इन दिनों जनपद जबेरा की ग्राम पंचायतों में प्रवासी मजदूरों के लिए रोजगार गारंटी योजना के बावजूद महीनों चलने वाले लाखों की लागत के कार्यों को रातों रात पोकलेन मशीनों से आठ दस घंटों में निपटाया जा रहा है। कामगारों के हक पर डांका डालने से सरपंच व सचिव बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही एक मामला आदिवासी बाहुल्य डेलनखेड़ा ग्राम पंचायत के ग्राम गीदरा का सामने आया है। जहां पुराने परकुलेशन टैंक का गहरीकरण पोकलेन मशीनों से किया जा रहा है।
बनवार ग्राम पंचायत में परकुलेशन टैंक निर्माण रातों रात पोकलेन मशीन से करवाने का आरोप जनपद सदस्य भगवती मानव कल्याण संगठन के कार्यकर्ताओं के द्वारा सरपंच सचिव पर लगाया जा रहा है। जनपद सदस्य व संगठन के कार्यकर्ताओं ने बताया लॉकडाउन के चलते पलायन करने वाले प्रवासी मजदूरों की घर वापसी हो गई है जिनके सामने सबसे बड़ी समस्या रोजगार की खड़ी है। मजदूरों को रोजगार देने वाली रोजगार गारंटी योजना के तहत मजदूरों के कार्य मशीनों से करवाने की वजह से दिहाड़ी मजदूरों को काम नहीं मिल रहा है।
ग्राम पंचायत डेलन खेड़ा के गीदरा में रात के अंधेरे में पोकलेन जेसीबी मशीन से तालाब की खुदाई का काम 2 दिनों तक चला और जनपद के उपयंत्री बेखबर रहे। चौंकाने वाली बात है कि एक ग्रामीण की शिकायत के बाद जागे जनपद पंचायत के अधिकारियों के द्वारा नरेगा के कार्य मशीनों नहीं करवाने की सख्त हिदायत दी गई तो अब यह कार्य रातों रात होने लगे, ताकि ग्रामीणों को पता नहीं चले और रातों रात मशीनों से काम करवाकर मजदूरों के नाम मस्टररोल डाले जा रहे हैं।
मौके पर जाकर जांच करवाता हूं
सब इंजीनियर आरके वर्मा जबेरा का कहना है मैं दो दिन से जनपद क्षेत्र से बाहर था। नरेगा का कार्य मशीनों से होने की जानकारी से अवगत करवाया गया है, मैं कल ही मौके पर पहुंचकर जांच करवाता हूं।
टीम बनाकर जांच करवाता हूं
जनपद सीईओ अवधेश सिंह का कहना है कि जनपद की ग्राम पंचायतों में नरेगा का कार्य मशीनों से होने की शिकायतें मिल रही हैं। मैं टीम बनाकर जांच करवाता हूं, जहां भी नरेगा का कार्य मशीनों से किया जा रहा हाेगा सचिव-रोजगार सहायकों पर कार्रवाई करवाते हैं और सब इंजीनियरों को सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं कि नरेगा के कार्य मजदूरों से करवाए जाएं।
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