देवास काेराेना सैंपल की जांच के मामले में आत्मनिर्भर हाेगा। अमलतास हाॅस्पिटल काे बुधवार या गुरुवार काे काेराेना सैंपल की जांच के लिए मान्यता मिल सकती है। दरअसल, इसके लिए मंगलवार काे ऑनलाइन इंस्पेक्शन की प्रक्रिया की गई है। संतुष्ट हाेने पर सर्टिफिकेट जारी कर दिया जाएगा।
मान्यता मिल जाती है ताे मात्र 4 घंटे में सैंपल की रिपाेर्ट मिल जाएगी। अभी इंदाैर और भाेपाल से 48 घंटे में जांच रिपाेर्ट मिल रही है। इसकी वजह से सैंपल लेने के बाद हाेम क्वारेंटाइन में रहने की सलाह के बाद भी मरीज घूमता रहता है और संक्रमण फैलाता है। 4 घंटे में रिपाेर्ट अाने से यह रुकेगा। हाॅस्पिटल से डिस्चार्ज करने के लिए भी मरीज का रिपीट सैंपल भेजने के बाद दाे दिन इंतजार करना पड़ता है। दाे दिन अतिरिक्त मरीज काे अस्पताल में भर्ती रखना पड़ता है, जिससे शासन पर प्रति व्यक्ति 4 हजार रुपए तक ज्यादा लग जाते हैं। वह भी बचेगा। अाने वाले दिनाें में मरीजाें की संख्या बढ़ने की संभावना जताई गई है, एेसा हाेता है ताे रिपाेर्ट जल्दी मिलने से समय पर इलाज करने अाैर संक्रमण काे राेकने में सुविधा हाेगी।
जाे मशीनें चाहिए, वे पहले से हैं उपलब्ध
दरअसल काेराेना सैंपल की जांच के लिए जाे मशीनें चाहिए, वे पहले से ही अमलतास हाॅस्पिटल में उपलब्ध हैं। बाॅयाे सेफ्टी कैबिनेट चाहिए हाेता है, जाे वायरस काे सैंपल से फैलने से राेकता है। सैंपल में माैजूद वायरस काे जिंदा रखने के लिए माइनस 80 डिग्री क्षमता वाला फ्रिज चाहिए हाेता है, जिसमें सैंपल काे रखे जाते हैं। किट रखने के लिए माइनस 20 डिग्री क्षमता वाला फ्रिज चाहिए हाेता है। लेमिनार फ्लाे मशीन चाहिए हाेती है, जिससे ताजी हवा का सर्कुलेशन हाेता है। ये भी पहले से हैं। सबसे महत्वपूर्ण पीसीआर मशीन चाहिए हाेती हैं, जिसमें सैंपल लगता है अाैर रिपाेर्ट मिलती है। ये दाे मशीनें हैं, जिनकी 1000 रिपाेर्ट प्रतिदिन की क्षमता है। इन्हीं मशीनाें का इस्तेमाल टीबी, एचअाईवी, हेपेटाइटिस की जांच के लिए किया जाता है।
15-20 दिन से चल रही प्रक्रिया, स्टाफ की भाेपाल-इंदाैर में हाे चुकी है ट्रेनिंग
देवास में ही सैंपल जांच शुरू करने के लिए 15-20 दिन से कवायद चल रही है। स्टाफ की भाेपाल और इंदाैर में ट्रेनिंग भी हाे चुकी है। ट्रेनिंग लेने के बाद स्टाफ कितनी सावधानी से सैंपल की जांच कर रहा है। यह देखने के लिए मंगलवार काे नेशनल एक्रेडिशन बाेर्ड ऑफ लैबाेरेटरी (एनएबीएल) ने अाॅनलाइन इंस्पेक्शन किया। इंस्पेक्शन के पहले टीम ने ट्रायल किया और तैयारियाें का ऑडिट हुआ।
यह हाेंगे फायदे
- सैंपल लेने के 4 घंटे में मिल जाएगी रिपाेर्ट, अभी इंदाैर-भाेपाल से 48 घंटे में मिल रही।
- सैंपल देने के बाद मरीज काे क्वारेंटाइन में रहने के लिए कहते हैं, वह लाेगाें के बीच घूमता रहता है, यह खतरा कम हाेगा।
- मरीज के ठीक हाे जाने के बाद रिपीट सैंपल की जांच के इंतजार में दाे दिन तक अस्पताल में रखना पड़ता है। अब ऐसा नहीं होगा।
- अभी बीमाराें की सैंपलिंग हाे रही है। सैंपलिंग बढ़ाई जा सकेगी, यदि किसी पूरे इलाके के लाेगाें की सैंपलिंग करना है ताे वह भी संभव हाेगा।कलेक्टर की रुचि
डाॅ. जगत रावत, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, अमलतास हाॅस्पिटल देवास के मुताबिक, मशीनें, स्टाफ और सेटअप ताे अस्पताल में पहले से था। काेराेना सैंपल की जांच काे अनुमति दिलाने के लिए कलेक्टर डाॅ. श्रीकांत पांडेय ने विशेष रुचि ली। खुद ही अागे रह कर हमसे अपडेट लेते हैं। जहां उनके सहयाेग की जरूरत हाेती है, तत्काल करते हैं। इंस्पेक्शन में बाेर्ड संतुष्ट हाे गया ताे बुधवार काे ही सर्टिफिकेट मिलने की उम्मीद है।
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