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एक ओर दूसरे राज्यों से बड़ी तादाद में मजदूर भिंड लाए जा रहे हैं। जबकि दूसरी ओर जिले में उन्हें प्रशासन रोजगार उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। ऐसे में इन परिवारों के सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि जिले में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना) के तहत एक लाख 8 हजार 713 जॉब कार्डधारी मजदूर हैं, जिसमें से प्रशासन बमुश्किल 9773 मजदूरों को प्रतिदिन रोजगार उपलब्ध करा पा रहा है। लेकिन मजदूरी मात्र 190 रुपए प्रतिदिन होने की वजह से मजदूरों का इतने में गुजारा नहीं हो रहा है। जिले से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए गुजरात, दिल्ली जाते हैं। जहां वे कलकारखानों सहित अन्य प्रकार की मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते देशभर में हुए लॉकडाउन के बाद यह लोग वापस अपने घर लौटने लगे हैं। जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक अब तक जिले में देश के विभिन्न शहरों से 54 हजार से अधिक लोग आ चुके हैं, जिसमें करीब 25 हजार मजदूर पेशा लोग हैं। ऐसे में अब इन लोगों के सामने परिवार का पालन पोषण करने के लिए रोजगार का बड़ा संकट पैदा हो गया है। 1. पानी पूड़ी का धंधा बंद हो गया, 40 दिन बड़ी मुश्किल से कटेः राजस्थान के जयपुर शहर में आलमपुर के मनोज पुत्र राजू रायकबार पानी पूड़ी का ठेला लगाते थे। मनोज ने बताया कि पहले दिन ही 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगा और धंधा बंद हो गया। उसके बाद 40 दिन बड़ी मुश्किल में गुजारे कई बार तो एक वक्त खाना खाकर सोना पड़ता था। मनोज ने बताया कि अब नहीं लगता कि 6 महीने तक हम पानी पूड़ी का ठेला लगा पाएंगे। यहां भी कोई मजदूरी नहीं है, जिससे परिवार के सामने भरण पोषण की समस्या पैदा हो जाएगी। 2. घर पहुंच जाएं फिर कभी सूरत नहीं आएंगेःअटेर क्षेत्र के दतावली निवासी मुकेश कुमार अहमदाबाद में पुताई का कार्य करते हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्हें काम मिलना बंद हो गया। कुछ दिन तो जैसे तैसे उन्होंने वहां गुजारे फिर किसी तरह से अपने गांव लौट आए। लेकिन यहां भी उन्हें कोई रोजगार नहीं मिल रहा है। ऐसे परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। अब वे इस इंतजार में बैठे हैं कि किसी तरह से लॉकडाउन खुले तब वे पुनः अहमदाबाद पहुंचकर अपना पुराना काम शुरु कर सकें। 3. फसल बर्बाद होने पर बाहर गए, वहां भी मजदूरी छिन गई: होली से पहले ओलावृष्टि से पांच बीघा जमीन में खड़ी सरसों की फसल बर्बाद हो गई थी। बेटे की शादी सिर पर थी, इसलिए मजदूरी करने के लिए गांधीधाम चले गए। 10 दिन तक काम किया फिर लॉकडाउन लगा और रोजगार ठप हो गया। जो कुछ कमाया था वह 15 दिन में खत्म हो गया, उसके बाद समाजसेवियों की मदद से खाना खा लेते थे। जैसे तैसे घर पहुंचे हैं पर यहां भी रोजगार का कोई साधन नहीं मिल रहा है। ऐसे में परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो रहा है। 420 पंचायतों में चुनिंदा मजदूरों को मिल रहा काम जिले 447 पंचायतों में से 420 पंचायतों में मनरेगा के तहत तालाब निर्माण, सुदूर सड़क, कच्चे नाला आदि के निर्माण कार्य चल रहे हैं। लेकिन इसमें मजदूरी चुनिंदा (9773 लोगों) को ही मिल रही है। इस संबंध में जिला पंचायत के अफसरों का तर्क है कि शासन से गाइड लाइन है कि उन्हें कुल जॉब कार्डधारियों के 10 प्रतिशत लोगों को रोज रोजगार देना हैं। ऐसे में 98 हजार मजदूर के हाथ रोजगार की तलाश में खाली बैठे हैं। वहीं जिले में करीब एक हजार से ज्यादा निर्माण कार्य बंद होने के कारण रोजगार भी बंद हैं। चल रहे दो बड़े प्रोजेक्ट में बंगाल के मजदूर कर रहे कार्य शहर में इन दिनों सीवर और पानी के दो बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिसमें करीब 150 श्रमिक पश्चिम बंगाल के कार्य कर रहे हैं। लेकिन स्थानीय मजदूरों को काम नहीं मिल रहा हैं। जबकि इस समय जिले में 25 हजार से ज्यादा मजदूर दूसरे शहरों से वापस अपने गांव आ चुके हैं। लेकिन उन हाथों को मजदूरी न मिलने से वे अपने परिवार का भरण पोषण नहीं कर पा रहे हैं। जबकि जिला प्रशासन बाहर से आए इन मजदूरों को मजदूरी नहीं दिला पा रहा हैं। पंचायतों में एक हजार मजदूरों को रोजगार दिया प्रमोद तोमर, परियोजना अधिकारी मनरेगा के मुताबिक, जिले की 420 पंचायतों में मनरेगा के तहत कार्य चल रहे हैं। बाहर से आए करीब एक हजार मजदूरों को भी रोजगार दिया गया है। शासन की जो गाइड लाइन है उस हिसाब से कार्य कराया जा रहा है। हमारे प्रोजेक्ट में जो लेवर काम करती है वह टेक्नीकल होती है -संजय शुक्ला, प्रोजेक्ट मैनेजर, सीवर के मुताबिक,हमारे प्रोजेक्ट में जो लेवर काम करती है वह एक तरह से टेक्नीकल लेवर होती है। जबकि लोकल की लेवर गहराई में उतरने अथवा ऊंचाई पर काम करने में डरती है। हालांकि साफ सफाई और मटेरियल उठाने के काम में हम थोड़ी बहुत लोकल की लेवर भी लेते हैं। अभी हमारे यहां 30 से 35 लोग लोकल के काम कर रहे हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today One lakh job card holders, only 9773 workers were told how to live in such low wages




एक ओर दूसरे राज्यों से बड़ी तादाद में मजदूर भिंड लाए जा रहे हैं। जबकि दूसरी ओर जिले में उन्हें प्रशासन रोजगार उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। ऐसे में इन परिवारों के सामने रोजीरोटी का संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि जिले में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना) के तहत एक लाख 8 हजार 713 जॉब कार्डधारी मजदूर हैं, जिसमें से प्रशासन बमुश्किल 9773 मजदूरों को प्रतिदिन रोजगार उपलब्ध करा पा रहा है। लेकिन मजदूरी मात्र 190 रुपए प्रतिदिन होने की वजह से मजदूरों का इतने में गुजारा नहीं हो रहा है।

