बिजली कंपनी ने चेक के जरिए बिजली बिल का भुगतान 1 अगस्त से बंद कर दिया। अब नकद, डिमांड ड्रॉफ्ट या फिर ऑनलाइन तरीकों से ही बिल जमा किए जा रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान जारी किए गए काफी चेक बाउंस हो गए। कागजों में तो बिल का राजस्व सुधरा, लेकिन चेक बाउंस होने से कंपनी को नुकसान हुआ। बिजली कंपनी के एमडी ने कंपनी के दायरे में आने वाले इंदौर-उज्जैन संभाग के लिए ये आदेश जारी किए हैं। इस व्यवस्था से घरेलू के साथ औद्योगिक, व्यावसायिक उपभोक्ताओं को ज्यादा नुकसान होगा। काफी संख्या में लोग चेक से ही बिल जमा करते हैं। कारखाने, दुकान, शोरूम वाले नई व्यवस्था से ज्यादा प्रभावित होंगे। कारण यह कि इनके बिल भारी-भरकम आते हैं। इतना पैसा नकद जमा करने के बजाय चेक के जरिए जमा करना आसान होता है। चेक से भुगतान करने पर बिल जमा करना रिकॉर्ड पर भी आ जाता है। जमा किया बिल गुम जाने पर भी बैंक पासबुक में चेक से भुगतान की एंट्री रहती है। कई बार ऐसा होता है कि भुगतान के बाद भी बकाया बताकर दो महीने का बिल भेज दिया जाता है। बिजली कंपनी ने कुछ साल पहले भी चेक से भुगतान स्वीकार करना बंद कर दिया था। हालांकि कुछ समय बाद इसे दोबारा शुरू भी कर दिया था। खाते में पैसा नहीं होने के अलावा, ओवर राइटिंग, हस्ताक्षर का मिलान नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो जाते हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


बिजली कंपनी ने चेक के जरिए बिजली बिल का भुगतान 1 अगस्त से बंद कर दिया। अब नकद, डिमांड ड्रॉफ्ट या फिर ऑनलाइन तरीकों से ही बिल जमा किए जा रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान जारी किए गए काफी चेक बाउंस हो गए। कागजों में तो बिल का राजस्व सुधरा, लेकिन चेक बाउंस होने से कंपनी को नुकसान हुआ।
बिजली कंपनी के एमडी ने कंपनी के दायरे में आने वाले इंदौर-उज्जैन संभाग के लिए ये आदेश जारी किए हैं। इस व्यवस्था से घरेलू के साथ औद्योगिक, व्यावसायिक उपभोक्ताओं को ज्यादा नुकसान होगा। काफी संख्या में लोग चेक से ही बिल जमा करते हैं। कारखाने, दुकान, शोरूम वाले नई व्यवस्था से ज्यादा प्रभावित होंगे। कारण यह कि इनके बिल भारी-भरकम आते हैं। इतना पैसा नकद जमा करने के बजाय चेक के जरिए जमा करना आसान होता है। चेक से भुगतान करने पर बिल जमा करना रिकॉर्ड पर भी आ जाता है। जमा किया बिल गुम जाने पर भी बैंक पासबुक में चेक से भुगतान की एंट्री रहती है।
कई बार ऐसा होता है कि भुगतान के बाद भी बकाया बताकर दो महीने का बिल भेज दिया जाता है। बिजली कंपनी ने कुछ साल पहले भी चेक से भुगतान स्वीकार करना बंद कर दिया था। हालांकि कुछ समय बाद इसे दोबारा शुरू भी कर दिया था। खाते में पैसा नहीं होने के अलावा, ओवर राइटिंग, हस्ताक्षर का मिलान नहीं होने के कारण चेक बाउंस हो जाते हैं।



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