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माल्हनवाड़ा स्थित दूधी नदी का दूसरे दिन भी सीमांकन नहीं हो सका है। सीमा का निर्धारण नहीं होने से ठेकेदार अपनी मनमर्जी से रेत का उत्खनन कर रहा है। नदी में पोकलेन चलाकर रेत निकली जा रही है, जबकि रविवार को राजस्व दल मौका मुआयना करने नदी पहुंचा था। सीमा निर्धारण नहीं होने तक पोकलेन से रेत उत्खनन करने काे मना किया था। दल वापस जाने की कुछ देर बाद ही ठेकेदार के कर्मचारियों ने उत्खनन चालू कर दिया। प्रशासन की लापरवाही के कारण नदी को नुकसान हो रहा है। साथ ही रेत निकलने से राजस्व को घाटा लग रहा है। ज्ञात हो कि दूधी नदी नरसिंहपुर एवं होशंगाबाद जिला की सीमा का निर्धारण करती है। इसी का फायदा उठाकर रेत माफिया जमकर रेत उत्खनन कर रहे है। तहसीलदार प्रमेश जैन ने बताया हम जल्द ही अपनी सीमा का सीमांकन करा लेंगे। जिससे हमारे क्षेत्र में बिना अनुमति के उत्खनन न हो सके। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today




माल्हनवाड़ा स्थित दूधी नदी का दूसरे दिन भी सीमांकन नहीं हो सका है। सीमा का निर्धारण नहीं होने से ठेकेदार अपनी मनमर्जी से रेत का उत्खनन कर रहा है। नदी में पोकलेन चलाकर रेत निकली जा रही है, जबकि रविवार को राजस्व दल मौका मुआयना करने नदी पहुंचा था। सीमा निर्धारण नहीं होने तक पोकलेन से रेत उत्खनन करने काे मना किया था।

दल वापस जाने की कुछ देर बाद ही ठेकेदार के कर्मचारियों ने उत्खनन चालू कर दिया। प्रशासन की लापरवाही के कारण नदी को नुकसान हो रहा है। साथ ही रेत निकलने से राजस्व को घाटा लग रहा है। ज्ञात हो कि दूधी नदी नरसिंहपुर एवं होशंगाबाद जिला की सीमा का निर्धारण करती है। इसी का फायदा उठाकर रेत माफिया जमकर रेत उत्खनन कर रहे है। तहसीलदार प्रमेश जैन ने बताया हम जल्द ही अपनी सीमा का सीमांकन करा लेंगे। जिससे हमारे क्षेत्र में बिना अनुमति के उत्खनन न हो सके।

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माल्हनवाड़ा स्थित दूधी नदी का दूसरे दिन भी सीमांकन नहीं हो सका है। सीमा का निर्धारण नहीं होने से ठेकेदार अपनी मनमर्जी से रेत का उत्खनन कर रहा है। नदी में पोकले…
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मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में जिन जोड़ों ने विवाह रचाया था उनमें से आधे से अधिक जोड़ों को अभी तक योजना के तहत मिलने वाला आर्थिक सहयोग नहीं मिला है। लगभग एक साल बाद जनपद पिपरिया क्षेत्र में कराए गए 40 विवाह में से 14 जोड़ों को इस योजना के तहत मिलने वाली राशि मिली है। जनपद सूत्रों ने बताया कि 25 मई वर्ष 2019 में 34 जोड़ों का विवाह कृषि उपज मंडी परिसर में हुआ था। इसके बाद 10 जुलाई वर्ष 2019 में 6 और जोड़ों का विवाह मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत कराया गया था। इस योजना में विवाहित जोड़ों को शासन की ओर से उपहार में 48 हजार रुपए की राशि दी जाना थी। सामाजिक न्याय विभाग के द्वारा हाल ही में 14 जोड़ों के लिए स्वीकृत राशि वधु के बैंक खाते में भेज दी गई है। अभी 26 जोड़ों को मिलने वाली राशि प्राप्त नहीं हुई है। जनपद ने पूछने पर बताया कि पर्याप्त आवंटन नहीं होने के कारण इन जोड़ों को यह राशि नहीं मिली है। मालूम हो कि विवाह के बाद से ही वर और वधु पक्ष के लोग जपं में आकर राशि की जानकारी लेते रहते हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today




मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना में जिन जोड़ों ने विवाह रचाया था उनमें से आधे से अधिक जोड़ों को अभी तक योजना के तहत मिलने वाला आर्थिक सहयोग नहीं मिला है। लगभग एक साल बाद जनपद पिपरिया क्षेत्र में कराए गए 40 विवाह में से 14 जोड़ों को इस योजना के तहत मिलने वाली राशि मिली है। जनपद सूत्रों ने बताया कि 25 मई वर्ष 2019 में 34 जोड़ों का विवाह कृषि उपज मंडी परिसर में हुआ था।

इसके बाद 10 जुलाई वर्ष 2019 में 6 और जोड़ों का विवाह मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत कराया गया था। इस योजना में विवाहित जोड़ों को शासन की ओर से उपहार में 48 हजार रुपए की राशि दी जाना थी। सामाजिक न्याय विभाग के द्वारा हाल ही में 14 जोड़ों के लिए स्वीकृत राशि वधु के बैंक खाते में भेज दी गई है। अभी 26 जोड़ों को मिलने वाली राशि प्राप्त नहीं हुई है। जनपद ने पूछने पर बताया कि पर्याप्त आवंटन नहीं होने के कारण इन जोड़ों को यह राशि नहीं मिली है। मालूम हो कि विवाह के बाद से ही वर और वधु पक्ष के लोग जपं में आकर राशि की जानकारी लेते रहते हैं।

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प्रदेश के सभी सरकारी व निजी स्कूल 31 जुलाई तक बंद रहेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने साेमवार काे इस बारे में आदेश जारी कर दिए। विभाग के उप-सचिव प्रमाेद सिंह द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि काेराेना संक्रमण से बचाव के मद्देनजर पहले 30 जून तक स्कूल बंद रखे जाने के निर्देश दिए गए थे। राज्य शासन ने निर्णय लिया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुएलाेक स्वास्थ्य एवं लाेक हित में प्रदेश के सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूल 31 जुलाई तक बंद रहेंगे। सोमवार को सरकार ने स्कूल बंद रखने के आदेश जारी कर दिए। कोरोना संकट को देखते हुएप्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों,कॉलेज और यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक कार्य पहले से हीबंद कर दिए गए हैं। उन्हें अगले आदेश तक बंद रखा गया है। इस बीच, सरकार परीक्षाएं रद्द करते हुएस्नातकोत्तर और स्नातक में जनरल प्रमोशन देने की घोषणा पहले ही कर चुकी है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today मध्य प्रदेश में प्राइवेट और सरकारी स्कूल 31 जुलाई तक बंद रहेंगे, इस संबंध में आदेश जारी हो गया है।




प्रदेश के सभी सरकारी व निजी स्कूल 31 जुलाई तक बंद रहेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने साेमवार काे इस बारे में आदेश जारी कर दिए। विभाग के उप-सचिव प्रमाेद सिंह द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि काेराेना संक्रमण से बचाव के मद्देनजर पहले 30 जून तक स्कूल बंद रखे जाने के निर्देश दिए गए थे।

राज्य शासन ने निर्णय लिया है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुएलाेक स्वास्थ्य एवं लाेक हित में प्रदेश के सभी सरकारी व प्राइवेट स्कूल 31 जुलाई तक बंद रहेंगे।

सोमवार को सरकार ने स्कूल बंद रखने के आदेश जारी कर दिए।

कोरोना संकट को देखते हुएप्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों,कॉलेज और यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक कार्य पहले से हीबंद कर दिए गए हैं। उन्हें अगले आदेश तक बंद रखा गया है। इस बीच, सरकार परीक्षाएं रद्द करते हुएस्नातकोत्तर और स्नातक में जनरल प्रमोशन देने की घोषणा पहले ही कर चुकी है।