जिले से बड़ी संख्या में लोग रोजगार के लिए गुजरात, दिल्ली जाते हैं। जहां वे कलकारखानों सहित अन्य प्रकार की मजदूरी कर अपने परिवार का पेट पालते हैं। कोरोना संक्रमण के चलते देशभर में हुए लॉकडाउन के बाद यह लोग वापस अपने घर लौटने लगे हैं। जिला प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक अब तक जिले में देश के विभिन्न शहरों से 54 हजार से अधिक लोग आ चुके हैं, जिसमें करीब 25 हजार मजदूर पेशा लोग हैं। ऐसे में अब इन लोगों के सामने परिवार का पालन पोषण करने के लिए रोजगार का बड़ा संकट पैदा हो गया है।

1. पानी पूड़ी का धंधा बंद हो गया, 40 दिन बड़ी मुश्किल से कटेः राजस्थान के जयपुर शहर में आलमपुर के मनोज पुत्र राजू रायकबार पानी पूड़ी का ठेला लगाते थे। मनोज ने बताया कि पहले दिन ही 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगा और धंधा बंद हो गया। उसके बाद 40 दिन बड़ी मुश्किल में गुजारे कई बार तो एक वक्त खाना खाकर सोना पड़ता था। मनोज ने बताया कि अब नहीं लगता कि 6 महीने तक हम पानी पूड़ी का ठेला लगा पाएंगे। यहां भी कोई मजदूरी नहीं है, जिससे परिवार के सामने भरण पोषण की समस्या पैदा हो जाएगी।

2. घर पहुंच जाएं फिर कभी सूरत नहीं आएंगेःअटेर क्षेत्र के दतावली निवासी मुकेश कुमार अहमदाबाद में पुताई का कार्य करते हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्हें काम मिलना बंद हो गया। कुछ दिन तो जैसे तैसे उन्होंने वहां गुजारे फिर किसी तरह से अपने गांव लौट आए। लेकिन यहां भी उन्हें कोई रोजगार नहीं मिल रहा है। ऐसे परिवार का गुजारा करना मुश्किल हो रहा है। अब वे इस इंतजार में बैठे हैं कि किसी तरह से लॉकडाउन खुले तब वे पुनः अहमदाबाद पहुंचकर अपना पुराना काम शुरु कर सकें।
3. फसल बर्बाद होने पर बाहर गए, वहां भी मजदूरी छिन गई: होली से पहले ओलावृष्टि से पांच बीघा जमीन में खड़ी सरसों की फसल बर्बाद हो गई थी। बेटे की शादी सिर पर थी, इसलिए मजदूरी करने के लिए गांधीधाम चले गए। 10 दिन तक काम किया फिर लॉकडाउन लगा और रोजगार ठप हो गया। जो कुछ कमाया था वह 15 दिन में खत्म हो गया, उसके बाद समाजसेवियों की मदद से खाना खा लेते थे। जैसे तैसे घर पहुंचे हैं पर यहां भी रोजगार का कोई साधन नहीं मिल रहा है। ऐसे में परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो रहा है।

420 पंचायतों में चुनिंदा मजदूरों को मिल रहा काम
जिले 447 पंचायतों में से 420 पंचायतों में मनरेगा के तहत तालाब निर्माण, सुदूर सड़क, कच्चे नाला आदि के निर्माण कार्य चल रहे हैं। लेकिन इसमें मजदूरी चुनिंदा (9773 लोगों) को ही मिल रही है। इस संबंध में जिला पंचायत के अफसरों का तर्क है कि शासन से गाइड लाइन है कि उन्हें कुल जॉब कार्डधारियों के 10 प्रतिशत लोगों को रोज रोजगार देना हैं। ऐसे में 98 हजार मजदूर के हाथ रोजगार की तलाश में खाली बैठे हैं। वहीं जिले में करीब एक हजार से ज्यादा निर्माण कार्य बंद होने के कारण रोजगार भी बंद हैं।

चल रहे दो बड़े प्रोजेक्ट में बंगाल के मजदूर कर रहे कार्य
शहर में इन दिनों सीवर और पानी के दो बड़े प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जिसमें करीब 150 श्रमिक पश्चिम बंगाल के कार्य कर रहे हैं। लेकिन स्थानीय मजदूरों को काम नहीं मिल रहा हैं। जबकि इस समय जिले में 25 हजार से ज्यादा मजदूर दूसरे शहरों से वापस अपने गांव आ चुके हैं। लेकिन उन हाथों को मजदूरी न मिलने से वे अपने परिवार का भरण पोषण नहीं कर पा रहे हैं। जबकि जिला प्रशासन बाहर से आए इन मजदूरों को मजदूरी नहीं दिला पा रहा हैं।
पंचायतों में एक हजार मजदूरों को रोजगार दिया

प्रमोद तोमर, परियोजना अधिकारी मनरेगा के मुताबिक, जिले की 420 पंचायतों में मनरेगा के तहत कार्य चल रहे हैं। बाहर से आए करीब एक हजार मजदूरों को भी रोजगार दिया गया है। शासन की जो गाइड लाइन है उस हिसाब से कार्य कराया जा रहा है।

हमारे प्रोजेक्ट में जो लेवर काम करती है वह टेक्नीकल होती है
-संजय शुक्ला, प्रोजेक्ट मैनेजर, सीवर के मुताबिक,हमारे प्रोजेक्ट में जो लेवर काम करती है वह एक तरह से टेक्नीकल लेवर होती है। जबकि लोकल की लेवर गहराई में उतरने अथवा ऊंचाई पर काम करने में डरती है। हालांकि साफ सफाई और मटेरियल उठाने के काम में हम थोड़ी बहुत लोकल की लेवर भी लेते हैं। अभी हमारे यहां 30 से 35 लोग लोकल के काम कर रहे हैं।

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One lakh job card holders, only 9773 workers were told how to live in such low wages
एक ओर दूसरे राज्यों से बड़ी तादाद में मजदूर भिंड लाए जा रहे हैं। जबकि दूसरी ओर जिले में उन्हें प्रशासन रोजगार उपलब्ध नहीं करा पा रहा है। ऐसे में इन परिवारों क…
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मेहगांव थाना क्षेत्र के गढ़ी गांव में एक महिला ने अपने ससुर की लाइसेंसी बंदूक से स्वयं को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना गुरुवार की सुबह करीब 8 बजे की है। पुलिस ने मृतिका के शव का पीएम कराकर परिजन के सुपुर्द कर दिया है। साथ ही मर्ग कायम कर प्रकरण विवेचना में लिया है। गढ़ी निवासी पवन शर्मा अमायन अस्पताल में लेब टेक्नीशियन है। उसकी पत्नी रजनी शर्मा (30) कई दिनों से ग्वालियर रहने की जिद कर रही थी। बुधवार रात भी दोनों में इसी बात को लेकर झगड़ा हुआ। पवन कह रहा था कि लॉकडाउन खुलने के बाद वह ग्वालियर शिफ्ट होने की व्यवस्था करेगा। लेकिन रजनी ने इसी गुस्से में गुरुवार की सुबह आठ बजे अपने घर की दूसरी मंजिल पर बने कमरे में खुद को बंद कर ससुर की लाइसेंसी 12 बोर बंदूक से छाती में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। गोली की आवाज सुनकर कमरे की ओर दौड़े परिजन घटना के वक्त रजनी का पति और सास, ससुर घर के नीचे वाले पोर्सन में थे। गोली की आवाज सुनकर सभी लोग दौड़कर दूसरी मंजिल पर बने कमरे में पहुंचे। लेकिन कमरे के गेट की अंदर से कुंदी बंद थी। सूचना मिलने पर मेहगांव पुलिस भी मौके पर पहुंची अाैर कमरे का दरवाजा तोड़कर मृतिका के शव को बाहर निकाला गया। 3 साल का मासूम आधे घंटे तक मां के साथ रहा कमरे में बंद बताया जा रहा है कि आत्महत्या के दौरान रजनी ने अपने तीन साल के बेटे को भी कमरे में बंद कर रखा था। साथ ही उसके सामने ही खुद को गोली मारी। पुलिस करीब आधे घंटे बाद बच्चे को कमरे से बाहर निकाला सकी। मृतिका की करीब 11 साल पहले शादी हुई थी। साथ ही उसके तीन बच्चे हैं। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर प्रकरण विवेचना में लिया है। वहीं इस संबंध में वहीं इस संबंध में सब इंस्पेक्टर शिवप्रताप सिंह का कहना है कि गढ़ी गांव में एक महिला ने अपने ससुर की लाइसेंसी बंदूक से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। उसका तीन साल का बेटा भी कमरे में था। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today




