कोरोना के संक्रमण काल ने शनिवार को महाकाल मंदिर प्रबंध समिति को इस धर्मसंकट से बचा लिया कि शीर्ष पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर परिसर को श्रद्धालुओं के बोझ से कैसे बचाएं? लेकिन एक साल बाद फिर नागपंचमी आएगी और प्रशासन के सामने यही सवाल खड़ा होगा। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय विशेषज्ञों की समिति, मंदिर प्रबंध समिति को यह राय दे चुकी है कि महाकालेश्वर मंदिर का मौजूदा 300 साल पुराना स्ट्रक्चर अब इतना मजबूत नहीं रहा कि इसके शीर्ष पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर परिसर में ज्यादा श्रद्धालुओं का बोझ डाला जाए। इस मंदिर में दर्शन की नई व्यवस्था करना जरूरी है। इस नागपंचमी पर परिस्थितिवश श्रद्धालुओं का प्रवेश नागचंद्रेश्वर मंदिर में नहीं कराकर प्रशासन ने एलईडी लगा कर श्रद्धालुओं को लाइव दर्शन कराने की व्यवस्था कर दी। इससे नागचंद्रेश्वर मंदिर परिसर में बहुत कम लोग जा पाए। सामान्य श्रद्धालु ओंकारेश्वर परिसर में लगी एलईडी पर ही दर्शन कर लौट गए। प्रशासन ने इसका हल नहीं निकला तो एक साल बाद यानी 2021 की नागपंचमी पर मंदिर समिति के सामने फिर मंदिर के स्ट्रक्चर की सुरक्षा का मुद्दा खड़ा होगा। मंदिर समिति के पास अगली नागपंचमी तक एक साल का समय है। इस बीच यदि नया रास्ता बन जाता है तो मंदिर के स्ट्रक्चर के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा। 2019 की नागपंचमी की व्यवस्था के दौरान तत्कालीन कलेक्टर मनीषसिंह ने नागचंद्रेश्वर के नए रास्ते पर मंथन किया था। उनके स्थानांतरण के बाद यह मुद्दा फिर फाइलों में गुम हो गया है। नागपंचमी पर शनिवार दोपहर शासन की ओर से कलेक्टर आशीष सिंह ने नागचंद्रेश्वर का पूजन किया। संभागायुक्त आनंद शर्मा, आईजी राकेश गुप्ता, एसपी मनोज सिंह ने भी भागीदारी की। रात 12 बजे महंत विनीत गिरि ने पूजन आरती कर मंदिर के पट फिर एक साल के लिए बंद कर दिए। तीन सुझाव : विशेषज्ञों से समिति बनवाए नए रास्ते की योजना 1 विश्रामधाम से नागचंद्रेश्वर मंदिर के सामने तक एयरो ब्रिज बनाया जा सकता है। यह ब्रिज दास हनुमान मंदिर के ऊपर से नागचंद्रेश्वर के सामने से होकर निर्गम द्वार की ओर जा सकता है। इस तरह का अस्थायी ब्रिज भी बन सकता है जो पर्व के बाद हटाया जा सके। इससे श्रद्धालुओं को सुविधा भी होगी। 2 विश्रामधाम रैंप से सभामंडप की छत पर से होकर नागचंद्रेश्वर परिसर तक नया रास्ता बन सकता है। सभामंडप की नवीनीकरण योजना में सभामंडप के ऊपर एक और माला बनाने का प्लान इसीलिए किया गया था। एनवक्त पर सभामंडप के ऊपर वाला निर्माण इस तर्क के साथ निरस्त कर दिया था कि इससे शिखर दिखाई नहीं देगा। 3 एयरपोर्ट पर उपयोग होने वाली हाइड्रोलिक सीढ़ियाें के समान योजना बनाई जा सकती है। इन्हें नागचंद्रेश्वर मंदिर के सामने लगाना और हटाना आसान होगा। इससे मंदिर के स्वरूप पर भी कोई असर नहीं होगा। इस योजना पर शनिवार को भी मंदिर से जुड़े पंडे-पुजारियों व संतों के साथ बातचीत की गई ताकि और सुझाव आ सकें। एक साल पहले 20 के ग्रुप में कराना पड़े थे दर्शन सुप्रीम कोर्ट की विशेषज्ञ समिति के सुझाव के आधार पर मंदिर समिति ने केंद्रीय भवन संरक्षण और पुरातत्व विशेषज्ञों से मंदिर के स्ट्रक्चर की जांच भी कराई थी। विशेषज्ञों ने मंदिर के स्ट्रक्चर के एक-एक कोने की नाप-जोख की और हरेक पत्थर की मजबूती जांची है। समिति का सुझाव था कि इस स्ट्रक्चर पर ज्यादा बोझ नहीं डाला जा सकता। इस पर 2019 में मंदिर समिति ने नागचंद्रेश्वर मंदिर में 20-20 श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए भेजने की व्यवस्था की थी। समिति ने यह भी कहा था कि मंदिर के स्ट्रक्चर से लगी लोहे की सीढ़ियां हटाई जाना चाहिए। उसका वजन भी मंदिर के स्ट्रक्चर पर नहीं आना चाहिए। इस पर समिति ने लोहे की सीढ़ियां स्ट्रक्चर से अलग कर दी। एक साल में मंदिर प्रबंध समिति नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए नए मार्ग का फैसला नहीं कर सकी है। यदि कोरोना की गाइड लाइन में गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंध नहीं लगाया होता तो इस बार भी प्रशासन के सामने धर्मसंकट होता कि श्रद्धालुओं को नागचंद्रेश्वर मंदिर में जाने से कैसे रोकें या वैकल्पिक व्यवस्था क्या करे? प्रशासक एसएस रावत का कहना है कि इस मुद्दे पर मंथन लगातार चल रहा है। मंदिर प्रबंध समिति विशेषज्ञों की सलाह से ही योजना बनाएगी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Structure of Mahakal temple necessitates new path for weak Nagachandreshwar


