इंदौर-इच्छापुर हाइवे पर बसा निमाड़ का प्रवेश द्वार कहलाने वाले बलवाड़ा गांव के लोगों में इस हाइवे से दिन रात गुजरने वाले वाहन चालकों से डर बना हुआ है। अन्य राज्यों से आए वाहन चालकों द्वारा रोड पर थूकने, पानी से कुल्ले करने व हाइवे किनारे शौच करने के कारण ग्रामीणों में डर है। कौन सा वाहन चालक संक्रमित हो यह महामारी गांव में फैले पता नहीं चल पाता। जिससे लोगों को संक्रमण न हो जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा है कि बलवाड़ा के शासकीय अस्पताल में रात को कोई भी डॉक्टर नहीं रहता। महामारी के दौर में एक डॉक्टर की आवश्यकता है। सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक डॉ. अनिल कुमावत ड्यूटी करते हैं लेकिन रात में डॉक्टर उपलब्ध नहीं। कई गर्भवती महिलाओं को बीपी हाई होने के कारण बड़वाह रैफर करना पड़ता है। पिछले दिनों पडाली की एक महिला को डिलेवरी के लिए रात 1 बजे अस्पताल में भर्ती किया गया था। हाई रिस्क होने के कारण महिला को बड़वाह भेजा। बड़वाह से सनावद। सनावद से खरगोन व खरगोन से इंदौर भेजा। जहां महिला की डिलेवरी करवानी पड़ी। रात में डॉक्टर उपलब्ध होता तो उस महिला को 24 घंटे असहनीय दर्द नहीं सहना पड़ता। दुर्घटना होने पर लगता है तीन घंटे से अधिक समय इंदौर-इच्छापुर हाइवे ग्वालू से उमरिया चौकी तक एक्सीडेंटल झाेन है। कई दुर्घटनाएं हो चुकी है लेकिन लॉकडाउन में पिछले 1 माह से कोई दुर्घटना नहीं हुई। कोई दुर्घटना या लड़ाई झगड़े में गंभीर घायल होता है तो उसे रात में यहां उपचार नहीं मिल पाता। गंभीर घायल को पहले बड़वाह भेजा जाता है। वहां से उसे इंदौर रैफर कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में करीब 3 घंटे लग जाते हैं। जिससे गंभीर मरीज की हालत नाजुक हो जाती है। समय पर इलाज मिल जाए तो उसे बचाया जा सकता है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Patients do not get treatment due to not having a doctor at night;


इंदौर-इच्छापुर हाइवे पर बसा निमाड़ का प्रवेश द्वार कहलाने वाले बलवाड़ा गांव के लोगों में इस हाइवे से दिन रात गुजरने वाले वाहन चालकों से डर बना हुआ है। अन्य राज्यों से आए वाहन चालकों द्वारा रोड पर थूकने, पानी से कुल्ले करने व हाइवे किनारे शौच करने के कारण ग्रामीणों में डर है। कौन सा वाहन चालक संक्रमित हो यह महामारी गांव में फैले पता नहीं चल पाता। जिससे लोगों को संक्रमण न हो जाए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा है कि बलवाड़ा के शासकीय अस्पताल में रात को कोई भी डॉक्टर नहीं रहता। महामारी के दौर में एक डॉक्टर की आवश्यकता है। सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक डॉ. अनिल कुमावत ड्यूटी करते हैं लेकिन रात में डॉक्टर उपलब्ध नहीं। कई गर्भवती महिलाओं को बीपी हाई होने के कारण बड़वाह रैफर करना पड़ता है। पिछले दिनों पडाली की एक महिला को डिलेवरी के लिए रात 1 बजे अस्पताल में भर्ती किया गया था। हाई रिस्क होने के कारण महिला को बड़वाह भेजा। बड़वाह से सनावद। सनावद से खरगोन व खरगोन से इंदौर भेजा। जहां महिला की डिलेवरी करवानी पड़ी। रात में डॉक्टर उपलब्ध होता तो उस महिला को 24 घंटे असहनीय दर्द नहीं सहना पड़ता।

दुर्घटना होने पर लगता है तीन घंटे से अधिक समय
इंदौर-इच्छापुर हाइवे ग्वालू से उमरिया चौकी तक एक्सीडेंटल झाेन है। कई दुर्घटनाएं हो चुकी है लेकिन लॉकडाउन में पिछले 1 माह से कोई दुर्घटना नहीं हुई। कोई दुर्घटना या लड़ाई झगड़े में गंभीर घायल होता है तो उसे रात में यहां उपचार नहीं मिल पाता। गंभीर घायल को पहले बड़वाह भेजा जाता है। वहां से उसे इंदौर रैफर कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में करीब 3 घंटे लग जाते हैं। जिससे गंभीर मरीज की हालत नाजुक हो जाती है। समय पर इलाज मिल जाए तो उसे बचाया जा सकता है।



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