जिले में एमपी बोर्ड के सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 10वीं क्लास के 20 हजार 53 स्टूडेंट्स को अब हिंदी का पेपर नहीं देना पड़ेगा। इससे परीक्षा का तनाव तो कम हुआ ही है सरकार ने बच्चों को कोरोना संक्रमण से भी बचा लिया है। साथ ही एकमात्र होशंगाबाद जिले में परीक्षा ना लेने के निर्णय से शिक्षा विभाग ने 15 से 20 लाख रुपए बचा लिए हैं।
विभाग ने ऐसे की बचत
जिले में दसवीं में 20 हजार 53 छात्र हैं। परीक्षा की व्यवस्थाओं के लिए मप्र बोर्ड 75 रुपए प्रति छात्र प्रति पर्चे की दर से राशि उपलब्ध कराता है। इससे एक दिन में ही परीक्षा की व्यवस्था में 15 लाख 3 हजार 9 सौ 75 रुपये खर्च होते। वहीं 20 हजार 53 स्टूडेंट्स की कॉपी 14 रुपए की दर से जांची जाती जिस पर करीब 2 लाख 80 हजार रुपए खर्च होते।
सीबीएसई ने भी की परीक्षा की कैंसिल
सीबीएसई ने भी कक्षा दसवीं की परीक्षा रद्द कर आंतरिक और वार्षिक मूल्यांकन के अनुसार रिजल्ट बनाने की घोषणा कर दी है। इससे स्टूडेंट परीक्षा के तनाव से मुक्त होकर अगली कक्षा की पढ़ाई में जुट गए हैं।
12वीं की 8 से 20 जून तक होगी परीक्षा
कक्षा बारहवीं निर्णायक कक्षा होने के कारण इसकी परीक्षा अनिवार्य मानी जा रहीं हैं। दसवीं का पर्चा कैंसिल हिने से अब परीक्षा में बैठने वाले छात्रों की संख्या काम होगी, जिससे सोशल डिस्टेंस का पालन आसान हो सकेगा।
एक्सपर्ट व्यू : गेप अधिक होना जरूरी
सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. एलएल दुबे ने बताया कि हर फेकल्टी की परीक्षा के विषय के अनुसार परीक्षा हो जिससे स्टूडेंट्स को गेप मिल सके। लगातार पर्चे तनाव बढ़ा सकते हैं। केंद्र कम दूरी पर और ज्यादा बनें ताकि स्टूडेंट को लंबी दूरी तय न करना पड़े।
जेएस चौधरी, परीक्षा प्रभारी ने कहा-12वी के शेष विषयों की परीक्षा होगी
दसवीं के हिंदी और अंग्रेजी मीडियम के हिंदी विषय की परीक्षा केंसिल हो गई है। अब केवल 12वी के शेष विषयों की परीक्षा होगी। जिसकी तैयारी टाइम टेबल आते ही शुरू की जाएगी।
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