कोरोना के संक्रमण काल ने शनिवार को महाकाल मंदिर प्रबंध समिति को इस धर्मसंकट से बचा लिया कि शीर्ष पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर परिसर को श्रद्धालुओं के बोझ से कैसे बचाएं? लेकिन एक साल बाद फिर नागपंचमी आएगी और प्रशासन के सामने यही सवाल खड़ा होगा। क्योंकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय विशेषज्ञों की समिति, मंदिर प्रबंध समिति को यह राय दे चुकी है कि महाकालेश्वर मंदिर का मौजूदा 300 साल पुराना स्ट्रक्चर अब इतना मजबूत नहीं रहा कि इसके शीर्ष पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर परिसर में ज्यादा श्रद्धालुओं का बोझ डाला जाए। इस मंदिर में दर्शन की नई व्यवस्था करना जरूरी है।
इस नागपंचमी पर परिस्थितिवश श्रद्धालुओं का प्रवेश नागचंद्रेश्वर मंदिर में नहीं कराकर प्रशासन ने एलईडी लगा कर श्रद्धालुओं को लाइव दर्शन कराने की व्यवस्था कर दी। इससे नागचंद्रेश्वर मंदिर परिसर में बहुत कम लोग जा पाए। सामान्य श्रद्धालु ओंकारेश्वर परिसर में लगी एलईडी पर ही दर्शन कर लौट गए। प्रशासन ने इसका हल नहीं निकला तो एक साल बाद यानी 2021 की नागपंचमी पर मंदिर समिति के सामने फिर मंदिर के स्ट्रक्चर की सुरक्षा का मुद्दा खड़ा होगा। मंदिर समिति के पास अगली नागपंचमी तक एक साल का समय है। इस बीच यदि नया रास्ता बन जाता है तो मंदिर के स्ट्रक्चर के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा। 2019 की नागपंचमी की व्यवस्था के दौरान तत्कालीन कलेक्टर मनीषसिंह ने नागचंद्रेश्वर के नए रास्ते पर मंथन किया था। उनके स्थानांतरण के बाद यह मुद्दा फिर फाइलों में गुम हो गया है।

