 में सबसे ज्यादा 296 रजिस्ट्रियाँ हुईं, इसके बाद जबलपुर-1 में पंजीयन की संख्या ज्यादा रही, लेकिन आय के मामले में जबलपुर-1 आगे रहा। इसी तरह सिहाेरा और पाटन में भी रजिस्ट्रियाँ हुई हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 4 hundred registries 7 crores came to the treasury in 10 days


दो महीने से लॉकडाउन के कारण सभी काम ठप पड़ गये हैं, काम बंद होने से आर्थिक गतिविधियों पर भी लगभग विराम लग गया था। यह जरूर है कि रजिस्ट्री दफ्तर खुलने से प्राॅपर्टी की खरीदी और बिक्री के काम जो अटके थे उनमें तेजी आ गई है। लोगों ने प्लाॅट के साथ ही कृषि भूमि की भी खरीदी शुरू कर दी है। पिछले 10 दिनों में ही 4 सौ से ज्यादा रजिस्ट्रियाँ हुई हैं और इससे शासन के खजाने में 7 करोड़ से ज्यादा की आय हो गई है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में रजिस्ट्रियों का आँकड़ा और बढ़ेगा। हालाँकि कोरोना वायरस को देखते हुए पूरी सावधानी बरती जा रही है और एक या दो लोगों को ही ऑफिस में जाने की परमीशन मिलती है।
जिले में 21 मार्च से लॉकडाउन हो गया था, जिसके कारण दफ्तरों को भी बंद कर दिया गया था। इस दौरान जो रजिस्ट्रियाँ होनी थीं, नहीं हो पाईं। वहीं आर्थिक गतिविधियों को पटरी पर लाने सरकार ने कुछ रियायतें दीं और पंजीयन कार्यालय खोले जिसके बाद पंजीयन कार्यालय जबलपुर-2 में सबसे ज्यादा 296 रजिस्ट्रियाँ हुईं, इसके बाद जबलपुर-1 में पंजीयन की संख्या ज्यादा रही, लेकिन आय के मामले में जबलपुर-1 आगे रहा। इसी तरह सिहाेरा और पाटन में भी रजिस्ट्रियाँ हुई हैं।



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