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मध्य प्रदेश में प्राइवेट और सरकारी स्कूल 31 जुलाई तक बंद रहेंगे, इस संबंध में आदेश जारी हो गया है।
प्रदेश के सभी सरकारी व निजी स्कूल 31 जुलाई तक बंद रहेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने साेमवार काे इस बारे में आदेश जारी कर दिए। विभाग के उप-सचिव प्रमाेद सिंह द्वारा…
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कोरोना में मदद के लिए सिर्फ 1.60 लाख कर्मचारियों ने ही मुख्यमंत्री राहत कोष में 30 करोड़ रुपए जमा कराए। प्रदेश में शासकीय,अध्यापक और पंचायत संवर्ग के कर्मचारियों की संख्या 10 लाख के करीब हैं। इन कर्मचारियों का एक दिन का वेतन करीब 83 करोड़ होता है। यह जानकारी सरकार ने प्रदेश भर से इकट्ठा करवाई है जो सोमवार को ही सामने आई है। दरअसल, सरकार ने संगठित और असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे लोगों से कोरोना संक्रमितों की मदद के लिए हाथ बढ़ाने को कहा था। यह मदद स्वेच्छा से करनी थी। लॉकडाउन की वजह से प्रदेश की वित्तीय स्थिति खासी प्रभावित हुई है। सरकार की आय 60 फीसदी तक घट गई है। पिछले दो महीनों में तो कमाऊ विभागों में वाणिज्यिक कर, आबकारी और पंजीयन एवं मु्द्रांक जैसे विभागों से होने वाली आमदनी खासी प्रभावित हुई है। ऐसे में शासन को रोजमर्रा के खर्चे चलाने में भी दिक्कत हो रही है। केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के हर महीने मिलने वाले 3 हजार करोड़ रुपए और जीएसटी के मिलने वाली राशि से कर्मचारियों के वेतन संबंधी खर्चे पूरे हो पा रहे हैं। आदेश के मुताबिक कर्मचारियों को स्वेच्छा से एक दिन का वेतन देना था। वेतन में से कटौती स्वेच्छा के अनुसार होने से विभागाध्यक्षों ने तो बाकयदा इस सर्कुलर को संचालनालय और जिलों में भी जारी नहीं करवाया। इससे अधिकतर कर्मचारियों को इसकी जानकारी भी नहीं लग पाई। अखिल भारतीय सेवा के अफसरों ने जमा कराए 80 लाख अखिल भारतीय सेवा के अफसरों ने अपना एक दिन का वेतन कोरोना में मदद के लिए 80 लाख रुपए जमा कराए। इनमें आईएएस, आईपीएस और आईएफएस शामिल हैं। 10 लाख कर्मचारियों का एक दिन का वेतन 83 करोड़: राज्य सरकार को 10 लाख कर्मचारियों के वेतन पर प्रतिदिन 83 करोड़ रुपए खर्च करना होता है, इस लिहाज से इतनी ही राशि कोरोना संक्रमितों की मदद के लिए आना था। जिन कर्मचारियों ने स्वेच्छा से एक दिन का वेतन कटवाया उनमें राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, वित्त सेवा समेत करीब दो हजार संवर्गों के 1 लाख 60 हजार कर्मचारी शामिल हुए। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today




कोरोना में मदद के लिए सिर्फ 1.60 लाख कर्मचारियों ने ही मुख्यमंत्री राहत कोष में 30 करोड़ रुपए जमा कराए। प्रदेश में शासकीय,अध्यापक और पंचायत संवर्ग के कर्मचारियों की संख्या 10 लाख के करीब हैं। इन कर्मचारियों का एक दिन का वेतन करीब 83 करोड़ होता है। यह जानकारी सरकार ने प्रदेश भर से इकट्ठा करवाई है जो सोमवार को ही सामने आई है। दरअसल, सरकार ने संगठित और असंगठित क्षेत्र में काम कर रहे लोगों से कोरोना संक्रमितों की मदद के लिए हाथ बढ़ाने को कहा था। यह मदद स्वेच्छा से करनी थी।

लॉकडाउन की वजह से प्रदेश की वित्तीय स्थिति खासी प्रभावित हुई है। सरकार की आय 60 फीसदी तक घट गई है। पिछले दो महीनों में तो कमाऊ विभागों में वाणिज्यिक कर, आबकारी और पंजीयन एवं मु्द्रांक जैसे विभागों से होने वाली आमदनी खासी प्रभावित हुई है। ऐसे में शासन को रोजमर्रा के खर्चे चलाने में भी दिक्कत हो रही है। केंद्रीय करों में राज्य की हिस्सेदारी के हर महीने मिलने वाले 3 हजार करोड़ रुपए और जीएसटी के मिलने वाली राशि से कर्मचारियों के वेतन संबंधी खर्चे पूरे हो पा रहे हैं।

