जिले के 3 हजार शिक्षकों पर 2 लाख बच्चों को घर-घर पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि इनमें से आधे शिक्षक घर-घर जाकर कोरोना संक्रमितों के सर्वे में लगे हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग का ‘अपना घर अपनी पाठशाला’ कार्यक्रम कैसे सफल होगा। कोरोना संक्रमण में लाॅकडाउन के चलते जिले के शासकीय व निजी स्कूलें बंद हैं। ऐसे में राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल द्वारा सोमवार 6 जुलाई से ‘हमारा घर हमारा विद्यालय’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। पहले चरण में कक्षा पहली से आठवीं तक के 2 लाख विद्यार्थियों को घर पर ही पढ़ाने की जिम्मेदारी अभिभावक व शिक्षकों को सौंपी गई है। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि जिले में 1.60 लाख विद्यार्थियों के अभिभावकों के पास एंड्रॉयड मोबाइल ही नहीं हैं। राज्य शिक्षा केंद्र अभी तक वाट्सएप ग्रुप बनाकर, टीवी व केबल के माध्यम से, किताबें बांटकर विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ चुका है। अब गृह संपर्क अभियान के तहत विद्यार्थियों को जोड़ने की तैयारी है। अभियान में शिक्षक अपने विद्यालय वाले गांव में पांच-पांच विद्यार्थियों के घर जाकर 40 मिनट तक पढ़ाएंगे। यहां अभिभावक भी उनकी मदद करेंगे। शिक्षक अभिभावकों को बताएंगे कि वे हर दिन बच्चों को घर जैसा माहौल दें। अभिभावक सुबह 10 से 1 बजे तक पढ़ाई, शाम 4 से 5 बजे तक खेल गतिविधियां कराएंगे। वहीं शाम 6 से 7 बजे तक बड़े-बुजुर्ग से बच्चे कहानी सुनेंगे। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


जिले के 3 हजार शिक्षकों पर 2 लाख बच्चों को घर-घर पढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जबकि इनमें से आधे शिक्षक घर-घर जाकर कोरोना संक्रमितों के सर्वे में लगे हैं। ऐसे में शिक्षा विभाग का ‘अपना घर अपनी पाठशाला’ कार्यक्रम कैसे सफल होगा।

कोरोना संक्रमण में लाॅकडाउन के चलते जिले के शासकीय व निजी स्कूलें बंद हैं। ऐसे में राज्य शिक्षा केंद्र भोपाल द्वारा सोमवार 6 जुलाई से ‘हमारा घर हमारा विद्यालय’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। पहले चरण में कक्षा पहली से आठवीं तक के 2 लाख विद्यार्थियों को घर पर ही पढ़ाने की जिम्मेदारी अभिभावक व शिक्षकों को सौंपी गई है। ऐसा इसलिए किया गया, क्योंकि जिले में 1.60 लाख विद्यार्थियों के अभिभावकों के पास एंड्रॉयड मोबाइल ही नहीं हैं। राज्य शिक्षा केंद्र अभी तक वाट्सएप ग्रुप बनाकर, टीवी व केबल के माध्यम से, किताबें बांटकर विद्यार्थियों को अभियान से जोड़ चुका है। अब गृह संपर्क अभियान के तहत विद्यार्थियों को जोड़ने की तैयारी है।

अभियान में शिक्षक अपने विद्यालय वाले गांव में पांच-पांच विद्यार्थियों के घर जाकर 40 मिनट तक पढ़ाएंगे। यहां अभिभावक भी उनकी मदद करेंगे। शिक्षक अभिभावकों को बताएंगे कि वे हर दिन बच्चों को घर जैसा माहौल दें। अभिभावक सुबह 10 से 1 बजे तक पढ़ाई, शाम 4 से 5 बजे तक खेल गतिविधियां कराएंगे। वहीं शाम 6 से 7 बजे तक बड़े-बुजुर्ग से बच्चे कहानी सुनेंगे।



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