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काेराेनावायरस संक्रमण के कारण इंदाैर में गुरुवार सुबह एक डाॅक्टर की माैत हाे गई। रूपराम नगर में रहने वाले 62 वर्षीय डाॅ. शत्रुघ्न पंजवानी जनरल फिजिशियन थे और प्राइवेट प्रैक्टिस करते थे। काेराेना के चलते किसी डाॅक्टर की देश में यह पहली माैत है। एमजीएम अस्पताल ने बुधवार रात काेविड-19 के मरीजाें की सूची जारी की थी, जिसमें डाॅ. पंजवानी का भी नाम था। उनमें काेराेना के लक्षण थे, लेकिन प्रशासन काे अभी पता नहीं चला है कि उन्हें संक्रमण कैसे हुआ। चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएमएचओ) डाॅ. प्रवीण जड़िया ने कहा, ‘लगता है कि इलाज के दाैरान वह किसी संक्रमित के संपर्क में अाए थे। उनके संक्रमण का स्राेत पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।’ उनके अलावा साउथ तोड़ा निवासी 44 वर्षीय एक अन्य मरीज ने भी दम तोड़ दिया। इन्हें मिलाकर इंदौर के मृतकों का अांकड़ा अब 23 हो गया। वहीं गुरुवार को ही 22 नए पॉजिटिव भी मिले हैं। यानी कुल 235 मरीज हो चुके हैं। हालांकि राहत की बात ये है कि 12 और मरीज स्वस्थ हो गए हैं। शुक्रवार को इन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। इससे पहले 15 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। यानी स्वस्थ होने वालों की संख्या भी 27 हो गई है। अगर एमजीएम मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट देखें तो दूसरा एक और सकारात्मक पहलू सामने आया। शहर के 256 मरीजों के सैंपल में से 222 की रिपोर्ट निगेटिव आई। संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी के मुताबिक, बुधवार को 199 सैंपल में से 28.64% यानी 57 पॉजिटिव आए थे। गुरुवार को ये आंकड़ा घटकर 13.18% रह गया। ये नए पॉजिटिव संत नगर निवासी 58 वर्षीय महिला, हाजी कॉलोनी के 52 वर्षीय पुरुष, मल्हारगंज के 42 वर्षीय पुरुष, सिद्धि विनायक अस्पताल के पास रहने वाले 50 वर्षीय पुरुष, टाटपट्‌टी बाखल की 18, 38, 42 साल की महिलाएं। 50 साल के पुरुष, सुदामा नगर की 63 वर्षीय बुजुर्ग महिला व 55 वर्ष के बुजुर्ग, मोहनपुरा की 46 वर्ष की महिला, चंदन नगर के 72 वर्षीय बुजुर्ग, नयापुरा के 58 वर्षीय बुजुर्ग, मदिना नगर के 55 वर्ष के बुजुर्ग, आलापुरा के 42 वर्षीय पुरुष, पलसीकर कॉलोनी के 54 वर्षीय पुरुष, पिंजारा बाखल के 65 वर्षीय बुजुर्ग, राजीव नगर खजराना के 62 वर्षीय बुजुर्ग, मोती तबेला के 50 वर्षीय और चंद्रभागा के पुरुष, चंपाबाग के 65 वर्षीय बुजुर्ग और अहिल्या पल्टन का 21 वर्षीय युवक पॉजिटिव आने वालों की सूची में शामिल हैं। 4 अप्रैल को एमआर टीबी अस्पताल लाया गया था मिली जानकारी के मुताबिक डॉ. पंजवानी को 4 अप्रैल को एमआर टीबी अस्पताल लाया गया था। लेकिन सरकारी अस्पताल की बजाए गोकुलदास अस्पताल में उन्हें भर्ती किया गया। वहां उनका जब पहला एक्स-रे करवाया गया तो फेफड़े में एक फेज नजर आया। अगले दिन दूसरे एक्स-रे में फेज की संख्या 2 हो गई। इसके बाद तीसरे एक्सरे में पूरे फेफड़े में कई सारे फेज नजर आने लगे, क्योंकि गोकुलदास अस्पताल में स्टाफ की कमी है और आईसीयू की व्यवस्था मुफीद नहीं थी इसलिए उन्हें सीएचएल अस्पताल शिफ्ट किया गया। 3 दिन से उनका सीएचएल अस्पताल में इलाज चल रहा था। बुधवार देर रात एमजीएम मेडिकल कॉलेज के बुलेटिन में 40 मरीजों की सूची जारी की, जिसमें उनका सैंपल भी पॉजिटिव बताया गया। रात में ही उन्हें अरबिंदो अस्पताल शिफ्ट किया गया। पहली कोरोना संक्रमण की जांच की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी बताया जा रहा है कि उनकी कंडीशन ऐसी नहीं थी कि उन्हें शिफ्ट किया जाए, लेकिन राज्य शासन ने कोविड-19 दिए हैं जहां संक्रमित मरीजों को रखा जाता है जैसे ही रिपोर्ट पॉजिटिव आती है मरीजों को तत्कालीन अस्पतालों में शिफ्ट किया जाता है। उनके पारिवारिक मित्र ने बताया कि उनकी पहली बार जब कोरोना संक्रमण की जांच की गई तो रिपोर्ट नेगेटिव आई थी लेकिन एक्स-रे में बीमारी बढ़ती हुई दिखाई दे रही थी इसलिए जब दूसरी बार सैंपल जांच के लिए भेजा गया तब रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। उन्हें वेंटिलेटर पर जीवन रक्षक उपकरणों के सहारे रखा गया था लेकिन आज सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया इस मौके पर उनके तीनों बेटे भी उनके पास नहीं थे उनके तीनों बच्चे ऑस्ट्रेलिया में है। मिली जानकारी के मुताबिक डॉ. पंजवानी ने सिंध से एमबीबीएस किया था। 22 मार्च से उन्हें सर्दी-जुकाम की समस्या हुई, लेकिन परिवार में उनके साथ कई लोगों को एलर्जी की समस्या थी तो सामान्य जुकाम समझा। 30 मार्च को पहली बार उनकी तबीयत खराब हुई तो जांच करवाने के लिए वो एमआर टीबी अस्पताल पहुंचे। पहली रिपोर्ट निगेटिव आई। दूसरी रिपोर्ट जब पॉजिटिव आई, तब वे अस्पताल में भर्ती हुए। 7 दिन पहले वीडियो में कहा- मैं बिलकुल फिट हूं डॉ. पंजवानी के उस वीडियो के अंश, जो उन्होंने चलाया था। उन्होंने कहा था किमैं स्वस्थ हूं और फिट हूं। घर में परिवार और बच्चों के साथ बैठा हूं। मेरे जो भी वीडियो चलाए जा रहे हैं, वह गलत हैं। आईएमए की ओर से डॉक्टर के परिवार को दिया जाएगा 10 लाख का फंड 62 वर्षीय डॉक्टर की मौत के बाद मेडिकल समुदाय भी सतर्क हो गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मध्यप्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष संजय लोंढे ने कोविड-19 से डॉक्टर की मौत पर अफसोस जताने के साथ ही कहा कि कई मरीजों में कोविड-19 के लक्षण कुछ दिन बाद प्रकट होते हैं। ऐसे में डॉक्टरों को खुद के स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए। आईएमए के डॉ. नटवर सारडा ने कहा कि आईएमए की ओर से 10 लाख का फंड परिवार को दिया जाएगा। ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. सुबीर जैन बताते है कि हफ्तेभर पहले ठीक थे। 5 दिन पहले ही उनमें लक्षण आने लगे। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया था। 2-3 दिन में ही अचानक उनकी तबीयत खराब हुई। परिवार में पत्नी और तीन बेटे हैं। उनके तीनों बेटे फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में हैं। उनका इंदौर में उनके चार परिजनों की मौजूदगी में कोविड-19 से बचाव के प्रोटोकॉल के मुताबिक दाह संस्कार किया गया। दिवंगत डॉक्टर को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने श्रद्धांजलि दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ शामिल हैं। 2. युवक की मौत, कोरोना संदिग्ध मान अंत्येष्टि में कोई नहीं आया गुरुकृपा कॉलोनी में 48 वर्षीय युवक की मौत हो गई। परिवार में बुजुर्ग माता-पिता और बेटा है। कोरोना से मौत के संदेह में पड़ोसी और अन्य लोग अंतिम संस्कार के लिए नहीं आए। ऐसे में अधिकारियों ने निगम के कर्मचारियों को बुलाया। तब जाकर अंतिम संस्कार हुआ। 3. पिता के संस्कार में नहीं आई बेटी, कहा 28 दिन क्वारेंटाइन रहना पड़ता पल्हर नगर में कोरोना पीड़ित 65 वर्षीय वृद्ध की मौत हो गई। इनकी दो बेटियां हैं, एक लंदन में ताे दूसरी बीना में। एसडीएम राकेश शर्मा ने बीना वाली बेटी काे कॉल कर अंतिम संस्कार के लिए आने को कहा। बेटी ने कहा- आई तो 28 दिन क्वारेंटाइन में रहना होगा। निगमकर्मियों ने अंतिम संस्कार किया। 4. उज्जैन से बेटी नहीं आई, मोहल्ले के युवाओं ने किया क्रियाकर्म संविद नगर निवासी 80 वर्षीय शीलाबाई अकेली रहती थीं। बुधवार रात उनका निधन हो गया। इकलौती बेटी उज्जैन में रहती है। उज्जैन में भी कर्फ्यू होने से वह नहीं आ सकी। ऐसे में क्षेत्र के धर्मेंद्र सोनकर, राजा कोठारी, राम सिलावट, हरि पटेल ने अंतिम संस्कार किया। और थाने के एसआई से संपर्क कर अंतिम संस्कार के सामान की दुकान खुलवाई। सामान की व्यवस्था होने पर रहवासी भोला भदौरिया, आदि ने महिला का अंतिम संस्कार किया। ई पास भोपाल से ऑनलाइन होंगे मप्र शासन ने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान किसी व्यक्ति के मप्र के अंदर या मप्र के बाहर कहीं भी जाने के लिए मंजूरी लिए जाने की भोपाल स्तर पर ई पास व्यवस्था लागू कर दी है। इसके लिए 0755-2411180 पर व्यक्ति फोन कर सकता है। इसमें किसी मौत की स्थिति, मेडिकल इमरजेंसी (हार्टअटैक, केंसर, स्ट्रोक, कैंसर डायग्नो, कीमोथेरेपी, डिलेवरी आदि) के िलए आवेदन किया जा सकता है। इस व्यवस्था के बाद जिला प्रशासन ने इंदौर स्तर पर जारी की ऑनलाइन व्यवस्था बंद कर दी है। शवयात्रा में पांच से ज्यादा लोग नहीं शवयात्रा, अंतिम संस्कार के दौरान अधिक लोग आने से कोरोना संक्रमण फैलने के बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने अंतिम संस्कार को लेकर प्रतिबंधात्मक धारा 144 में विविध निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत किसी की मृत्यु की दशा में अब अंतिम संस्कार, जनाजे के दौरान पांच से अधिक व्यक्ति शामिल नहीं हो सकेंगे। अस्पताल मेंकोरोना पॉजिटिव मरीज या अन्य किसी बीमारी से मौत की दशा में देह को अस्पताल से सीधे शमशान, कब्रिस्तान, मुक्तिधाम स्थल पर भेजा जाएगा, देह को जिले की सीमा से बाहर नहीं भेजा जाएगा। कोरोना पॉजीटिव मरीज अथवा शंकास्पद मौत की स्थिति में सभी अस्पताल, सरकारी अधिकारी परिजन को समझाइश देकर इंदौर में ही अंतिम संस्कार कराएंगे, ऐसा नहीं होने पर संबंधित डॉक्टर के विरुद्ध पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। कोरोना पॉजीटिव व शंकास्पद मौत की स्थिति में अस्पताल मृत देह को पैक करने में पूरा प्रोटोकॉल पालन करेगा। यलो अस्पतालों के लिए 36 डॉक्टर कोरोना के संदिग्ध लक्षण वालों मरीजों के ‌उपचार के लिए जिला प्रशासन ने आठ अस्पातलों को यलो कैटेगरी में रखा है। इसमेंचिकित्सकों की आ रही कमी को देखते हुए कलेक्टर मनीष सिंह ने शासन द्वारा जारी एस्मा आदेश के तहत 36 डॉक्टरों की ड्यूटी अस्पतालों में मरीजों के उपचार के लिए लगा दी है। जिले मेंपहली बार इस तरह के आदेश जारी हुए हैं। इन डॉक्टरों की ‌उपस्थिति अनिवार्य करने के साथ ही इन सातों अस्पातलों में किसी भी डॉक्टर की अनुपस्थिति को लेकर कलेक्टर ने साफ कहा है कि किसी की भी छुट्टी की मंजूरी कलेक्टर द्वारा ही जारी होगी।इसलिए सभी सौ फीसदी स्टॉफ का आना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today डॉ. पंजवानी के तीन बेटे हैं। तीनों ऑस्ट्रेलिया में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। भारत से फ्लाइट बंद होने के कारण ऑस्ट्रेलिया में ही फंसे हुए हैं। पिछले कई दिन से वे पिता की बीमारी से चिंतित थे और वहीं से बार-बार अपने पिता के इलाज की स्थिति जान रहे थे। गुरुवार को पंजवानी के निधन के बाद वे उन्हें मुखाग्नि तक नहीं दे पाए। उन्होंने मोबाइल पर पिता के अंतिम दर्शन किए।