आदेश के मुताबिक कर्मचारियों को स्वेच्छा से एक दिन का वेतन देना था। वेतन में से कटौती स्वेच्छा के अनुसार होने से विभागाध्यक्षों ने तो बाकयदा इस सर्कुलर को संचालनालय और जिलों में भी जारी नहीं करवाया। इससे अधिकतर कर्मचारियों को इसकी जानकारी भी नहीं लग पाई।

अखिल भारतीय सेवा के अफसरों ने जमा कराए 80 लाख

अखिल भारतीय सेवा के अफसरों ने अपना एक दिन का वेतन कोरोना में मदद के लिए 80 लाख रुपए जमा कराए। इनमें आईएएस, आईपीएस और आईएफएस शामिल हैं।

10 लाख कर्मचारियों का एक दिन का वेतन 83 करोड़: राज्य सरकार को 10 लाख कर्मचारियों के वेतन पर प्रतिदिन 83 करोड़ रुपए खर्च करना होता है, इस लिहाज से इतनी ही राशि कोरोना संक्रमितों की मदद के लिए आना था। जिन कर्मचारियों ने स्वेच्छा से एक दिन का वेतन कटवाया उनमें राज्य प्रशासनिक सेवा, राज्य पुलिस सेवा, वित्त सेवा समेत करीब दो हजार संवर्गों के 1 लाख 60 हजार कर्मचारी शामिल हुए।

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कोरोना में मदद के लिए सिर्फ 1.60 लाख कर्मचारियों ने ही मुख्यमंत्री राहत कोष में 30 करोड़ रुपए जमा कराए। प्रदेश में शासकीय,अध्यापक और पंचायत संवर्ग के कर्मचारि…
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स्वच्छ भारत मिशन एवं अन्य सेवाओं के लिए वाहनों की खरीदी और रखरखाव के लिए नगर निगम के बजट में 243 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। अब तक नगर निगम के बजट में वाहनों की खरीदी के लिए विभागवार व्यवस्था होती थी। बजट में पार्कों के रखरखाव और विकास के लिए 39.74 करोड़ रुपए रखे गए हैं। इसमें से उद्यानों के लिए 15 करोड़ रुपए विशेष रूप से रखे गए हैं। संभागायुक्त और निगम प्रशासक कवींद्र कियावत का शहर में उद्यानों और पार्कों के विकास पर खासा जोर होने से यह व्यवस्था की गई है। पुस्तकालयों और वाचनालयों के संचालन के लिए 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है। शहर में सड़क, पुल, नाली आदि के निर्माण के लिए सिविल इंजीनियरिंग शाखा को 304.07 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। प्रोजेक्ट अमृत के तहत पेयजल, सीवेज और नालों का निर्माण आदि के लिए बजट में 423.58 करोड़ रुपए रखे गए हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Rs 15 crore special fund for gardens, Rs 2495.68 crore without profit and loss budget




स्वच्छ भारत मिशन एवं अन्य सेवाओं के लिए वाहनों की खरीदी और रखरखाव के लिए नगर निगम के बजट में 243 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। अब तक नगर निगम के बजट में वाहनों की खरीदी के लिए विभागवार व्यवस्था होती थी।

बजट में पार्कों के रखरखाव और विकास के लिए 39.74 करोड़ रुपए रखे गए हैं। इसमें से उद्यानों के लिए 15 करोड़ रुपए विशेष रूप से रखे गए हैं। संभागायुक्त और निगम प्रशासक कवींद्र कियावत का शहर में उद्यानों और पार्कों के विकास पर खासा जोर होने से यह व्यवस्था की गई है। पुस्तकालयों और वाचनालयों के संचालन के लिए 5 करोड़ का प्रावधान किया गया है। शहर में सड़क, पुल, नाली आदि के निर्माण के लिए सिविल इंजीनियरिंग शाखा को 304.07 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। प्रोजेक्ट अमृत के तहत पेयजल, सीवेज और नालों का निर्माण आदि के लिए बजट में 423.58 करोड़ रुपए रखे गए हैं।

