तीन दिन पहले फांसी लगाकर जान देने वाले सुरक्षा गार्ड का गौतमपुरा पुलिस ने गुरुवार को अंतिम संस्कार कराया। यही नहीं मृतक के 16 वर्षीय बेटे को पन्ना से लाने और मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के लिए नई धोती, कपड़े, पंडित और बाल उतरवाने के लिए नाई तक की व्यवस्था की। 22 अप्रैल की सुबह सांवेर से चंद्रावती गंज के बीच बन रही सड़क और पुल बनाने वाली कंपनी के 40 वर्षीय सुरक्षा गार्ड आलोक सिंह ने डिप्रेशन में पेड़ पर फांसी लगा ली थी। देपालपुर एसडीओपी संजय चतुर्वेदी, गौतमपुरा थाना प्रभारी डीएसपी कमल चौहान व एसआई अरविंद बेले मौके पर पहुंचे। पता चला कि आलोक अकेला रहता था। पत्नी की मौत हो चुकी है। 16 साल का बेटा गजेंद्र उर्फ कल्लू पन्ना में चाचा खिलावन सिंह के पास रहता है। एसआई ने जब मृतक के परिवार को सूचना दी तो पता चला वह आर्थिक रूप से कमजोर हैं। बेटे ने पिता के अंतिम दर्शन के लिए निवेदन किया तो एसडीओपी ने एसडीएम प्रतुल सिन्हा को जानकारी दी। उन्होंने पन्ना एसडीएम (आईएएस) शंकर मीणा से संपर्क किया। मीणा ने वहां से चाचा-भतीजे के लिए पास जारी कराया। इसके बाद एसडीओपी के कहने पर पन्ना के अमानगंज टीआई ने उनके आने के लिए नि:शुल्क गाड़ी की व्यवस्था कराई। पुलिस ने मृतक गार्ड की कंपनी से बात कर उसका वेतन व जमा राशि करीब 40 हजार रुपए बेटे को दिलवाए और उन्हें वापस घर पहुंचाया। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today On the death of the security guard, the police summoned the son to Panna, conducted the funeral at his expense.


तीन दिन पहले फांसी लगाकर जान देने वाले सुरक्षा गार्ड का गौतमपुरा पुलिस ने गुरुवार को अंतिम संस्कार कराया। यही नहीं मृतक के 16 वर्षीय बेटे को पन्ना से लाने और मुक्तिधाम में अंतिम संस्कार के लिए नई धोती, कपड़े, पंडित और बाल उतरवाने के लिए नाई तक की व्यवस्था की। 22 अप्रैल की सुबह सांवेर से चंद्रावती गंज के बीच बन रही सड़क और पुल बनाने वाली कंपनी के 40 वर्षीय सुरक्षा गार्ड आलोक सिंह ने डिप्रेशन में पेड़ पर फांसी लगा ली थी। देपालपुर एसडीओपी संजय चतुर्वेदी, गौतमपुरा थाना प्रभारी डीएसपी कमल चौहान व एसआई अरविंद बेले मौके पर पहुंचे। पता चला कि आलोक अकेला रहता था। पत्नी की मौत हो चुकी है। 16 साल का बेटा गजेंद्र उर्फ कल्लू पन्ना में चाचा खिलावन सिंह के पास रहता है। एसआई ने जब मृतक के परिवार को सूचना दी तो पता चला वह आर्थिक रूप से कमजोर हैं। बेटे ने पिता के अंतिम दर्शन के लिए निवेदन किया तो एसडीओपी ने एसडीएम प्रतुल सिन्हा को जानकारी दी। उन्होंने पन्ना एसडीएम (आईएएस) शंकर मीणा से संपर्क किया। मीणा ने वहां से चाचा-भतीजे के लिए पास जारी कराया। इसके बाद एसडीओपी के कहने पर पन्ना के अमानगंज टीआई ने उनके आने के लिए नि:शुल्क गाड़ी की व्यवस्था कराई। पुलिस ने मृतक गार्ड की कंपनी से बात कर उसका वेतन व जमा राशि करीब 40 हजार रुपए बेटे को दिलवाए और उन्हें वापस घर पहुंचाया।



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On the death of the security guard, the police summoned the son to Panna, conducted the funeral at his expense.


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