काेराेनावायरस संक्रमण के कारण इंदाैर में गुरुवार सुबह एक डाॅक्टर की माैत हाे गई। रूपराम नगर में रहने वाले 62 वर्षीय डाॅ. शत्रुघ्न पंजवानी जनरल फिजिशियन थे और प्राइवेट प्रैक्टिस करते थे। काेराेना के चलते किसी डाॅक्टर की देश में यह पहली माैत है। एमजीएम अस्पताल ने बुधवार रात काेविड-19 के मरीजाें की सूची जारी की थी, जिसमें डाॅ. पंजवानी का भी नाम था। उनमें काेराेना के लक्षण थे, लेकिन प्रशासन काे अभी पता नहीं चला है कि उन्हें संक्रमण कैसे हुआ। चीफ मेडिकल ऑफिसर (सीएमएचओ) डाॅ. प्रवीण जड़िया ने कहा, ‘लगता है कि इलाज के दाैरान वह किसी संक्रमित के संपर्क में अाए थे। उनके संक्रमण का स्राेत पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।’ उनके अलावा साउथ तोड़ा निवासी 44 वर्षीय एक अन्य मरीज ने भी दम तोड़ दिया। इन्हें मिलाकर इंदौर के मृतकों का अांकड़ा अब 23 हो गया। वहीं गुरुवार को ही 22 नए पॉजिटिव भी मिले हैं। यानी कुल 235 मरीज हो चुके हैं।