मेहगांव थाना क्षेत्र के गढ़ी गांव में एक महिला ने अपने ससुर की लाइसेंसी बंदूक से स्वयं को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना गुरुवार की सुबह करीब 8 बजे की है। पुलिस ने मृतिका के शव का पीएम कराकर परिजन के सुपुर्द कर दिया है। साथ ही मर्ग कायम कर प्रकरण विवेचना में लिया है।
गढ़ी निवासी पवन शर्मा अमायन अस्पताल में लेब टेक्नीशियन है। उसकी पत्नी रजनी शर्मा (30) कई दिनों से ग्वालियर रहने की जिद कर रही थी। बुधवार रात भी दोनों में इसी बात को लेकर झगड़ा हुआ। पवन कह रहा था कि लॉकडाउन खुलने के बाद वह ग्वालियर शिफ्ट होने की व्यवस्था करेगा। लेकिन रजनी ने इसी गुस्से में गुरुवार की सुबह आठ बजे अपने घर की दूसरी मंजिल पर बने कमरे में खुद को बंद कर ससुर की लाइसेंसी 12 बोर बंदूक से छाती में गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
गोली की आवाज सुनकर कमरे की ओर दौड़े परिजन
घटना के वक्त रजनी का पति और सास, ससुर घर के नीचे वाले पोर्सन में थे। गोली की आवाज सुनकर सभी लोग दौड़कर दूसरी मंजिल पर बने कमरे में पहुंचे। लेकिन कमरे के गेट की अंदर से कुंदी बंद थी। सूचना मिलने पर मेहगांव पुलिस भी मौके पर पहुंची अाैर कमरे का दरवाजा तोड़कर मृतिका के शव को बाहर निकाला गया।
3 साल का मासूम आधे घंटे तक मां के साथ रहा कमरे में बंद
बताया जा रहा है कि आत्महत्या के दौरान रजनी ने अपने तीन साल के बेटे को भी कमरे में बंद कर रखा था। साथ ही उसके सामने ही खुद को गोली मारी। पुलिस करीब आधे घंटे बाद बच्चे को कमरे से बाहर निकाला सकी। मृतिका की करीब 11 साल पहले शादी हुई थी। साथ ही उसके तीन बच्चे हैं। फिलहाल पुलिस ने मर्ग कायम कर प्रकरण विवेचना में लिया है। वहीं इस संबंध में वहीं इस संबंध में सब इंस्पेक्टर शिवप्रताप सिंह का कहना है कि गढ़ी गांव में एक महिला ने अपने ससुर की लाइसेंसी बंदूक से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली है। उसका तीन साल का बेटा भी कमरे में था।

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मेहगांव थाना क्षेत्र के गढ़ी गांव में एक महिला ने अपने ससुर की लाइसेंसी बंदूक से स्वयं को गोली मारकर आत्महत्या कर ली। घटना गुरुवार की सुबह करीब 8 बजे की है। प…
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शहर को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए लाॅकडाउन में दिन-रात ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों काे 40 दिन में पहली बार वीकली ऑफ दिया गया। पुलिसकर्मियों को इस एक दिन के अवकाश ने बड़ी राहत दी। कोई घर के लिए राशन लाया तो किसी ने पूरा दिन परिवार के साथ बिताया। रामायण से लेकर मूवी तक परिवार के साथ बैठकर देखी। जनता कर्फ्यू का ऐलान होते ही 20 मार्च को सभी पुलिसकर्मियों के अवकाश और वीकली ऑफ रद्द कर दिए गए थे, तभी से पुलिसकर्मी दिन-रात ड्यूटी में शहर की सीमा से लेकर शहर के अंदर सड़कों पर तैनात हैं। एसपी नवनीत भसीन ने बुधवार रात को ही वायरलैस सेट पर आने के साथ वीकली ऑफ देने का आदेश जारी दिया था। गुरुवार को करीब 230 पुलिसकर्मियों को वीकली ऑफ मिला। मैं और पत्नी 40 दिन बाद एक साथ घर पर थे -विनय शर्मा, सब इंस्पेक्टर, थाना कोतवाली के मुताबिक, मैं और मेरी पत्नी कोतवाली थाने में ही एसआई हैं। 15 मार्च के बाद गुरूवार को मैं वीकली ऑफ मिलने से घर पर रुक पाया। पत्नी का वीकली ऑफ नहीं था, लेकिन शाम की ड्यूटी थी इसलिए वो भी सुबह घर पर थी। मैं और पत्नी 40 दिन बाद एकसाथ घर में थे। मां ने मेरे लिए पावभाजी बनाई, मुझे बहुत पसंद है। पूरे परिवार ने सुबह का नाश्ता रामायण देखते हुए किया। फिर दोपहर का खाना भी साथ खाया। इस एक दिन के अवकाश से पूरा स्ट्रेस उतर गया। बच्चाें के साथ खाना खाया और मूवी भी देखी सुघर सिंह, हवलदार, थाना झांसी रोड के मुताबिक, लॉकडाउन की ड्यूटी की वजह से बच्चों के साथ डेढ़ महीने से नहीं बैठा था। इसलिए छुट्‌टी मिलने पर सुबह घर का राशन भरा और जरूरी सामान खरीदा। फिर बच्चों के साथ खाना और मूवी देखी। एक दिन के अवकाश में ही रिलेक्स हो गया। - माता-पिता और मंगेतर से बात की, राशन भी खरीदा -राहुल पाटीदार, सब इंस्पेक्टर, थाना झांसी रोड के मुताबिक, मेरी 26 अप्रैल को शादी थी, लेकिन लॉकडाउन में ड्यूटी के कारण शादी की तारीख आगे बढ़ा दी। मैं मक्सी का रहने वाला हूं इसलिए ड्यूटी की वजह से माता-पिता और मंगेतर से बात ही नहीं हो पाती थी। गुरूवार को 40 दिन बाद अवकाश मिला। मैंने माता-पिता और पूरे परिवार से वीडियो कॉल पर बात की। बाजार जाकर सामान खरीदकर लाया। कई दिनों बाद दिन में नींद ली। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Live for yourself after 40 days protecting you