नागपंचमी पर शनिवार दोपहर शासन की ओर से कलेक्टर आशीष सिंह ने नागचंद्रेश्वर का पूजन किया। संभागायुक्त आनंद शर्मा, आईजी राकेश गुप्ता, एसपी मनोज सिंह ने भी भागीदारी की। रात 12 बजे महंत विनीत गिरि ने पूजन आरती कर मंदिर के पट फिर एक साल के लिए बंद कर दिए।

तीन सुझाव : विशेषज्ञों से समिति बनवाए नए रास्ते की योजना

1 विश्रामधाम से नागचंद्रेश्वर मंदिर के सामने तक एयरो ब्रिज बनाया जा सकता है। यह ब्रिज दास हनुमान मंदिर के ऊपर से नागचंद्रेश्वर के सामने से होकर निर्गम द्वार की ओर जा सकता है। इस तरह का अस्थायी ब्रिज भी बन सकता है जो पर्व के बाद हटाया जा सके। इससे श्रद्धालुओं को सुविधा भी होगी।
2 विश्रामधाम रैंप से सभामंडप की छत पर से होकर नागचंद्रेश्वर परिसर तक नया रास्ता बन सकता है। सभामंडप की नवीनीकरण योजना में सभामंडप के ऊपर एक और माला बनाने का प्लान इसीलिए किया गया था। एनवक्त पर सभामंडप के ऊपर वाला निर्माण इस तर्क के साथ निरस्त कर दिया था कि इससे शिखर दिखाई नहीं देगा।
3 एयरपोर्ट पर उपयोग होने वाली हाइड्रोलिक सीढ़ियाें के समान योजना बनाई जा सकती है। इन्हें नागचंद्रेश्वर मंदिर के सामने लगाना और हटाना आसान होगा। इससे मंदिर के स्वरूप पर भी कोई असर नहीं होगा। इस योजना पर शनिवार को भी मंदिर से जुड़े पंडे-पुजारियों व संतों के साथ बातचीत की गई ताकि और सुझाव आ सकें।

एक साल पहले 20 के ग्रुप में कराना पड़े थे दर्शन
सुप्रीम कोर्ट की विशेषज्ञ समिति के सुझाव के आधार पर मंदिर समिति ने केंद्रीय भवन संरक्षण और पुरातत्व विशेषज्ञों से मंदिर के स्ट्रक्चर की जांच भी कराई थी। विशेषज्ञों ने मंदिर के स्ट्रक्चर के एक-एक कोने की नाप-जोख की और हरेक पत्थर की मजबूती जांची है। समिति का सुझाव था कि इस स्ट्रक्चर पर ज्यादा बोझ नहीं डाला जा सकता। इस पर 2019 में मंदिर समिति ने नागचंद्रेश्वर मंदिर में 20-20 श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए भेजने की व्यवस्था की थी। समिति ने यह भी कहा था कि मंदिर के स्ट्रक्चर से लगी लोहे की सीढ़ियां हटाई जाना चाहिए। उसका वजन भी मंदिर के स्ट्रक्चर पर नहीं आना चाहिए। इस पर समिति ने लोहे की सीढ़ियां स्ट्रक्चर से अलग कर दी। एक साल में मंदिर प्रबंध समिति नागचंद्रेश्वर के दर्शन के लिए नए मार्ग का फैसला नहीं कर सकी है। यदि कोरोना की गाइड लाइन में गर्भगृह में प्रवेश प्रतिबंध नहीं लगाया होता तो इस बार भी प्रशासन के सामने धर्मसंकट होता कि श्रद्धालुओं को नागचंद्रेश्वर मंदिर में जाने से कैसे रोकें या वैकल्पिक व्यवस्था क्या करे? प्रशासक एसएस रावत का कहना है कि इस मुद्दे पर मंथन लगातार चल रहा है। मंदिर प्रबंध समिति विशेषज्ञों की सलाह से ही योजना बनाएगी।



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