हालांकि राहत की बात ये है कि 12 और मरीज स्वस्थ हो गए हैं। शुक्रवार को इन्हें डिस्चार्ज कर दिया जाएगा। इससे पहले 15 मरीज डिस्चार्ज हो चुके हैं। यानी स्वस्थ होने वालों की संख्या भी 27 हो गई है। अगर एमजीएम मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट देखें तो दूसरा एक और सकारात्मक पहलू सामने आया। शहर के 256 मरीजों के सैंपल में से 222 की रिपोर्ट निगेटिव आई। संभागायुक्त आकाश त्रिपाठी के मुताबिक, बुधवार को 199 सैंपल में से 28.64% यानी 57 पॉजिटिव आए थे। गुरुवार को ये आंकड़ा घटकर 13.18% रह गया।

ये नए पॉजिटिव

संत नगर निवासी 58 वर्षीय महिला, हाजी कॉलोनी के 52 वर्षीय पुरुष, मल्हारगंज के 42 वर्षीय पुरुष, सिद्धि विनायक अस्पताल के पास रहने वाले 50 वर्षीय पुरुष, टाटपट्‌टी बाखल की 18, 38, 42 साल की महिलाएं। 50 साल के पुरुष, सुदामा नगर की 63 वर्षीय बुजुर्ग महिला व 55 वर्ष के बुजुर्ग, मोहनपुरा की 46 वर्ष की महिला, चंदन नगर के 72 वर्षीय बुजुर्ग, नयापुरा के 58 वर्षीय बुजुर्ग, मदिना नगर के 55 वर्ष के बुजुर्ग, आलापुरा के 42 वर्षीय पुरुष, पलसीकर कॉलोनी के 54 वर्षीय पुरुष, पिंजारा बाखल के 65 वर्षीय बुजुर्ग, राजीव नगर खजराना के 62 वर्षीय बुजुर्ग, मोती तबेला के 50 वर्षीय और चंद्रभागा के पुरुष, चंपाबाग के 65 वर्षीय बुजुर्ग और अहिल्या पल्टन का 21 वर्षीय युवक पॉजिटिव आने वालों की सूची में शामिल हैं।

4 अप्रैल को एमआर टीबी अस्पताल लाया गया था
मिली जानकारी के मुताबिक डॉ. पंजवानी को 4 अप्रैल को एमआर टीबी अस्पताल लाया गया था। लेकिन सरकारी अस्पताल की बजाए गोकुलदास अस्पताल में उन्हें भर्ती किया गया। वहां उनका जब पहला एक्स-रे करवाया गया तो फेफड़े में एक फेज नजर आया। अगले दिन दूसरे एक्स-रे में फेज की संख्या 2 हो गई। इसके बाद तीसरे एक्सरे में पूरे फेफड़े में कई सारे फेज नजर आने लगे, क्योंकि गोकुलदास अस्पताल में स्टाफ की कमी है और आईसीयू की व्यवस्था मुफीद नहीं थी इसलिए उन्हें सीएचएल अस्पताल शिफ्ट किया गया। 3 दिन से उनका सीएचएल अस्पताल में इलाज चल रहा था। बुधवार देर रात एमजीएम मेडिकल कॉलेज के बुलेटिन में 40 मरीजों की सूची जारी की, जिसमें उनका सैंपल भी पॉजिटिव बताया गया। रात में ही उन्हें अरबिंदो अस्पताल शिफ्ट किया गया।

पहली कोरोना संक्रमण की जांच की रिपोर्ट नेगेटिव आई थी

बताया जा रहा है कि उनकी कंडीशन ऐसी नहीं थी कि उन्हें शिफ्ट किया जाए, लेकिन राज्य शासन ने कोविड-19 दिए हैं जहां संक्रमित मरीजों को रखा जाता है जैसे ही रिपोर्ट पॉजिटिव आती है मरीजों को तत्कालीन अस्पतालों में शिफ्ट किया जाता है। उनके पारिवारिक मित्र ने बताया कि उनकी पहली बार जब कोरोना संक्रमण की जांच की गई तो रिपोर्ट नेगेटिव आई थी लेकिन एक्स-रे में बीमारी बढ़ती हुई दिखाई दे रही थी इसलिए जब दूसरी बार सैंपल जांच के लिए भेजा गया तब रिपोर्ट पॉजिटिव आ गई। उन्हें वेंटिलेटर पर जीवन रक्षक उपकरणों के सहारे रखा गया था लेकिन आज सुबह उन्होंने दम तोड़ दिया इस मौके पर उनके तीनों बेटे भी उनके पास नहीं थे उनके तीनों बच्चे ऑस्ट्रेलिया में है। मिली जानकारी के मुताबिक डॉ. पंजवानी ने सिंध से एमबीबीएस किया था। 22 मार्च से उन्हें सर्दी-जुकाम की समस्या हुई, लेकिन परिवार में उनके साथ कई लोगों को एलर्जी की समस्या थी तो सामान्य जुकाम समझा। 30 मार्च को पहली बार उनकी तबीयत खराब हुई तो जांच करवाने के लिए वो एमआर टीबी अस्पताल पहुंचे। पहली रिपोर्ट निगेटिव आई। दूसरी रिपोर्ट जब पॉजिटिव आई, तब वे अस्पताल में भर्ती हुए।

