38 लाख की लागत से पुलिया निर्माण शुरू होने से अब बालकृष्ण सागर बैराज के गेट बंद होने से जलमग्न सड़क पार करने बच्चे व ग्रामीणों को पुलिया बनने से नाव की सवारी का जोखिम नहीं उठाना पड़ेगा। शहर से 12 किलोमीटर दूर बने सिंचाई की दृष्टि से सबसे बड़े बालकृष्ण सागर बैराज के गेट बंद होने से पहले ही बीते साल बावनहेड़ा, उचावद, मगरानिया व डूंगलाय की ओर जाने वाले सड़क मार्ग के जलमग्न होने से हजारों ग्रामीण व स्कूली बच्चे जोखिम भरी जुगाड़ की नाव में मजबूरी का खतरनाक सफर कर रहे थे।
ग्राम भ्याना के नजदीक नेवज नदी पर 5.95 करोड़ की लागत से बालकृष्ण सागर बैराज का निर्माण पूर्ण होने के बाद जलभराव से सड़क मार्ग की पूर्व निर्मित पुलिया डूबने से ये हालत बनी थी। 1057 वर्ग किलोमीटर कैचमेंट एरिया वाले सिंचाई की दृष्टि से इलाके के सबसे बड़े इस बैराज की वजह से जल भंडारण पूर्ण होने से नेवज नदी में आसपास से आकर मिलने वाले छोटे नदी-नाले का पानी नदी में जाने की जगह वापस रिटर्न होने से इस बांध से करीब सवा किलोमीटर दूर बावनहेड़ा-उचावद की ओर जाने वाले सड़क मार्ग की पुलिया जलमग्न होती थी। आसपास की करीब 400 बीघा से अधिक जमीन डूब क्षेत्र में होकर केवल एक फसलीय रह गई थी।
सिंचाई विभाग के एसडीओ लखपत सिंह जादौन ने बताया 103 मीटर फुल टैंक लेवल वाले बालकृष्ण बैराज की वजह से जिस जगह पुलिया जलमग्न होने की समस्या थी वहां करीब 38 लाख की लागत से पुलिया का निर्माण शुरू कर दिया गया है। नई पुलिया बनने के बाद बांध के गेट बंद होने पर भी नई पुलिया से करीब 1 फीट नीचे पानी रहेगा।
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