नागपंचमी का पर्व शनिवार को मनेगा। तड़के भस्मआरती के बाद भगवान महाकालेश्वर को शेषनाग धारण कराया जाएगा। नागपंचमी पर मंदिर के शीर्ष पर स्थित नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर में भी श्रद्धालु दर्शन करेंगे। इस मंदिर के पट शुक्रवार रात 12 बजे से खुल गए हैं। 24 घंटे बाद शनिवार रात 12 बजे पट बंद होंगे। श्रद्धालु ऑनलाइन परमिशन से दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश शंख द्वार की ओर से दिया जाएगा।दर्शनार्थी पूजन सामग्री, दूध नहीं ले जा सकेंगेे। दर्शन व्यवस्था : 250 रुपए की शीघ्र दर्शन सुविधा बंद मंदिर में मप्र के निवासी ऑनलाइन प्री‍-बुकिंग कराकर शंखद्वार से प्रवेश कर सकेंगे। प्रदेश के बाहर से आने वाले श्रद्धालु केवल शिखर दर्शन कर सकेंगे। 250 रुपए की शीघ्र दर्शन व्यवस्था बंद रहेगी। नागचंद्रेश्वर मंदिर में सीमित अधिकृत पुजारी आदि को ही अनुमति है। सरीसृप की 103 प्रजातियों पर आधारित पहली बार डेटाबेस बनाने का श्रेय उज्जैन को इतिहास- 1000 साल पुरानी प्रतिमाएं वि क्रम विवि के संग्रहालय में एक हजार साल पुरानी नाग प्रतिमाएं संग्रहित हैं, जो महाकाल वन क्षेत्र से मिली थी। प्रतिमाओं में नाग अर्द्ध मानव स्वरूप में है। पुराविद् डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार प्रतिमाओं का मिलना साबित करता है कि यहां कभी नागों की मानव स्वरूप में पूजा होती थी। एक प्रतिमा पर शेष नाग है और दूसरी में एक मुखी नाग प्रदर्शित है। मान्यता है कि उज्जैन में कभी बड़े नाग मंदिर भी थे। समाज- नागों की मौजूदगी अब भी ना गझिरी क्षेत्र में कोबरा का बाहुल्य है। इसी तरह नागतलाई क्षेत्र में भी नागों की संख्या अधिक है। संभवत: इसीलिए इन क्षेत्रों के नाम नाग से जुड़े हैं। उज्जैन मे 2300 साल पहले से नाग राजाओं के सिक्के मिलते हैं। मुद्रा विशेषज्ञ डॉ. आरसी ठाकुर के अनुसार 1700 व 1800 साल पुराने तांबे व चांदी के सिक्के प्राप्त हैं। पुरावेत्ताओं के अनुसार 6 टी शताब्दी में लोग सर्प वाले पैंडल पहनते थे। साहित्य- नागों पर शोध और पुस्तकें स माजसेवी स्व. डॉ अवंतिप्रसाद मरमट ने नागों पर शोध किया। उन्होंने 10 किताबें नागों के इतिहास पर लिखी हैं। इसके पहले स्व. डॉ विश्री वाकणकर ने भी नागों के इतिहास पर शोध किया। स्व. डॉ. श्याम सुंदर निगम ने भी नागों को लेकर अध्ययन किया। सर्प विशेषज्ञ मुकेश इंगले ने प्रदेश में नाग व सरिसृप प्रजाति को लेकर शोधपरक पुस्तक लिखी है, जिसमें उज्जैन पर फोकस किया है। अध्ययन- पहला सरिसृप संरक्षण केंद्र प्र देश का पहला सरीसृप संरक्षण एवं शोध केंद्र वसंत विहार में बनाया है। इसकी स्थापना नाग प्रजातियों के संरक्षण के लिए की गई थी। यहां सर्प प्रदर्शनी और उन पर अध्ययन की सुविधा भी उपलब्ध है। यह पहला केंद्र है जहां कई प्रजातियों के सर्प संग्रहित हैं। इंगले ने सरीसृप की 103 प्रजातियों पर आधारित डेटाबेस भी बनाया है। जो अध्ययन व शोध करने वाले विद्यार्थियों के लिए मददगार है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Sheshnag will wear Mahakal after Bhasma Aarti