शहर को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए लाॅकडाउन में दिन-रात ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों काे 40 दिन में पहली बार वीकली ऑफ दिया गया। पुलिसकर्मियों को इस एक दिन के अवकाश ने बड़ी राहत दी। कोई घर के लिए राशन लाया तो किसी ने पूरा दिन परिवार के साथ बिताया। रामायण से लेकर मूवी तक परिवार के साथ बैठकर देखी। जनता कर्फ्यू का ऐलान होते ही 20 मार्च को सभी पुलिसकर्मियों के अवकाश और वीकली ऑफ रद्द कर दिए गए थे, तभी से पुलिसकर्मी दिन-रात ड्यूटी में शहर की सीमा से लेकर शहर के अंदर सड़कों पर तैनात हैं। एसपी नवनीत भसीन ने बुधवार रात को ही वायरलैस सेट पर आने के साथ वीकली ऑफ देने का आदेश जारी दिया था। गुरुवार को करीब 230 पुलिसकर्मियों को वीकली ऑफ मिला।
मैं और पत्नी 40 दिन बाद एक साथ घर पर थे
-विनय शर्मा, सब इंस्पेक्टर, थाना कोतवाली के मुताबिक, मैं और मेरी पत्नी कोतवाली थाने में ही एसआई हैं। 15 मार्च के बाद गुरूवार को मैं वीकली ऑफ मिलने से घर पर रुक पाया। पत्नी का वीकली ऑफ नहीं था, लेकिन शाम की ड्यूटी थी इसलिए वो भी सुबह घर पर थी। मैं और पत्नी 40 दिन बाद एकसाथ घर में थे। मां ने मेरे लिए पावभाजी बनाई, मुझे बहुत पसंद है। पूरे परिवार ने सुबह का नाश्ता रामायण देखते हुए किया। फिर दोपहर का खाना भी साथ खाया। इस एक दिन के अवकाश से पूरा स्ट्रेस उतर गया।

बच्चाें के साथ खाना खाया और मूवी भी देखी
सुघर सिंह, हवलदार, थाना झांसी रोड के मुताबिक, लॉकडाउन की ड्यूटी की वजह से बच्चों के साथ डेढ़ महीने से नहीं बैठा था। इसलिए छुट्‌टी मिलने पर सुबह घर का राशन भरा और जरूरी सामान खरीदा। फिर बच्चों के साथ खाना और मूवी देखी। एक दिन के अवकाश में ही रिलेक्स हो गया। -

माता-पिता और मंगेतर से बात की, राशन भी खरीदा
-राहुल पाटीदार, सब इंस्पेक्टर, थाना झांसी रोड के मुताबिक, मेरी 26 अप्रैल को शादी थी, लेकिन लॉकडाउन में ड्यूटी के कारण शादी की तारीख आगे बढ़ा दी। मैं मक्सी का रहने वाला हूं इसलिए ड्यूटी की वजह से माता-पिता और मंगेतर से बात ही नहीं हो पाती थी। गुरूवार को 40 दिन बाद अवकाश मिला। मैंने माता-पिता और पूरे परिवार से वीडियो कॉल पर बात की। बाजार जाकर सामान खरीदकर लाया। कई दिनों बाद दिन में नींद ली।

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Live for yourself after 40 days protecting you
शहर को कोरोना के संक्रमण से बचाने के लिए लाॅकडाउन में दिन-रात ड्यूटी कर रहे पुलिसकर्मियों काे 40 दिन में पहली बार वीकली ऑफ दिया गया। पुलिसकर्मियों को इस एक दि…
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दो दिन बाद लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे लोगों को फिलहाल बाजार में कोई खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए जरूरी सामान की दुकानों को अलग अलग दिनों में छूट दी जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन ने व्यापारियों सहित अन्य लोगों के सुझाव भी मंगाए हैं। जिले की सीमाएं अभी सील ही रहेंगी। बाहर आने-जाने वाले लोग ई पास से यात्रा कर पाएंगे। बाहर से आने वाले लोगों को 14 दिन के क्वारेंटाइन किया जाएगा। लाॅकडाउन के दूसरे चरण में तीन मई तक सारे दफ्तर, बाजार और यातायात के साधन बंद रखने की घोषणा की गई थी। बाजार बंद होने से छोटी जरूरतों के लिए परेशानी झेल रहे लोगोंं का मानना है कि दो दिन बाद उन्हें लॉकडाउन से पूरी तरह से निजात मिल जाएगी। इस मामले में जिला प्रशासन ने अपने अधिकारियों का फीडबैक लेने के साथ ही व्यापारियों, समाजसेवियों और धर्मगुरुओं से भी राय ली है। सभी का मानना है कि संक्रमण का खतरा बढ़ने के कारण एकदम से पूरा बाजार खोलना ठीक नहीं होगा। व्यापारियों ने जरूरत के सामान की दुकानों को छूट देने के साथ ही लोगों के रोजगार का ध्यान रखने का भी आग्रह किया है। नया संक्रमित मरीज मिलने के कारण सख्ती...फल एवं सब्जी की बिक्री बंद, किराना भी नहीं मिलेगा शहरी क्षेत्र में एक नया कोरोना मरीज मिलने के बाद प्रशासन ने धारा-144 के तहत दी गईं कई छूट वापस ले ली हैं। अब न तो थोक सब्जी, फल की दुकानें खुलेंगी न किराना की बिक्री थोक अथवा खैरिज में हो सकेगी। दूध-ब्रेड-टोस्ट की दुकानें सुबह 6 बजे से 9 बजे तक खुल सकेंगी। किराना, ग्रोसरी, सिवईं या की ऑनलाइन बिक्री हो सकेगी। शहर के 11 वार्डों में शुक्रवार से पहले चरण के तहत राशन की 40 दुकानें खोली जाएंगी। ये रहेंगे प्रतिबंधित- थोक दवा व सब्जी दुकानें, कृषि उपकरण, टायर-पंचर की दुकानें, शहरी क्षेत्र में पशु आहार-मुर्गी दाना, सोसाइटी-कॉलोनियों में दुकानें, शहर में हो रहे सरकारी निर्माण, निर्माण सामग्री की दुकानें, आटा-मसाला पिसाई केंद्र, इलेक्ट्रॉनिक एवं इलेक्ट्रिक सामान की होम डिलेवरी बंद रहेगी। इन्हें छूट- केंद्र के दफ्तर, बैंक, एटीएम, बीमा कंपनी, गैस वितरण, हाथ ठेलों पर फल की बिक्री (11 बजे तक), ग्रामीण क्षेत्र में किराना दुकानें दोपहर 2 बजे तक, नर्सिंग होम और क्लीनिक,लैब, दवा दुकानें दोपहर 2 बजे तक (बाड़ा क्षेत्र व अस्पताल परिसर पूरे दिन),पेट्रोल पंप चुनिंदा दोपहर 12 बजे तक। जरूरत के हिसाब से देंगे परमिशन -कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर के मुताबिक, केंद्र और प्रदेश सरकार की गाइड लाइन के आधार पर जिले की स्थिति का आंकलन करने के बाद जिला प्रशासन जरूरत के हिसाब से दुकानें खोलने की अनुमति देगा। फिलहाल पूरा बाजार एक साथ खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सीमाएं भी अभी सील रहेंगी। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today At present, the market will not get relief, shops will be opened as per need, borders will remain sealed