7 दिन पहले वीडियो में कहा- मैं बिलकुल फिट हूं
डॉ. पंजवानी के उस वीडियो के अंश, जो उन्होंने चलाया था। उन्होंने कहा था किमैं स्वस्थ हूं और फिट हूं। घर में परिवार और बच्चों के साथ बैठा हूं। मेरे जो भी वीडियो चलाए जा रहे हैं, वह गलत हैं।

आईएमए की ओर से डॉक्टर के परिवार को दिया जाएगा 10 लाख का फंड
62 वर्षीय डॉक्टर की मौत के बाद मेडिकल समुदाय भी सतर्क हो गया है। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मध्यप्रदेश इकाई के उपाध्यक्ष संजय लोंढे ने कोविड-19 से डॉक्टर की मौत पर अफसोस जताने के साथ ही कहा कि कई मरीजों में कोविड-19 के लक्षण कुछ दिन बाद प्रकट होते हैं। ऐसे में डॉक्टरों को खुद के स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए। आईएमए के डॉ. नटवर सारडा ने कहा कि आईएमए की ओर से 10 लाख का फंड परिवार को दिया जाएगा। ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉ. सुबीर जैन बताते है कि हफ्तेभर पहले ठीक थे। 5 दिन पहले ही उनमें लक्षण आने लगे। जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया था। 2-3 दिन में ही अचानक उनकी तबीयत खराब हुई। परिवार में पत्नी और तीन बेटे हैं। उनके तीनों बेटे फिलहाल ऑस्ट्रेलिया में हैं। उनका इंदौर में उनके चार परिजनों की मौजूदगी में कोविड-19 से बचाव के प्रोटोकॉल के मुताबिक दाह संस्कार किया गया। दिवंगत डॉक्टर को सोशल मीडिया पर कई लोगों ने श्रद्धांजलि दी है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ शामिल हैं।

2. युवक की मौत, कोरोना संदिग्ध मान अंत्येष्टि में कोई नहीं आया
गुरुकृपा कॉलोनी में 48 वर्षीय युवक की मौत हो गई। परिवार में बुजुर्ग माता-पिता और बेटा है। कोरोना से मौत के संदेह में पड़ोसी और अन्य लोग अंतिम संस्कार के लिए नहीं आए। ऐसे में अधिकारियों ने निगम के कर्मचारियों को बुलाया। तब जाकर अंतिम संस्कार हुआ।

3. पिता के संस्कार में नहीं आई बेटी, कहा 28 दिन क्वारेंटाइन रहना पड़ता
पल्हर नगर में कोरोना पीड़ित 65 वर्षीय वृद्ध की मौत हो गई। इनकी दो बेटियां हैं, एक लंदन में ताे दूसरी बीना में। एसडीएम राकेश शर्मा ने बीना वाली बेटी काे कॉल कर अंतिम संस्कार के लिए आने को कहा। बेटी ने कहा- आई तो 28 दिन क्वारेंटाइन में रहना होगा। निगमकर्मियों ने अंतिम संस्कार किया।

4. उज्जैन से बेटी नहीं आई, मोहल्ले के युवाओं ने किया क्रियाकर्म
संविद नगर निवासी 80 वर्षीय शीलाबाई अकेली रहती थीं। बुधवार रात उनका निधन हो गया। इकलौती बेटी उज्जैन में रहती है। उज्जैन में भी कर्फ्यू होने से वह नहीं आ सकी। ऐसे में क्षेत्र के धर्मेंद्र सोनकर, राजा कोठारी, राम सिलावट, हरि पटेल ने अंतिम संस्कार किया। और थाने के एसआई से संपर्क कर अंतिम संस्कार के सामान की दुकान खुलवाई। सामान की व्यवस्था होने पर रहवासी भोला भदौरिया, आदि ने महिला का अंतिम संस्कार किया।

ई पास भोपाल से ऑनलाइन होंगे
मप्र शासन ने कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान किसी व्यक्ति के मप्र के अंदर या मप्र के बाहर कहीं भी जाने के लिए मंजूरी लिए जाने की भोपाल स्तर पर ई पास व्यवस्था लागू कर दी है। इसके लिए 0755-2411180 पर व्यक्ति फोन कर सकता है। इसमें किसी मौत की स्थिति, मेडिकल इमरजेंसी (हार्टअटैक, केंसर, स्ट्रोक, कैंसर डायग्नो, कीमोथेरेपी, डिलेवरी आदि) के िलए आवेदन किया जा सकता है। इस व्यवस्था के बाद जिला प्रशासन ने इंदौर स्तर पर जारी की ऑनलाइन व्यवस्था बंद कर दी है।

शवयात्रा में पांच से ज्यादा लोग नहीं

शवयात्रा, अंतिम संस्कार के दौरान अधिक लोग आने से कोरोना संक्रमण फैलने के बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने अंतिम संस्कार को लेकर प्रतिबंधात्मक धारा 144 में विविध निर्देश जारी कर दिए हैं। इसके तहत किसी की मृत्यु की दशा में अब अंतिम संस्कार, जनाजे के दौरान पांच से अधिक व्यक्ति शामिल नहीं हो सकेंगे। अस्पताल मेंकोरोना पॉजिटिव मरीज या अन्य किसी बीमारी से मौत की दशा में देह को अस्पताल से सीधे शमशान, कब्रिस्तान, मुक्तिधाम स्थल पर भेजा जाएगा, देह को जिले की सीमा से बाहर नहीं भेजा जाएगा।

कोरोना पॉजीटिव मरीज अथवा शंकास्पद मौत की स्थिति में सभी अस्पताल, सरकारी अधिकारी परिजन को समझाइश देकर इंदौर में ही अंतिम संस्कार कराएंगे, ऐसा नहीं होने पर संबंधित डॉक्टर के विरुद्ध पंजीयन निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। कोरोना पॉजीटिव व शंकास्पद मौत की स्थिति में अस्पताल मृत देह को पैक करने में पूरा प्रोटोकॉल पालन करेगा।

