विदिशा रोड स्थित शिव नगर कॉलोनी में नाले पर मकान बने हुए हैं, अयोध्या बायपास की शिवकल्प कॉलोनी में नाले की दीवार टूटी हुई है। कोटरा सुल्तानाबाद के नया बसेरा में नाले के ऊपर अभी भी झुग्गियां बनी हुईं हैं। बरसात में उनमें पानी भरना तय है। 2016 में यहां दीपक नाम का एक युवक बह गया था। 12 नंबर बस स्टॉप सहित शहर के कई क्षेत्रों में नालों पर दुकानें बनी हुईं हैं। यह तो केवल कुछ उदाहरण हैं। हर बरसात के मौसम में लगातार बारिश से बाढ़ के हालात बनना राजधानी में सामान्य बात है। 2006 और 2016 में बाढ़ के हालात बन भी चुके हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह है नालों पर अतिक्रमण और उनकी टूटी हुई दीवारें।
इन क्षेत्रों में होती है सबसे ज्यादा दिक्कत
बाग मुगालिया, होशंगाबाद रोड, 11 मील, एमपी नगर, शिवाजी नगर, अरेरा कॉलोनी, शाहपुरा, त्रिलंगा, गुलमोहर, मंगलवारा, बुधवारा, गिन्नौरी, हाथीखाना, करोंद, जहांगीराबाद, स्टेशन एरिया, चांदबड़, सुभाष कॉलोनी, अशोका गार्डन, इकबाल कॉलोनी, सेमरा और कोलार।
सर्वे हुआ, पर रिपोर्ट गायब
निगम ने 6 साल पहले नालों पर अतिक्रमण का सर्वे किया था, लेकिन हर जोन में हुए सर्वे का डाटा एकजाई नहीं किया और फाइनल रिपोर्ट नहीं बनी। पूरे शहर में 789 नालों पर 20 हजार अतिक्रमण सामने आए थे। छुटपुट कार्रवाई को छोड़ दिया जाए तो कोई बड़ा अभियान नहीं चला।
एक साल से काट रहे चक्कर
अयोध्या बायपास रोड की शिवकल्प कॉलोनी की रहवासी सोसायटी के अध्यक्ष तजिंदर पाल सिंह ने बताया कि उनकी कॉलोनी के पास से गुजर रहे नाले की बाउंड्रीवॉल टूटी है। एक साल से वे इसे सुधरवाने के लिए निगम दफ्तर के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।
इस बारिश में दिक्कत न हो, इसका पूरा प्रयास करेंगे
इस बारिश में दिक्कत न हो, इसके लिए हम पूरा प्रयास करेंगे। हम अपनी टीम से फीडबैक लेकर तत्काल एक्शन प्लान तैयार करेंगे।
- वीएस चौधरी कोलसानी, कमिश्नर, नगर निगम
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