नागपंचमी का पर्व शनिवार को मनेगा। तड़के भस्मआरती के बाद भगवान महाकालेश्वर को शेषनाग धारण कराया जाएगा। नागपंचमी पर मंदिर के शीर्ष पर स्थित नागचंद्रेश्वर महादेव मंदिर में भी श्रद्धालु दर्शन करेंगे। इस मंदिर के पट शुक्रवार रात 12 बजे से खुल गए हैं। 24 घंटे बाद शनिवार रात 12 बजे पट बंद होंगे। श्रद्धालु ऑनलाइन परमिशन से दर्शन कर सकेंगे। श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश शंख द्वार की ओर से दिया जाएगा।दर्शनार्थी पूजन सामग्री, दूध नहीं ले जा सकेंगेे।

दर्शन व्यवस्था : 250 रुपए की शीघ्र दर्शन सुविधा बंद

  • मंदिर में मप्र के निवासी ऑनलाइन प्री‍-बुकिंग कराकर शंखद्वार से प्रवेश कर सकेंगे।
  • प्रदेश के बाहर से आने वाले श्रद्धालु केवल शिखर दर्शन कर सकेंगे।
  • 250 रुपए की शीघ्र दर्शन व्यवस्था बंद रहेगी।
  • नागचंद्रेश्वर मंदिर में सीमित अधिकृत पुजारी आदि को ही अनुमति है।

सरीसृप की 103 प्रजातियों पर आधारित पहली बार डेटाबेस बनाने का श्रेय उज्जैन को

इतिहास- 1000 साल पुरानी प्रतिमाएं
वि क्रम विवि के संग्रहालय में एक हजार साल पुरानी नाग प्रतिमाएं संग्रहित हैं, जो महाकाल वन क्षेत्र से मिली थी। प्रतिमाओं में नाग अर्द्ध मानव स्वरूप में है। पुराविद् डॉ. रमण सोलंकी के अनुसार प्रतिमाओं का मिलना साबित करता है कि यहां कभी नागों की मानव स्वरूप में पूजा होती थी। एक प्रतिमा पर शेष नाग है और दूसरी में एक मुखी नाग प्रदर्शित है। मान्यता है कि उज्जैन में कभी बड़े नाग मंदिर भी थे।
समाज- नागों की मौजूदगी अब भी
ना गझिरी क्षेत्र में कोबरा का बाहुल्य है। इसी तरह नागतलाई क्षेत्र में भी नागों की संख्या अधिक है। संभवत: इसीलिए इन क्षेत्रों के नाम नाग से जुड़े हैं। उज्जैन मे 2300 साल पहले से नाग राजाओं के सिक्के मिलते हैं। मुद्रा विशेषज्ञ डॉ. आरसी ठाकुर के अनुसार 1700 व 1800 साल पुराने तांबे व चांदी के सिक्के प्राप्त हैं। पुरावेत्ताओं के अनुसार 6 टी शताब्दी में लोग सर्प वाले पैंडल पहनते थे।
साहित्य- नागों पर शोध और पुस्तकें
स माजसेवी स्व. डॉ अवंतिप्रसाद मरमट ने नागों पर शोध किया। उन्होंने 10 किताबें नागों के इतिहास पर लिखी हैं। इसके पहले स्व. डॉ विश्री वाकणकर ने भी नागों के इतिहास पर शोध किया। स्व. डॉ. श्याम सुंदर निगम ने भी नागों को लेकर अध्ययन किया। सर्प विशेषज्ञ मुकेश इंगले ने प्रदेश में नाग व सरिसृप प्रजाति को लेकर शोधपरक पुस्तक लिखी है, जिसमें उज्जैन पर फोकस किया है।
अध्ययन- पहला सरिसृप संरक्षण केंद्र
प्र देश का पहला सरीसृप संरक्षण एवं शोध केंद्र वसंत विहार में बनाया है। इसकी स्थापना नाग प्रजातियों के संरक्षण के लिए की गई थी। यहां सर्प प्रदर्शनी और उन पर अध्ययन की सुविधा भी उपलब्ध है। यह पहला केंद्र है जहां कई प्रजातियों के सर्प संग्रहित हैं। इंगले ने सरीसृप की 103 प्रजातियों पर आधारित डेटाबेस भी बनाया है। जो अध्ययन व शोध करने वाले विद्यार्थियों के लिए मददगार है।



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