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Rs 15 crore special fund for gardens, Rs 2495.68 crore without profit and loss budget
स्वच्छ भारत मिशन एवं अन्य सेवाओं के लिए वाहनों की खरीदी और रखरखाव के लिए नगर निगम के बजट में 243 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। अब तक नगर निगम के बजट में …
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हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए बनाए जा रहे वेटिंग एरिया यानी एयर कॉन्कोर्स में गर्डर का काम दस दिन में पूरा हो जाएगा। कुल 40 में से 36 गर्डर अब तक लॉन्च कर दिए गए हैं। वहीं, चीनी कंपनियों ने अधिकतर सामान की सप्लाई कर दी है। बंसल-हबीबगंज पाथ-वे प्राइवेट लिमिटेड के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर अबु आसिफ का दावा है कि जैसे-जैसे लेबर आती जा रही है, स्टेशन के विभिन्न हिस्सों में काम शुरू किए जा रहे हैं। डोम हो जाएगा कवर प्लेटफॉर्म-1 की तरफ स्टेशन की मेन बिल्डिंग में डोम का काम इन दिनों चल रहा है। जल्द ही वॉटर व वेदर प्रूफ शीट्स लगाने का काम इसमें पूरा कर लिया जाएगा। होगी फिनिशिंग इस काम के साथ ही प्लेटफॉर्म पर लगाए जा रहे शेड, टाइल्स व सब-वे की फिनिशिंग का काम भी शुरू कर दिया गया है। संभवत: यह काम बारिश के मौसम में पूरा कर लिया जाएगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 36 out of 40 girder launches, girder work will be completed in 10 days in waiting area




हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए बनाए जा रहे वेटिंग एरिया यानी एयर कॉन्कोर्स में गर्डर का काम दस दिन में पूरा हो जाएगा। कुल 40 में से 36 गर्डर अब तक लॉन्च कर दिए गए हैं। वहीं, चीनी कंपनियों ने अधिकतर सामान की सप्लाई कर दी है। बंसल-हबीबगंज पाथ-वे प्राइवेट लिमिटेड के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर अबु आसिफ का दावा है कि जैसे-जैसे लेबर आती जा रही है, स्टेशन के विभिन्न हिस्सों में काम शुरू किए जा रहे हैं।

डोम हो जाएगा कवर

प्लेटफॉर्म-1 की तरफ स्टेशन की मेन बिल्डिंग में डोम का काम इन दिनों चल रहा है। जल्द ही वॉटर व वेदर प्रूफ शीट्स लगाने का काम इसमें पूरा कर लिया जाएगा।

होगी फिनिशिंग

इस काम के साथ ही प्लेटफॉर्म पर लगाए जा रहे शेड, टाइल्स व सब-वे की फिनिशिंग का काम भी शुरू कर दिया गया है। संभवत: यह काम बारिश के मौसम में पूरा कर लिया जाएगा।

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36 out of 40 girder launches, girder work will be completed in 10 days in waiting area
हबीबगंज रेलवे स्टेशन पर यात्रियों के लिए बनाए जा रहे वेटिंग एरिया यानी एयर कॉन्कोर्स में गर्डर का काम दस दिन में पूरा हो जाएगा। कुल 40 में से 36 गर्डर अब तक ल…
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वार्ड कार्यालय में जन्म- मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की सुविधा के पहले दिन केवल वार्ड नंबर 52 में एक जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन आया। शेष वार्डों में कोई आवेदन नहीं आया। नगर निगम ने सोमवार से हर वार्ड में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र की सुविधा शुरू की है, लेकिन इसमें पाबंदी यह है कि जन्म या मृत्यु के 21 दिन के भीतर आवेदन करना जरूरी है। इसके बाद एनओसी लेना होती है। इसके बाद आवेदन मुख्यालय में ही जमा होगा। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today




वार्ड कार्यालय में जन्म- मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने की सुविधा के पहले दिन केवल वार्ड नंबर 52 में एक जन्म प्रमाण पत्र के लिए आवेदन आया।

शेष वार्डों में कोई आवेदन नहीं आया। नगर निगम ने सोमवार से हर वार्ड में जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र की सुविधा शुरू की है, लेकिन इसमें पाबंदी यह है कि जन्म या मृत्यु के 21 दिन के भीतर आवेदन करना जरूरी है। इसके बाद एनओसी लेना होती है। इसके बाद आवेदन मुख्यालय में ही जमा होगा।

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