दो दिन बाद लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे लोगों को फिलहाल बाजार में कोई खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए जरूरी सामान की दुकानों को अलग अलग दिनों में छूट दी जाएगी। इसके लिए जिला प्रशासन ने व्यापारियों सहित अन्य लोगों के सुझाव भी मंगाए हैं। जिले की सीमाएं अभी सील ही रहेंगी। बाहर आने-जाने वाले लोग ई पास से यात्रा कर पाएंगे। बाहर से आने वाले लोगों को 14 दिन के क्वारेंटाइन किया जाएगा।
लाॅकडाउन के दूसरे चरण में तीन मई तक सारे दफ्तर, बाजार और यातायात के साधन बंद रखने की घोषणा की गई थी। बाजार बंद होने से छोटी जरूरतों के लिए परेशानी झेल रहे लोगोंं का मानना है कि दो दिन बाद उन्हें लॉकडाउन से पूरी तरह से निजात मिल जाएगी। इस मामले में जिला प्रशासन ने अपने अधिकारियों का फीडबैक लेने के साथ ही व्यापारियों, समाजसेवियों और धर्मगुरुओं से भी राय ली है। सभी का मानना है कि संक्रमण का खतरा बढ़ने के कारण एकदम से पूरा बाजार खोलना ठीक नहीं होगा। व्यापारियों ने जरूरत के सामान की दुकानों को छूट देने के साथ ही लोगों के रोजगार का ध्यान रखने का भी आग्रह किया है।

नया संक्रमित मरीज मिलने के कारण सख्ती...फल एवं सब्जी की बिक्री बंद, किराना भी नहीं मिलेगा

शहरी क्षेत्र में एक नया कोरोना मरीज मिलने के बाद प्रशासन ने धारा-144 के तहत दी गईं कई छूट वापस ले ली हैं। अब न तो थोक सब्जी, फल की दुकानें खुलेंगी न किराना की बिक्री थोक अथवा खैरिज में हो सकेगी। दूध-ब्रेड-टोस्ट की दुकानें सुबह 6 बजे से 9 बजे तक खुल सकेंगी। किराना, ग्रोसरी, सिवईं या की ऑनलाइन बिक्री हो सकेगी। शहर के 11 वार्डों में शुक्रवार से पहले चरण के तहत राशन की 40 दुकानें खोली जाएंगी।
ये रहेंगे प्रतिबंधित- थोक दवा व सब्जी दुकानें, कृषि उपकरण, टायर-पंचर की दुकानें, शहरी क्षेत्र में पशु आहार-मुर्गी दाना, सोसाइटी-कॉलोनियों में दुकानें, शहर में हो रहे सरकारी निर्माण, निर्माण सामग्री की दुकानें, आटा-मसाला पिसाई केंद्र, इलेक्ट्रॉनिक एवं इलेक्ट्रिक सामान की होम डिलेवरी बंद रहेगी।
इन्हें छूट- केंद्र के दफ्तर, बैंक, एटीएम, बीमा कंपनी, गैस वितरण, हाथ ठेलों पर फल की बिक्री (11 बजे तक), ग्रामीण क्षेत्र में किराना दुकानें दोपहर 2 बजे तक, नर्सिंग होम और क्लीनिक,लैब, दवा दुकानें दोपहर 2 बजे तक (बाड़ा क्षेत्र व अस्पताल परिसर पूरे दिन),पेट्रोल पंप चुनिंदा दोपहर 12 बजे तक।

जरूरत के हिसाब से देंगे परमिशन

-कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर के मुताबिक, केंद्र और प्रदेश सरकार की गाइड लाइन के आधार पर जिले की स्थिति का आंकलन करने के बाद जिला प्रशासन जरूरत के हिसाब से दुकानें खोलने की अनुमति देगा। फिलहाल पूरा बाजार एक साथ खोलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। सीमाएं भी अभी सील रहेंगी।

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At present, the market will not get relief, shops will be opened as per need, borders will remain sealed
दो दिन बाद लॉकडाउन खुलने का इंतजार कर रहे लोगों को फिलहाल बाजार में कोई खास राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए जरूरी सामान की …
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ग्वालियर में पिछले 40 दिन में कोरोना से संक्रमित 9 लाेग मिल चुके हैं। इनमें से अगर ढोली बुवा का पुल निवासी बबीता वर्मा को छोड़ दिया जाए तो अन्य 8 मरीज बाहर से संक्रमित हाेकर आए। इनमें 18 से 28 अप्रैल तक तीन मरीज दिल्ली के रास्ते अाए, लेकिन इनकी ठीक से स्क्रीनिंग नहीं हुई। इससे बाॅर्डर पर स्क्रीनिंग के दावाें पर भी सवाल खड़े हाे रहे हैं। गुरुवार को पॉजिटिव पाया गया सिल्वर एस्टेट निवासी एनएमक्यू शमशी की एंबुलेंस जब ग्वालियर सीमा पर पहुंची तो वहां टीम ने सिर्फ थर्मल स्केनर से शरीर का तापमान नापकर इन्हें घर जाने दिया। ट्रैवल हिस्ट्री होने के बाद भी क्वारेंटाइन नहीं किया गया। गुरुवार को 97 मरीजों के सैंपल लिए गए। जबकि वायरोलॉजिकल लैब में 124 लोगों के सैंपल की जांच की गई। इसमें 123 की रिपोर्ट निगेटिव आई है। अभिषेक मिश्रा खजुराहो घूमकर लौटे थे चेतकपुरी के अभिषेक मिश्रा को खजुराहो से लौटने के बाद 24 मार्च को यह पता चला कि उन्हें बॉर्डर लाइन कोरोना संक्रमण है। इसके बाद उसे भर्ती करा दिया गया। अभिषेक की पत्नी और ड्राइवर की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अशोक कुमार इनकी पत्नी यूके से आईं थीं बीएसएफ के अफसर अशोक कुमार की पत्नी यूके से आई थीं। 28 अप्रैल को हुई जांच में अशोक कुमार को कोरोना संक्रमण पाया गया था। अशोक की पत्नी और बेटे की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इलाज के बाद 9 अप्रैल को डिस्चार्ज कर दिया गया था। जोहरा खान उप्र के सहारनपुर से लौटीं थीं सत्यदेव नगर की जोहरा खान की रिपोर्ट 7 अप्रैल को पॉजिटिव आई। जोहरा का भाई 17 फरवरी को दुबई से आया था। उससे मिलने वह उप्र के सहारनपुर में गई थीं। इलाज के बाद 18 अप्रैल को जोहरा खान को डिस्चार्ज कर दिया गया था। पेशे से नर्स, इंदौर से लौटीं थीं आमखो निवासी जेएएच के ट्रॉमा सेंटर में पदस्थ स्टाफ नर्स लता प्रभारी 4 अप्रैल को इंदौर से ग्वालियर आईं थी। यहां उन्होंने दो दिन ट्रॉमा सेंटर में ड्यूटी की। 7 अप्रैल को उन्हें कोरोना होने की पुष्टि हुई थी। 18 अप्रैल को लता को डिस्चार्ज कर दिया गया। अजय जाटव महाराष्ट्र के कोल्हापुर से आया था सिंधिया नगर का अजय जाटव महाराष्ट्र से कोल्हापुर से 3 अप्रैल को आया था और उसे क्वारेंटाइन सेंटर में रखा गया था। उसे 7 अप्रैल को हुई जांच में कोरोना होने की पुष्टि हुई। अजय को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल से 18 अप्रैल को डिस्चार्ज कर दिया गया। वजीर खान काम बंद होने पर दिल्ली से आया बहोड़ापुर निवासी मुबारक हुसैन दिल्ली में रहकर बुटिक का काम करता था। 22 अप्रैल को वह संक्रमित पाया गया। वह 19 अप्रैल को अपने घर पहुंच गया था। दो दिन बाद थाने गया तो उसकी जांच की। मुबारक का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है। एनएमक्यू शमशी परिवार के साथ दिल्ली से लौटे सिल्वर एस्टेट निवासी एनएमक्यू शमशी 28 अप्रैल को पिता का इलाज कराकर दिल्ली से परिवार सहित लौटे थे। उन्हें सत्कार गेस्ट हाउस में क्वारेंटाइन किया गया था। गुरुवार को उनका सैंपल पॉजिटिव आने के बाद उन्हें सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today ग्वालियर में पिछले 40 दिन में कोरोना से संक्रमित 9 लाेग मिल चुके हैं।