यलो अस्पतालों के लिए 36 डॉक्टर

कोरोना के संदिग्ध लक्षण वालों मरीजों के ‌उपचार के लिए जिला प्रशासन ने आठ अस्पातलों को यलो कैटेगरी में रखा है। इसमेंचिकित्सकों की आ रही कमी को देखते हुए कलेक्टर मनीष सिंह ने शासन द्वारा जारी एस्मा आदेश के तहत 36 डॉक्टरों की ड्यूटी अस्पतालों में मरीजों के उपचार के लिए लगा दी है। जिले मेंपहली बार इस तरह के आदेश जारी हुए हैं। इन डॉक्टरों की ‌उपस्थिति अनिवार्य करने के साथ ही इन सातों अस्पातलों में किसी भी डॉक्टर की अनुपस्थिति को लेकर कलेक्टर ने साफ कहा है कि किसी की भी छुट्टी की मंजूरी कलेक्टर द्वारा ही जारी होगी।इसलिए सभी सौ फीसदी स्टॉफ का आना जरूरी है। ऐसा नहीं होने पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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डॉ. पंजवानी के तीन बेटे हैं। तीनों ऑस्ट्रेलिया में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। भारत से फ्लाइट बंद होने के कारण ऑस्ट्रेलिया में ही फंसे हुए हैं। पिछले कई दिन से वे पिता की बीमारी से चिंतित थे और वहीं से बार-बार अपने पिता के इलाज की स्थिति जान रहे थे। गुरुवार को पंजवानी के निधन के बाद वे उन्हें मुखाग्नि तक नहीं दे पाए। उन्होंने मोबाइल पर पिता के अंतिम दर्शन किए।
काेराेनावायरस संक्रमण के कारण इंदाैर में गुरुवार सुबह एक डाॅक्टर की माैत हाे गई। रूपराम नगर में रहने वाले 62 वर्षीय डाॅ. शत्रुघ्न पंजवानी जनरल फिजिशियन थे और …
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मध्य प्रदेश मेंकोरोना संक्रमणके मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसेदेखते हुए प्रशासन ने मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया है। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने भी इसके लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। अगर कोई व्यक्ति मास्क के बिना बाहर निकलता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार कोप्रदेशवासियों से आग्रह किया है कि संक्रमण से बचने के लिए हर व्यक्ति मास्क लगाकर ही घर से निकले।उन्होंने ये भी कहा था किहोम मेड मास्क का भी प्रयोग किया जा सकता है। ये है एडवाइजरी सार्वजनिक स्थलों (अस्पताल, बाजार, ऑफिस) पर किसी कारण से घर से बाहरजाते समय थ्रीलेयरया घर में बना मास्क लगाना होगा। कार या मोटर साइकिल चलाते समय भीमास्क पहनना अनिवार्य है। कोई भी शख्स बिना मास्क पहने, न कोई मीटिंग अटेंड करेगा और ना ही ऐसी जगह जाएगा जहां लोग हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today मध्य प्रदेश सरकार ने मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए एडवाइजरी जारी की है।




मध्य प्रदेश मेंकोरोना संक्रमणके मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसेदेखते हुए प्रशासन ने मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया है। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने भी इसके लिए एडवाइजरी जारी कर दी है। अगर कोई व्यक्ति मास्क के बिना बाहर निकलता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बुधवार कोप्रदेशवासियों से आग्रह किया है कि संक्रमण से बचने के लिए हर व्यक्ति मास्क लगाकर ही घर से निकले।उन्होंने ये भी कहा था किहोम मेड मास्क का भी प्रयोग किया जा सकता है।

ये है एडवाइजरी

सार्वजनिक स्थलों (अस्पताल, बाजार, ऑफिस) पर किसी कारण से घर से बाहरजाते समय थ्रीलेयरया घर में बना मास्क लगाना होगा।

कार या मोटर साइकिल चलाते समय भीमास्क पहनना अनिवार्य है।

कोई भी शख्स बिना मास्क पहने, न कोई मीटिंग अटेंड करेगा और ना ही ऐसी जगह जाएगा जहां लोग हैं।

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मध्य प्रदेश सरकार ने मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया है। इसके लिए एडवाइजरी जारी की है।
मध्य प्रदेश मेंकोरोना संक्रमणके मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसेदेखते हुए प्रशासन ने मास्क लगाना अनिवार्य कर दिया है। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग ने भी इसके लिए ए…
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भोपाल में 40 से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मी कोरोना पॉजिटिव मिलने और इंदौर में कोरोना पॉजिटिव एकडॉक्टर की मौत के बाद प्रदेश में डॉक्टरों के बीच दहशत है। ग्वालियर में गजराराजा मेडिकल कॉलेज के 50 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स ने इस्तीफा दे दिया है। करीब सप्ताहभर पहले ही जीआरएमसी में 92 रेजिडेंट जूनियर डॉक्टर ने ज्वाइन किया था, एक हफ्ते के अंदर इनमें से 50 डॉक्टरों ने अपने इस्तीफे दे दिए। उनसे जो बांड भरवाया गया था, उसके बदले भी 5 लाख रुपए बाद में भरने को राजी हो गए हैं। इधर,8 अप्रैल को शिवराज सरकार ने प्रदेश मेंएस्मा लगा दिया था, जिससे 25-30 डॉक्टरों के इस्तीफे नामंजूर हो गए हैं। गजरा राजा मेडिकल कॉलेज के पीआरओ डॉ. केपी रंजन ने बताया कि कि उनके पास पर्याप्त स्टॉफ है, इन डॉक्टरों की भर्ती इमरजेंसी के लिहाज से की गई थी। कोरोना से लड़ने के लिए गजराराजा मेडिकल कॉलेज ने 114 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की भर्ती के लिए वैकेंसी निकाली थी। एक अप्रैल को हुई थी ज्वाइनिंग गजरा राजा मेडिकल कॉलेज ने 114 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की भर्ती के लिए वैकेंसी निकाली थी।3 महीने की संविदा नियुक्ति के लिए भर्ती के दौरान करीब 92 डॉक्टर ज्वाइनिंग के लिए तैयार हुए थे, इन डॉक्टर्स ने एक अप्रैल को ज्वाइन किया। जीआरएमसी ने इन डॉक्टर्स को जयारोग्य अस्पताल, कमलाराजा महिला एवं बालचिकित्सालय और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में तैनात किया था,लेकिन तैनाती के हफ्ते भर के अंदर कोरोना के डर से50 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने इस्तीफादे दिया। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today गजरा राजा मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है- डॉक्टरों के इस्तीफे से व्यवस्थाएं नहीं बिगड़ेंगी।




भोपाल में 40 से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मी कोरोना पॉजिटिव मिलने और इंदौर में कोरोना पॉजिटिव एकडॉक्टर की मौत के बाद प्रदेश में डॉक्टरों के बीच दहशत है। ग्वालियर में गजराराजा मेडिकल कॉलेज के 50 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर्स ने इस्तीफा दे दिया है। करीब सप्ताहभर पहले ही जीआरएमसी में 92 रेजिडेंट जूनियर डॉक्टर ने ज्वाइन किया था, एक हफ्ते के अंदर इनमें से 50 डॉक्टरों ने अपने इस्तीफे दे दिए। उनसे जो बांड भरवाया गया था, उसके बदले भी 5 लाख रुपए बाद में भरने को राजी हो गए हैं।

