शाहनगर में शासकीय अनुसूचित जाति प्री-मैट्रिक कन्या जूनियर छात्रावास में बने क्वारेंटाइन सेंटर में करीब 150 मजदूरों को रखा गया है। मंगलवार दोपहर यहां ठहरे मजदूरों में सेंटर में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन किया और भोजन का बहिष्कार कर दिया। भास्कर के संवाददाता को मजदूरों ने फोन लगाकर क्वारेंटाइन सेंटर में आकर भोजन को देखने का आग्रह किया। भास्कर टीम ने जाकर देखा तो चिलचिलाती धूप में भोजन के पैकेट पड़े हुए थे। मजदूरों ने बताया कि हमें घटिया भोजन मिलता है, यह खाने लायक नहीं है। यहां नाश्ता नहीं मिलता, चाय 10 बजे मिलती है। नाश्ता के नाम पर 2 रुपए वाला पारले जी का बिस्किट का पैकेट दिया जाता है। भोजन दोपहर 2 बजे मिलता है। वह भी अधपका, चावल भी कच्चे मिलते हैं। केंद्र के अंदर गंदगी है। सेंटर में ठहरे रैगुवां के अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि 3 दिन से उल्टी दस्त है, सुबह से डाॅक्टर से इलाज कराने को कह रहे हैं। कोई नहीं सुनता। सिजहरी टिकरिया के विनय सिंह ने बताया कि यहां एक पंखा है, वह भी नहीं चलता, हम लोग भूख प्यास से परेशान हैं। इस संबंध में जब केंद्र पहुंचे तहसीलदार संदीप सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि आपको किसने बुलाया है, आप यहां से जाइए। एसडीएम सिकल चंद्र परस्ते का कहना है कि सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचे। मजदूरों की समस्याओं को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today The workers boycotted the food found in the Quarantine Center, they said - in such a way we will die here


शाहनगर में शासकीय अनुसूचित जाति प्री-मैट्रिक कन्या जूनियर छात्रावास में बने क्वारेंटाइन सेंटर में करीब 150 मजदूरों को रखा गया है। मंगलवार दोपहर यहां ठहरे मजदूरों में सेंटर में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए प्रदर्शन किया और भोजन का बहिष्कार कर दिया।
भास्कर के संवाददाता को मजदूरों ने फोन लगाकर क्वारेंटाइन सेंटर में आकर भोजन को देखने का आग्रह किया। भास्कर टीम ने जाकर देखा तो चिलचिलाती धूप में भोजन के पैकेट पड़े हुए थे। मजदूरों ने बताया कि हमें घटिया भोजन मिलता है, यह खाने लायक नहीं है। यहां नाश्ता नहीं मिलता, चाय 10 बजे मिलती है। नाश्ता के नाम पर 2 रुपए वाला पारले जी का बिस्किट का पैकेट दिया जाता है। भोजन दोपहर 2 बजे मिलता है। वह भी अधपका, चावल भी कच्चे मिलते हैं। केंद्र के अंदर गंदगी है। सेंटर में ठहरे रैगुवां के अशोक कुमार तिवारी ने बताया कि 3 दिन से उल्टी दस्त है, सुबह से डाॅक्टर से इलाज कराने को कह रहे हैं। कोई नहीं सुनता। सिजहरी टिकरिया के विनय सिंह ने बताया कि यहां एक पंखा है, वह भी नहीं चलता, हम लोग भूख प्यास से परेशान हैं। इस संबंध में जब केंद्र पहुंचे तहसीलदार संदीप सिंह से बात की तो उन्होंने कहा कि आपको किसने बुलाया है, आप यहां से जाइए। एसडीएम सिकल चंद्र परस्ते का कहना है कि सूचना मिलते ही वह मौके पर पहुंचे। मजदूरों की समस्याओं को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए हैं।



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The workers boycotted the food found in the Quarantine Center, they said - in such a way we will die here


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