ग्वालियर में पिछले 40 दिन में कोरोना से संक्रमित 9 लाेग मिल चुके हैं। इनमें से अगर ढोली बुवा का पुल निवासी बबीता वर्मा को छोड़ दिया जाए तो अन्य 8 मरीज बाहर से संक्रमित हाेकर आए। इनमें 18 से 28 अप्रैल तक तीन मरीज दिल्ली के रास्ते अाए, लेकिन इनकी ठीक से स्क्रीनिंग नहीं हुई। इससे बाॅर्डर पर स्क्रीनिंग के दावाें पर भी सवाल खड़े हाे रहे हैं। गुरुवार को पॉजिटिव पाया गया सिल्वर एस्टेट निवासी एनएमक्यू शमशी की एंबुलेंस जब ग्वालियर सीमा पर पहुंची तो वहां टीम ने सिर्फ थर्मल स्केनर से शरीर का तापमान नापकर इन्हें घर जाने दिया। ट्रैवल हिस्ट्री होने के बाद भी क्वारेंटाइन नहीं किया गया। गुरुवार को 97 मरीजों के सैंपल लिए गए। जबकि वायरोलॉजिकल लैब में 124 लोगों के सैंपल की जांच की गई। इसमें 123 की रिपोर्ट निगेटिव आई है।

अभिषेक मिश्रा

खजुराहो घूमकर लौटे थे

चेतकपुरी के अभिषेक मिश्रा को खजुराहो से लौटने के बाद 24 मार्च को यह पता चला कि उन्हें बॉर्डर लाइन कोरोना संक्रमण है। इसके बाद उसे भर्ती करा दिया गया। अभिषेक की पत्नी और ड्राइवर की रिपोर्ट निगेटिव आई थी।

अशोक कुमार

इनकी पत्नी यूके से आईं थीं

बीएसएफ के अफसर अशोक कुमार की पत्नी यूके से आई थीं। 28 अप्रैल को हुई जांच में अशोक कुमार को कोरोना संक्रमण पाया गया था। अशोक की पत्नी और बेटे की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इलाज के बाद 9 अप्रैल को डिस्चार्ज कर दिया गया था।

जोहरा खान

उप्र के सहारनपुर से लौटीं थीं

सत्यदेव नगर की जोहरा खान की रिपोर्ट 7 अप्रैल को पॉजिटिव आई। जोहरा का भाई 17 फरवरी को दुबई से आया था। उससे मिलने वह उप्र के सहारनपुर में गई थीं। इलाज के बाद 18 अप्रैल को जोहरा खान को डिस्चार्ज कर दिया गया था।

पेशे से नर्स, इंदौर से लौटीं थीं

आमखो निवासी जेएएच के ट्रॉमा सेंटर में पदस्थ स्टाफ नर्स लता प्रभारी 4 अप्रैल को इंदौर से ग्वालियर आईं थी। यहां उन्होंने दो दिन ट्रॉमा सेंटर में ड्यूटी की। 7 अप्रैल को उन्हें कोरोना होने की पुष्टि हुई थी। 18 अप्रैल को लता को डिस्चार्ज कर दिया गया।

अजय जाटव

महाराष्ट्र के कोल्हापुर से आया था

सिंधिया नगर का अजय जाटव महाराष्ट्र से कोल्हापुर से 3 अप्रैल को आया था और उसे क्वारेंटाइन सेंटर में रखा गया था। उसे 7 अप्रैल को हुई जांच में कोरोना होने की पुष्टि हुई। अजय को सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल से 18 अप्रैल को डिस्चार्ज कर दिया गया।

वजीर खान

काम बंद होने पर दिल्ली से आया

बहोड़ापुर निवासी मुबारक हुसैन दिल्ली में रहकर बुटिक का काम करता था। 22 अप्रैल को वह संक्रमित पाया गया। वह 19 अप्रैल को अपने घर पहुंच गया था। दो दिन बाद थाने गया तो उसकी जांच की। मुबारक का सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इलाज चल रहा है।

एनएमक्यू शमशी

परिवार के साथ दिल्ली से लौटे

सिल्वर एस्टेट निवासी एनएमक्यू शमशी 28 अप्रैल को पिता का इलाज कराकर दिल्ली से परिवार सहित लौटे थे। उन्हें सत्कार गेस्ट हाउस में क्वारेंटाइन किया गया था। गुरुवार को उनका सैंपल पॉजिटिव आने के बाद उन्हें सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में भर्ती किया गया।