इधर,8 अप्रैल को शिवराज सरकार ने प्रदेश मेंएस्मा लगा दिया था, जिससे 25-30 डॉक्टरों के इस्तीफे नामंजूर हो गए हैं। गजरा राजा मेडिकल कॉलेज के पीआरओ डॉ. केपी रंजन ने बताया कि कि उनके पास पर्याप्त स्टॉफ है, इन डॉक्टरों की भर्ती इमरजेंसी के लिहाज से की गई थी। कोरोना से लड़ने के लिए गजराराजा मेडिकल कॉलेज ने 114 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की भर्ती के लिए वैकेंसी निकाली थी।

एक अप्रैल को हुई थी ज्वाइनिंग

गजरा राजा मेडिकल कॉलेज ने 114 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की भर्ती के लिए वैकेंसी निकाली थी।3 महीने की संविदा नियुक्ति के लिए भर्ती के दौरान करीब 92 डॉक्टर ज्वाइनिंग के लिए तैयार हुए थे, इन डॉक्टर्स ने एक अप्रैल को ज्वाइन किया। जीआरएमसी ने इन डॉक्टर्स को जयारोग्य अस्पताल, कमलाराजा महिला एवं बालचिकित्सालय और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में तैनात किया था,लेकिन तैनाती के हफ्ते भर के अंदर कोरोना के डर से50 जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों ने इस्तीफादे दिया।

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गजरा राजा मेडिकल कॉलेज प्रबंधन का कहना है- डॉक्टरों के इस्तीफे से व्यवस्थाएं नहीं बिगड़ेंगी।
भोपाल में 40 से ज्यादा स्वास्थ्य कर्मी कोरोना पॉजिटिव मिलने और इंदौर में कोरोना पॉजिटिव एकडॉक्टर की मौत के बाद प्रदेश में डॉक्टरों के बीच दहशत है। ग्वालियर मे…
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शहर में बढ़ते कोरोनावायरस के प्रभाव को कम करने के लिए कलेक्टर मनीष सिंह द्वारा शव के निराकरण के संबंध में नए आदेश जारी किए गए है। आदेश के अनुसार अब कोरोनावायरस या अन्य किसी भी बीमारी से अस्पताल में मौत होने पर शव को मृतक के घर ले जाने के बजाय सीधे शमशान घाट या कब्रस्तान ले जाया जाएगा। गुरुवार को जारी आदेश में कहा गया है कि कुछ स्थानों पर कोरोना पॉजिटिव मरीज इसलिए सामने आए क्योंकि वे कोरोना पॉजिटिव मृतक के जनाजे या शवयात्रा में शामिल हुए थे। शहर में आगे से ऐसी घटना ना हो इसलिए शवयात्रा और जनाजे में 5 से ज्यादा व्यक्ति शामिल नहीं हो सकेंगे। अस्पताल में किसी भी बीमारी से मरने पर शव को इंदौर जिले से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं रहेगी। यदि बाहर के कोरोना संदिग्ध जिनका उपचार इंदौर में चल रहा है उनमें से किसी की मौत होती है तो संबंधित अस्पताल स्टाफ और प्रशासन के अधिकारी परिजनों को समझाईश देकर इंदौर में ही अंतिम संस्कार कराया जाएगा। सरकारी अथवा प्रायवेट अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर अपने ज्ञान या बुद्धि का उपयोग करते हुए मृत्यु के कारणों की गलत प्रमाणीकरण करेंगा एवं इस आधार पर कोई पार्थिव देह इंदौर जिले से बाहर जाती है तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसका पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today इंदौर में पीपीई किट पहनकर शव का दाह संस्कार किया जा रहा है।




शहर में बढ़ते कोरोनावायरस के प्रभाव को कम करने के लिए कलेक्टर मनीष सिंह द्वारा शव के निराकरण के संबंध में नए आदेश जारी किए गए है। आदेश के अनुसार अब कोरोनावायरस या अन्य किसी भी बीमारी से अस्पताल में मौत होने पर शव को मृतक के घर ले जाने के बजाय सीधे शमशान घाट या कब्रस्तान ले जाया जाएगा।

गुरुवार को जारी आदेश में कहा गया है कि कुछ स्थानों पर कोरोना पॉजिटिव मरीज इसलिए सामने आए क्योंकि वे कोरोना पॉजिटिव मृतक के जनाजे या शवयात्रा में शामिल हुए थे। शहर में आगे से ऐसी घटना ना हो इसलिए शवयात्रा और जनाजे में 5 से ज्यादा व्यक्ति शामिल नहीं हो सकेंगे।

अस्पताल में किसी भी बीमारी से मरने पर शव को इंदौर जिले से बाहर ले जाने की अनुमति नहीं रहेगी। यदि बाहर के कोरोना संदिग्ध जिनका उपचार इंदौर में चल रहा है उनमें से किसी की मौत होती है तो संबंधित अस्पताल स्टाफ और प्रशासन के अधिकारी परिजनों को समझाईश देकर इंदौर में ही अंतिम संस्कार कराया जाएगा।

सरकारी अथवा प्रायवेट अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर अपने ज्ञान या बुद्धि का उपयोग करते हुए मृत्यु के कारणों की गलत प्रमाणीकरण करेंगा एवं इस आधार पर कोई पार्थिव देह इंदौर जिले से बाहर जाती है तो संबंधित डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसका पंजीकरण निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

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इंदौर में पीपीई किट पहनकर शव का दाह संस्कार किया जा रहा है।
शहर में बढ़ते कोरोनावायरस के प्रभाव को कम करने के लिए कलेक्टर मनीष सिंह द्वारा शव के निराकरण के संबंध में नए आदेश जारी किए गए है। आदेश के अनुसार अब कोरोनावायरस…
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शहर में गुरुवार शाम 22 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही कोरोना पॉजिटिव का आंकड़ा बढ़कर 235 हो गया है। इसके पहले सुबह दो कोरोना वायरस संक्रमण ने दम तोड़ दिया। मृतकों में 62 वर्षीय डॉक्टर भी शामिल हैं। इसके साथ ही शहर में इस संक्रमण के बाद दम तोड़ने वाले मरीजों की तादाद बढ़कर 23 पर पहुंच गई है। इसके पहले बुधवार को 40 नए मामले सामने आए थे और 6 लोगों की माैत की पुष्टि की गई थी। डॉक्टर को बुधवार देर रात जांच रिपोर्ट आने के बाद उन्हें सीएचएल अस्पताल से सांवेर रोड स्थित श्री अरबिंदो इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस शिफ्ट किया गया था, लेकिन अलसुबह उन्होंने दम दिया। एमजीएम मेडिकल कॉलेज से मिली जानकारी के अनुसार 62 वर्षीय जनरल फिजिशियन ने एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान आखिरी सांस ली। वह जांच में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। वह मधुमेह पीड़ित भी थे। इसके अलावा जिस अन्य मरीज साउथ तोड़ा निवासी 44 वर्षीय मरीज की रिपोर्ट भी दो दिन पहले ही पॉजिटिव आई थी। अलसुबह दम तोड़ दिया। आठ दिनों से मरीज का इलाज चल रहा था। 8 दिन से वह अस्पताल में भर्ती थे। 7 अप्रैल को जांच रिपोर्ट आई जिसमें बीमारी की पुष्टि हुई। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today चंदन नगर इलाके में पथराव करने वाले आरोपियों पर हुई कार्रवाई के बाद पुलिस की ऐसी शक्ति रही की कोई घरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं। 




