दीपेश शर्मा, नगर निगम में चार महीने में 1 करोड़ 80 लाख रुपए का डीजल घोटाला हुआ है। 1200 गाड़ियों पर तैनात निगम कर्मचारियों ने निजी पंप वालों से मिलीभगत कर इसे अंजाम दिया है। मार्च में लॉकडाउन लगने के बाद जब निजी पंप बंद हुए और कर्मचारियों को मजबूरी में निगम के तीन गारबेज ट्रांसफर स्टेशन लालबाग, कृषि कॉलेज और संगम नगर स्थित पंपों से डीजल भरवाना पड़ा तो इस घोटाले का खुलासा हुआ। घोटाला करने वालों पर निगम ने कोई कार्रवाई तो नहीं की, गड़बड़ी रोकने के लिए सभी गाड़ियों के फ्यूल टैंक पर सेंसर वाली रिंग जरूर लगवा दी है। पहले 10 निजी पंप से भरवाते थे डीजल लॉकडाउन से पहले निगम की गाड़ियों में तीन गारबेज ट्रांसफर स्टेशन में लगे पंपों के अलावा 10 निजी व संस्था के पंपों आईपी फ्यूल, उषाराजे, भुल्लर फ्यूल स्टेशन, क्षमा, मदान फ्यूल, रुस्तमजी, पुलिस वेलफेयर पीटीसी, 15वीं वाहिनी, प्रथम वाहिनी और आरएपीटीसी से डीजल भरवाया जाता था। ऐसे समझें डीजल की खपत लॉकडाउन में निगम की गाड़ियां सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा दौड़ीं। कभी सैनिटाइजेशन के लिए तो कभी राशन सप्लाय के लिए लगातार गाड़ियां चलती रहीं। इसके बावजूद डीजल खपत वर्ष 2019 के मार्च, अप्रैल, मई और जून के 15 लाख 21 हजार 939 लीटर डीजल की तुलना में इस साल मार्च, अप्रैल, मई और जून में 12 लाख 95 हजार 824 लीटर ही हुई। अपर आयुक्त एस. कृष्ण चैतन्य ने भी स्वीकारा कि चार महीने में 2 लाख 26 हजार 115 लीटर डीजल कम खर्च हुआ। यह मात्रा पिछले साल की तुलना में 14.85 प्रतिशत कम है। राशि में भी पिछले साल की तुलना में 17.69 प्रतिशत कमी आई है। अब सभी वाहनों पर लगाया सेंसर निगम के वर्कशॉप प्रभारी मनीष पांडे ने घोटाले डीजल में गड़बड़ी रोकने के लिए निगम के 1291 वाहन और 105 टैक्सियों के फ्यूल टैंक में एक सेंसर रिंग लगवाई जा रही है। इस रिंग का सेंसर पंप के नोजल में भी होगा। इससे जैसे ही नोजल से फ्यूल टैंक में ईंधन भरा जाएगा उसका रिकॉर्ड आ जाएगा। व्यवस्था बदली, तब पकड़ में आई गड़बड़ी यह घोटाला तब हमें पता चला जब चीजे स्ट्रीमलाइन की। इससे 2 करोड़ का डीजल बच गया। इतना तय है कि आगे ऐसी गड़बड़ी न हो, इसकी व्यवस्था की जा रही है। - प्रतिभा पाल, निगमायुक्त Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today घोटाले पर कार्रवाई नहीं, सिर्फ सेंसर


दीपेश शर्मा, नगर निगम में चार महीने में 1 करोड़ 80 लाख रुपए का डीजल घोटाला हुआ है। 1200 गाड़ियों पर तैनात निगम कर्मचारियों ने निजी पंप वालों से मिलीभगत कर इसे अंजाम दिया है। मार्च में लॉकडाउन लगने के बाद जब निजी पंप बंद हुए और कर्मचारियों को मजबूरी में निगम के तीन गारबेज ट्रांसफर स्टेशन लालबाग, कृषि कॉलेज और संगम नगर स्थित पंपों से डीजल भरवाना पड़ा तो इस घोटाले का खुलासा हुआ। घोटाला करने वालों पर निगम ने कोई कार्रवाई तो नहीं की, गड़बड़ी रोकने के लिए सभी गाड़ियों के फ्यूल टैंक पर सेंसर वाली रिंग जरूर लगवा दी है।
पहले 10 निजी पंप से भरवाते थे डीजल
लॉकडाउन से पहले निगम की गाड़ियों में तीन गारबेज ट्रांसफर स्टेशन में लगे पंपों के अलावा 10 निजी व संस्था के पंपों आईपी फ्यूल, उषाराजे, भुल्लर फ्यूल स्टेशन, क्षमा, मदान फ्यूल, रुस्तमजी, पुलिस वेलफेयर पीटीसी, 15वीं वाहिनी, प्रथम वाहिनी और आरएपीटीसी से डीजल भरवाया जाता था।

ऐसे समझें डीजल की खपत

लॉकडाउन में निगम की गाड़ियां सामान्य दिनों से कहीं ज्यादा दौड़ीं। कभी सैनिटाइजेशन के लिए तो कभी राशन सप्लाय के लिए लगातार गाड़ियां चलती रहीं। इसके बावजूद डीजल खपत वर्ष 2019 के मार्च, अप्रैल, मई और जून के 15 लाख 21 हजार 939 लीटर डीजल की तुलना में इस साल मार्च, अप्रैल, मई और जून में 12 लाख 95 हजार 824 लीटर ही हुई। अपर आयुक्त एस. कृष्ण चैतन्य ने भी स्वीकारा कि चार महीने में 2 लाख 26 हजार 115 लीटर डीजल कम खर्च हुआ। यह मात्रा पिछले साल की तुलना में 14.85 प्रतिशत कम है। राशि में भी पिछले साल की तुलना में 17.69 प्रतिशत कमी आई है।

अब सभी वाहनों पर लगाया सेंसर

निगम के वर्कशॉप प्रभारी मनीष पांडे ने घोटाले डीजल में गड़बड़ी रोकने के लिए निगम के 1291 वाहन और 105 टैक्सियों के फ्यूल टैंक में एक सेंसर रिंग लगवाई जा रही है। इस रिंग का सेंसर पंप के नोजल में भी होगा। इससे जैसे ही नोजल से फ्यूल टैंक में ईंधन भरा जाएगा उसका रिकॉर्ड आ जाएगा।

व्यवस्था बदली, तब पकड़ में आई गड़बड़ी

यह घोटाला तब हमें पता चला जब चीजे स्ट्रीमलाइन की। इससे 2 करोड़ का डीजल बच गया। इतना तय है कि आगे ऐसी गड़बड़ी न हो, इसकी व्यवस्था की जा रही है। - प्रतिभा पाल, निगमायुक्त



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घोटाले पर कार्रवाई नहीं, सिर्फ सेंसर


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