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ग्वालियर में पिछले 40 दिन में कोरोना से संक्रमित 9 लाेग मिल चुके हैं।
ग्वालियर में पिछले 40 दिन में कोरोना से संक्रमित 9 लाेग मिल चुके हैं। इनमें से अगर ढोली बुवा का पुल निवासी बबीता वर्मा को छोड़ दिया जाए तो अन्य 8 मरीज बाहर से…
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शहर में अब गर्मी अपना असर दिखा रही है। दोपहर में सामान्य कपड़ों में भी व्यक्ति गर्मी व पसीने से परेशान हो जाता है। ऐसे में खाकी वर्दी के ऊपर हमारी पुलिस पीपीई किट पहनकर शहर की सीमाओं पर तैनात है। छह-छह घंटे तक यह लोग पीपीई किट पहनकर ड्यूटी कर रहे हैं। इस किट में हवा तक नहीं अंदर जाती, फिर भी पुलिस शहर को काेरोना से बचाने के लिए तैनात खड़ी है। इसी हाल में अस्पतालों के बाहर तैनात पुलिसकर्मी व अस्पतालों के अंदर ड्यूटी दे रहे डॉक्टर से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ भी है। दैनिक भास्कर टीम ने शहर की सीमा से लेकर सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल के बाहर और अस्पताल के अंदर तैनात पैरामेडिकल स्टाफ तक से मिलकर जाना कि इतनी गर्मी में वह किस तरह अपना फर्ज निभाकर कोरोना वायरस से शहर को बचा रहे हैं। सभी का एक ही जवाब था। पीपीई किट हमारी और दूसरे लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी है। चाहे गर्मी हो या अन्य कोई परेशानी आखिर हम सभी को मिलजुलकर शहर से कोरोना का संक्रमण पूरी तरह खत्म करना है। 6 घंटे तक वॉशरूम तक नहीं जाते, पानी भी कम पीते हैं -पंजाब सिंह, सिपाही, मोहना नाके पर तैनात के मुताबिक,कहर दिन छह घंटे पीपीई किट पहनकर ड्यूटी करनी पड़ती है। अभी दोपहर 12 से शाम 6 बजे की ड्यूटी कर रहा हूं। दिन का तापमान बढ़ रहा है, ऐसे में वर्दी के ऊपर पीपीई किट पहनने से पूरी वर्दी पसीने से गीली हो जाती है। पिछले एक सप्ताह से यही रूटीन हो गया है। पहले दो-तीन दिन बहुत दिक्कत हुई थी। पीपीई किट पहनने के बाद छह घंटे बाद ही वॉशरूम जा पाते हैं, इसलिए पानी कम पीते हैं। क्योंकि पीपीई किट एक बार उतार दी तो उसे डिस्पोज ही करना पड़ता है। पानी पीने में दिक्कत होती थी, इसलिए अब ग्लास वाला मास्क न लगाकर दूसरा मास्क लगा रहे हैं और हेड कैप लगा लेते हैं। अब आदत होती जा रही है। लेकिन हम सुरक्षित रहेंगे तभी शहर सुरक्षित रहेगा। यहां हर छह घंटे में दो सिपाही पीपीई किट पहनाकर लगाए जाते हैं। इस तरह पूरे दिन में आठ सिपाही पीपीई किट पहनकर ड्यूटी करते हैं। लोग इस हाल में देखकर भी शहर के अंदर जाने की जिद करते हैं। उन्हें यह समझना चाहिए, हम उन्हीं के लिए यहां तैनात हैं। इस समय सुरक्षित रहना ही सबकी प्राथमिकता -अजय कुमार, सिपाही, सुपर स्पेशिलिटी हाॅस्पिटल के मुताबिक, दिन में आठ घंटे वर्दी के ऊपर पीपीई किट पहनना भी एक चुनौती है। गर्मी के कारण इतना पसीना आता है कि वर्दी गीली हो जाती है। लेकिन इस समय पूरी मुस्तैदी के साथ ड्यूटी करने की जरूरत है। जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सुरक्षा उपकरण पहनने के निर्देश जारी किए हैं। पीपीई किट के चलते असुविधा तो हो रही है लेकिन इसे पहनने से हम सुरक्षित रहते हैं और इस समय सुरक्षित रहना ही सबकी प्राथमिकता है। जब गर्मी लगती है तो परिसर में टहलना शुरू कर देता हूं दिन में जब पारा चढ़ता है, उस समय पीपीई किट पहनकर काम करने में असुविधा होती है। इसके कारण जहां पसीना आता है, वहीं ज्यादा देर मास्क लगाए रखने से सांस लेने में दिक्कत होती है। लेकिन अधिकारियों के निर्देश है कि सारे सुरक्षा उपकरण लगाने हैं। इस कारण ड्यूटी के समय पूरी सावधानी बरती जा रही है। जब ज्यादा गर्मी लगती है तो परिसर के अंदर टहलना शुरू कर देता हूं। इससे मुझे बड़ी राहत मिलती है। मेरा तो यही कहना है कि लोग कोरोना को गंभीरता से लें। खुद भी सुरक्षा से रहें और दूसरों को भी सजगता से रहने के लिए प्रेरित करें। -शेरा, वार्ड ब्वाॅय, क्वारेंटाइन सेंटर, जैन छात्रावास सिपाही नींबू पानी और ओआरएस का घोल पीएं पीएचक्यू ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें मौसम विभाग की एडवायजरी का हवाला देते हुए कहा है कि आगामी माह में तापमान बढ़ेगा, इसके चलते तैनात स्टाफ को नींबू-पानी और ओआरएस घोल लेने की सलाह दी गई है। साथ ही चाय और कॉफी का कम सेवन करने के लिए बोला गया है। इतना ही नहीं, वाहन और आम लोगों को रोकने व दस्तावेज चेक करने में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। एडीजी राजाबाबू सिंह का कहना है कि चलित चाय-नाश्ता वाहन पुलिसकर्मियों के लिए चल रहा है, इसमें नींबू पानी व ओआरएस घोल भी रखवाया जाएगा। अभी गरम पानी और चाय पुलिसकर्मियों को उपलब्ध कराया जा रहा है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Police and health workers are stationed on the streets wearing PPE kits in the hot summer, so that you can be safe and not even corona come into the city




शहर में अब गर्मी अपना असर दिखा रही है। दोपहर में सामान्य कपड़ों में भी व्यक्ति गर्मी व पसीने से परेशान हो जाता है। ऐसे में खाकी वर्दी के ऊपर हमारी पुलिस पीपीई किट पहनकर शहर की सीमाओं पर तैनात है। छह-छह घंटे तक यह लोग पीपीई किट पहनकर ड्यूटी कर रहे हैं। इस किट में हवा तक नहीं अंदर जाती, फिर भी पुलिस शहर को काेरोना से बचाने के लिए तैनात खड़ी है। इसी हाल में अस्पतालों के बाहर तैनात पुलिसकर्मी व अस्पतालों के अंदर ड्यूटी दे रहे डॉक्टर से लेकर पैरामेडिकल स्टाफ भी है।
दैनिक भास्कर टीम ने शहर की सीमा से लेकर सुपर स्पेशिलिटी हॉस्पिटल के बाहर और अस्पताल के अंदर तैनात पैरामेडिकल स्टाफ तक से मिलकर जाना कि इतनी गर्मी में वह किस तरह अपना फर्ज निभाकर कोरोना वायरस से शहर को बचा रहे हैं। सभी का एक ही जवाब था। पीपीई किट हमारी और दूसरे लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए जरूरी है। चाहे गर्मी हो या अन्य कोई परेशानी आखिर हम सभी को मिलजुलकर शहर से कोरोना का संक्रमण पूरी तरह खत्म करना है।