शहर में गुरुवार शाम 22 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही कोरोना पॉजिटिव का आंकड़ा बढ़कर 235 हो गया है। इसके पहले सुबह दो कोरोना वायरस संक्रमण ने दम तोड़ दिया। मृतकों में 62 वर्षीय डॉक्टर भी शामिल हैं। इसके साथ ही शहर में इस संक्रमण के बाद दम तोड़ने वाले मरीजों की तादाद बढ़कर 23 पर पहुंच गई है। इसके पहले बुधवार को 40 नए मामले सामने आए थे और 6 लोगों की माैत की पुष्टि की गई थी।

डॉक्टर को बुधवार देर रात जांच रिपोर्ट आने के बाद उन्हें सीएचएल अस्पताल से सांवेर रोड स्थित श्री अरबिंदो इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस शिफ्ट किया गया था, लेकिन अलसुबह उन्होंने दम दिया। एमजीएम मेडिकल कॉलेज से मिली जानकारी के अनुसार 62 वर्षीय जनरल फिजिशियन ने एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान आखिरी सांस ली। वह जांच में कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। वह मधुमेह पीड़ित भी थे। इसके अलावा जिस अन्य मरीज साउथ तोड़ा निवासी 44 वर्षीय मरीज की रिपोर्ट भी दो दिन पहले ही पॉजिटिव आई थी। अलसुबह दम तोड़ दिया। आठ दिनों से मरीज का इलाज चल रहा था। 8 दिन से वह अस्पताल में भर्ती थे। 7 अप्रैल को जांच रिपोर्ट आई जिसमें बीमारी की पुष्टि हुई।

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चंदन नगर इलाके में पथराव करने वाले आरोपियों पर हुई कार्रवाई के बाद पुलिस की ऐसी शक्ति रही की कोई घरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं। 
शहर में गुरुवार शाम 22 नए मामले सामने आए। इसके साथ ही कोरोना पॉजिटिव का आंकड़ा बढ़कर 235 हो गया है। इसके पहले सुबह दो कोरोना वायरस संक्रमण ने दम तोड़ दिया। मृतको…
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देशभर में फैली कोरोना महामारी से बचने के लिए केंद्र सरकार ने पूरे भारत में 21 दिन का लॉकडाउन किया है। पुलिस प्रशासन लॉकडाउन को सफल बनाने के लिए नए-नए अंदाज में समझा रहे हैं। पुलिस वाले कहीं गाना गाकर लोगों को घरों के अंदर रहने के लिए मान-मनौव्वल कर रहे हैं। गुरुवार को पन्ना में पुलिस ने लोगों को लॉकडाउन का उल्लंघन नहीं करने की सलाह देने के लिए यमराज को ही सड़क पर उतार दिया। यमराज ने लाेगों को रोककर उनकी जान की कीमत समझाई और कोरोना वायरस के खतरों के बारे में भी आगाह किया। गुरुवार को पन्ना की सड़कों पर बाहर बेवजह घूम रहे लोगों को समझाने के लिए यमराज खुद ही आ गए। उन्होंने लोगों को घरों में रहने और लॉकडाउन का उल्लंघन नहीं करने की सलाह दी। यमराज बने मोहनलाल जड़िया ने एक बाइक सवार को रोककर कहा- आप जानते हैं जिले में लॉकडाउन घोषित है और आपसे कहा गया है कि घर पर रहें और बाहर न निकलें, लेकिन फिर भी आप मान नहीं रहे हैं। यमराज ने फिर कहा कि मैं पन्ना की जनता से नाराज हूं, क्योंकि आप लोग लॉकडाउन के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। अगर आपको कोरोना जैसी महामारी से बचना है तो आप अपने घरों में रहिए। अपने हाथों को बार-बार धोने और एक-दूसरे से डिस्टेंस बनाकर रहिए। अगर आपने ऐसा नहीं किया तो तो मुझे मजबूरन आप लोगों को अपने साथ ले जाना पड़ेगा। इसके बाद यमराज जोर का ठहाका लगाता है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today पन्ना में पुलिस ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले लोगों को समझाने के लिए यमराज को सड़क पर उतार दिया।




देशभर में फैली कोरोना महामारी से बचने के लिए केंद्र सरकार ने पूरे भारत में 21 दिन का लॉकडाउन किया है। पुलिस प्रशासन लॉकडाउन को सफल बनाने के लिए नए-नए अंदाज में समझा रहे हैं। पुलिस वाले कहीं गाना गाकर लोगों को घरों के अंदर रहने के लिए मान-मनौव्वल कर रहे हैं। गुरुवार को पन्ना में पुलिस ने लोगों को लॉकडाउन का उल्लंघन नहीं करने की सलाह देने के लिए यमराज को ही सड़क पर उतार दिया। यमराज ने लाेगों को रोककर उनकी जान की कीमत समझाई और कोरोना वायरस के खतरों के बारे में भी आगाह किया।

गुरुवार को पन्ना की सड़कों पर बाहर बेवजह घूम रहे लोगों को समझाने के लिए यमराज खुद ही आ गए। उन्होंने लोगों को घरों में रहने और लॉकडाउन का उल्लंघन नहीं करने की सलाह दी।
यमराज बने मोहनलाल जड़िया ने एक बाइक सवार को रोककर कहा- आप जानते हैं जिले में लॉकडाउन घोषित है और आपसे कहा गया है कि घर पर रहें और बाहर न निकलें, लेकिन फिर भी आप मान नहीं रहे हैं। यमराज ने फिर कहा कि मैं पन्ना की जनता से नाराज हूं, क्योंकि आप लोग लॉकडाउन के नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। अगर आपको कोरोना जैसी महामारी से बचना है तो आप अपने घरों में रहिए। अपने हाथों को बार-बार धोने और एक-दूसरे से डिस्टेंस बनाकर रहिए। अगर आपने ऐसा नहीं किया तो तो मुझे मजबूरन आप लोगों को अपने साथ ले जाना पड़ेगा। इसके बाद यमराज जोर का ठहाका लगाता है।