6 घंटे तक वॉशरूम तक नहीं जाते, पानी भी कम पीते हैं
-पंजाब सिंह, सिपाही, मोहना नाके पर तैनात के मुताबिक,कहर दिन छह घंटे पीपीई किट पहनकर ड्यूटी करनी पड़ती है। अभी दोपहर 12 से शाम 6 बजे की ड्यूटी कर रहा हूं। दिन का तापमान बढ़ रहा है, ऐसे में वर्दी के ऊपर पीपीई किट पहनने से पूरी वर्दी पसीने से गीली हो जाती है। पिछले एक सप्ताह से यही रूटीन हो गया है। पहले दो-तीन दिन बहुत दिक्कत हुई थी। पीपीई किट पहनने के बाद छह घंटे बाद ही वॉशरूम जा पाते हैं, इसलिए पानी कम पीते हैं। क्योंकि पीपीई किट एक बार उतार दी तो उसे डिस्पोज ही करना पड़ता है। पानी पीने में दिक्कत होती थी, इसलिए अब ग्लास वाला मास्क न लगाकर दूसरा मास्क लगा रहे हैं और हेड कैप लगा लेते हैं। अब आदत होती जा रही है। लेकिन हम सुरक्षित रहेंगे तभी शहर सुरक्षित रहेगा। यहां हर छह घंटे में दो सिपाही पीपीई किट पहनाकर लगाए जाते हैं। इस तरह पूरे दिन में आठ सिपाही पीपीई किट पहनकर ड्यूटी करते हैं। लोग इस हाल में देखकर भी शहर के अंदर जाने की जिद करते हैं। उन्हें यह समझना चाहिए, हम उन्हीं के लिए यहां तैनात हैं।

इस समय सुरक्षित रहना ही सबकी प्राथमिकता
-अजय कुमार, सिपाही, सुपर स्पेशिलिटी हाॅस्पिटल के मुताबिक, दिन में आठ घंटे वर्दी के ऊपर पीपीई किट पहनना भी एक चुनौती है। गर्मी के कारण इतना पसीना आता है कि वर्दी गीली हो जाती है। लेकिन इस समय पूरी मुस्तैदी के साथ ड्यूटी करने की जरूरत है। जरा सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कोरोना संक्रमण से बचने के लिए सुरक्षा उपकरण पहनने के निर्देश जारी किए हैं। पीपीई किट के चलते असुविधा तो हो रही है लेकिन इसे पहनने से हम सुरक्षित रहते हैं और इस समय सुरक्षित रहना ही सबकी प्राथमिकता है।

जब गर्मी लगती है तो परिसर में टहलना शुरू कर देता हूं
दिन में जब पारा चढ़ता है, उस समय पीपीई किट पहनकर काम करने में असुविधा होती है। इसके कारण जहां पसीना आता है, वहीं ज्यादा देर मास्क लगाए रखने से सांस लेने में दिक्कत होती है। लेकिन अधिकारियों के निर्देश है कि सारे सुरक्षा उपकरण लगाने हैं। इस कारण ड्यूटी के समय पूरी सावधानी बरती जा रही है। जब ज्यादा गर्मी लगती है तो परिसर के अंदर टहलना शुरू कर देता हूं। इससे मुझे बड़ी राहत मिलती है। मेरा तो यही कहना है कि लोग कोरोना को गंभीरता से लें। खुद भी सुरक्षा से रहें और दूसरों को भी सजगता से रहने के लिए प्रेरित करें। -शेरा, वार्ड ब्वाॅय, क्वारेंटाइन सेंटर, जैन छात्रावास

सिपाही नींबू पानी और ओआरएस का घोल पीएं
पीएचक्यू ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें मौसम विभाग की एडवायजरी का हवाला देते हुए कहा है कि आगामी माह में तापमान बढ़ेगा, इसके चलते तैनात स्टाफ को नींबू-पानी और ओआरएस घोल लेने की सलाह दी गई है। साथ ही चाय और कॉफी का कम सेवन करने के लिए बोला गया है। इतना ही नहीं, वाहन और आम लोगों को रोकने व दस्तावेज चेक करने में सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। एडीजी राजाबाबू सिंह का कहना है कि चलित चाय-नाश्ता वाहन पुलिसकर्मियों के लिए चल रहा है, इसमें नींबू पानी व ओआरएस घोल भी रखवाया जाएगा। अभी गरम पानी और चाय पुलिसकर्मियों को उपलब्ध कराया जा रहा है।

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Police and health workers are stationed on the streets wearing PPE kits in the hot summer, so that you can be safe and not even corona come into the city
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लॉकडाउन के कारण पूरा देश इस समय ठहरा हुआ है। उद्योग-धंधे बंद हैं। ऐसे समय में सबसे ज्यादा परेशानी मजदूर वर्ग की है। उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। जो राशन बचा था वह भी समाप्त हो गया। उनके सामने घर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। करीब पखवाड़े भर से मजदूरों का पैदल व साइकिल से जाने का सिलसिला जारी है। बुधवार को 11 युवकों का एक दल 6 साइकिलों पर मूंदी से निकला। दल में शामिल वकील प्रजापति व श्रीनिवास प्रजापति ने बताया नासिक की टाइल्स फैक्ट्री में काम करते थे। एक माह तक इंतजार किया। जब खाने को कुछ नहीं बचा तो घर के लिए निकल पड़े। गोरखपुर तक करीब 1600 किमी का सफर करना है। 7 दिन में नासिक से यहां तक पहुंचे हैं। एक दिन में 50 से 70 किमी तक चल रहे हैं। घर पहुंचने में कितने दिन लगेंगे यह तो नहीं पता बस चलते जा रहे हैं। इस साइकिल यात्रा के लिए इन्होंने हवा भरने का पंप, कुछ टायर-ट्यूब, पंचर बनाने का समान साथ में रखा है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today 11 young men set out on 1600 miles on six cycles




लॉकडाउन के कारण पूरा देश इस समय ठहरा हुआ है। उद्योग-धंधे बंद हैं। ऐसे समय में सबसे ज्यादा परेशानी मजदूर वर्ग की है। उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। जो राशन बचा था वह भी समाप्त हो गया। उनके सामने घर जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। करीब पखवाड़े भर से मजदूरों का पैदल व साइकिल से जाने का सिलसिला जारी है। बुधवार को 11 युवकों का एक दल 6 साइकिलों पर मूंदी से निकला। दल में शामिल वकील प्रजापति व श्रीनिवास प्रजापति ने बताया नासिक की टाइल्स फैक्ट्री में काम करते थे। एक माह तक इंतजार किया। जब खाने को कुछ नहीं बचा तो घर के लिए निकल पड़े। गोरखपुर तक करीब 1600 किमी का सफर करना है। 7 दिन में नासिक से यहां तक पहुंचे हैं। एक दिन में 50 से 70 किमी तक चल रहे हैं। घर पहुंचने में कितने दिन लगेंगे यह तो नहीं पता बस चलते जा रहे हैं। इस साइकिल यात्रा के लिए इन्होंने हवा भरने का पंप, कुछ टायर-ट्यूब, पंचर बनाने का समान साथ में रखा है।

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11 young men set out on 1600 miles on six cycles
लॉकडाउन के कारण पूरा देश इस समय ठहरा हुआ है। उद्योग-धंधे बंद हैं। ऐसे समय में सबसे ज्यादा परेशानी मजदूर वर्ग की है। उन्हें रोजगार नहीं मिल रहा है। जो राशन बचा…
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