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पन्ना में पुलिस ने लॉकडाउन का उल्लंघन करने वाले लोगों को समझाने के लिए यमराज को सड़क पर उतार दिया।
देशभर में फैली कोरोना महामारी से बचने के लिए केंद्र सरकार ने पूरे भारत में 21 दिन का लॉकडाउन किया है। पुलिस प्रशासन लॉकडाउन को सफल बनाने के लिए नए-नए अंदाज मे…
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इंदौर.पति से विवाद के बाद तीन दिन पहले घर से निकली महिला ट्रैफिक पुलिस और सूबेदार की सूझबूझ से अपने घर सुरक्षित पहुंच गई। बंगाली चौराहे पर जब ट्रैफिक पुलिस और सूबेदार जरूरतमंदों को भोजन सामाग्री बंटवा रहे थे, तभी एक महिला पर नजर पड़ी, वहां बैठे लोगों से वह अलग थी। वह कुछ बोली नहीं, लेकिन उसके हाथ पर लिखे नंबर को सूबेदार ने लगाया। पता चला कि पति से विवाद के बाद वह तीन दिन पहले घर से चली गई है। तभी से भटक रही है। सूबेदार और सिपाहियों की सूझबूझ से वह महिला आखिरकार अपने घर पुहंच गई। ट्रैफिक सूबेदार काजिम रिजवी और उनके दो आरक्षक गजेंद्र सिंह व प्रदीप शर्मा ने सुदामा नगर से सोमवार शाम को बिना बताए घर से निकली 29 वर्षीय महिला कोउसके परिजन से मिलवाया। रिजवी ने बताया कि गुरुवार दोपहर को आरक्षक गजेंद्र सिंह और प्रदीप शर्मा बंगाली चौराहे पर आई गाड़ी से गरीबों को भोजन बंटवा रहे थे। तभी उनकी नजर उस महिला पर पड़ी। उससे भोजन-पानी का पूछा तो वह कुछ बोली नहीं। उसे देखकर आरक्षकों को शंका हुई तो उससे नाम-पता पूछा, लेकिन वह कुछ बोली नहीं। इस पर सिपाहियों ने रिजवी को जानकारी दी। रिजवी भी महिला के पास पहुंचे। देखा तो उसके हाथ पर एक नंबर था। उसे लगाया। फोन महिला के पतिने रिसीव किया। गुम पत्नी के मिलने की जानकारी मिलते ही वह खुशहो गया। फिर रिजवी को बताया कि घर में किसी विवाद को लेकर पत्नी गुस्सा होकर घर से चली गई थी। तभी से उनका पूरा परिवार उसे खोज रहा है। उसकी अन्नपूर्णा थाने में गुमशुदगी भी दर्ज करवाई है। फिर महिला का पति, भाई और पिता तीनों बंगाली चौराहे पर पहुंचे। पिता को देखकर वह फूट-फूटकर रोई। हालांकि वह बेहद कमजोर होने के कारण यह नहीं बता पाई कि दो दिन तक वह कहां रही। सूबेदार ने उन्हें बेटी को ले जाकर अन्नपूर्णा थाने में जानकारी देने और फिर मेडिकल चेकअप व स्क्रीनिंग की सलाह दी। बेटी को देखकर पिता और पति भी खूब रोए। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today प्रातीकात्मक फोटो।




इंदौर.पति से विवाद के बाद तीन दिन पहले घर से निकली महिला ट्रैफिक पुलिस और सूबेदार की सूझबूझ से अपने घर सुरक्षित पहुंच गई। बंगाली चौराहे पर जब ट्रैफिक पुलिस और सूबेदार जरूरतमंदों को भोजन सामाग्री बंटवा रहे थे, तभी एक महिला पर नजर पड़ी, वहां बैठे लोगों से वह अलग थी। वह कुछ बोली नहीं, लेकिन उसके हाथ पर लिखे नंबर को सूबेदार ने लगाया। पता चला कि पति से विवाद के बाद वह तीन दिन पहले घर से चली गई है। तभी से भटक रही है। सूबेदार और सिपाहियों की सूझबूझ से वह महिला आखिरकार अपने घर पुहंच गई।

ट्रैफिक सूबेदार काजिम रिजवी और उनके दो आरक्षक गजेंद्र सिंह व प्रदीप शर्मा ने सुदामा नगर से सोमवार शाम को बिना बताए घर से निकली 29 वर्षीय महिला कोउसके परिजन से मिलवाया। रिजवी ने बताया कि गुरुवार दोपहर को आरक्षक गजेंद्र सिंह और प्रदीप शर्मा बंगाली चौराहे पर आई गाड़ी से गरीबों को भोजन बंटवा रहे थे। तभी उनकी नजर उस महिला पर पड़ी। उससे भोजन-पानी का पूछा तो वह कुछ बोली नहीं। उसे देखकर आरक्षकों को शंका हुई तो उससे नाम-पता पूछा, लेकिन वह कुछ बोली नहीं। इस पर सिपाहियों ने रिजवी को जानकारी दी। रिजवी भी महिला के पास पहुंचे। देखा तो उसके हाथ पर एक नंबर था। उसे लगाया। फोन महिला के पतिने रिसीव किया। गुम पत्नी के मिलने की जानकारी मिलते ही वह खुशहो गया। फिर रिजवी को बताया कि घर में किसी विवाद को लेकर पत्नी गुस्सा होकर घर से चली गई थी। तभी से उनका पूरा परिवार उसे खोज रहा है। उसकी अन्नपूर्णा थाने में गुमशुदगी भी दर्ज करवाई है। फिर महिला का पति, भाई और पिता तीनों बंगाली चौराहे पर पहुंचे। पिता को देखकर वह फूट-फूटकर रोई। हालांकि वह बेहद कमजोर होने के कारण यह नहीं बता पाई कि दो दिन तक वह कहां रही। सूबेदार ने उन्हें बेटी को ले जाकर अन्नपूर्णा थाने में जानकारी देने और फिर मेडिकल चेकअप व स्क्रीनिंग की सलाह दी। बेटी को देखकर पिता और पति भी खूब रोए।

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इंदौर. पति से विवाद के बाद तीन दिन पहले घर से निकली महिला ट्रैफिक पुलिस और सूबेदार की सूझबूझ से अपने घर सुरक्षित पहुंच गई। बंगाली चौराहे पर जब ट्रैफिक पुलिस औ…
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