गैंगस्टर विकास दुबे खुद एनकाउंटर के डर से महाकाल की शरण मेें पहुंचा था। उसे दिल्ली से दोस्त कार में बैठाकर यहां छोड़ने आए थे। बुधवार शाम को वे उसे उज्जैन में उतारकर वापस चले गए। इसके बाद उसे नागझिरी क्षेत्र में रहने वाले शराब कंपनी के मैनेजर आनंद तिवारी निवासी कानपुर उत्तप्रदेश ने यहां रुकवाया था। गुरुवार सुबह महाकाल मंदिर में सरेंडर करने के बाद कई घंटे तक नरवर थाना व पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में चली पूछताछ में विकास ने कहा उत्तरप्रदेश पुलिस उसका एनकाउंटर कर देती, इसी कारण 2 जुलाई से फरार होकर इधर-उधर छिपता रहा। दो दिन दिल्ली में दोस्तों के पास रुका। फिर तय हुआ कि उज्जैन महाकाल दर्शन करने जाऊंगा। विकास ने कहा- मुझे पुलिस से दुश्मनी नहीं लेना चाहिए थी विकास ने पुलिस को बताया कि दोस्तों के साथ बुधवार शाम को कार से उज्जैन पहुंचा। वे कुछ देर बाद वापस निकल गए। इसके बाद नागझिरी क्षेत्र निवासी शराब कंपनी मैनेजर आनंद तिवारी ने उसे नागझिरी क्षेत्र में ही एक नेता के घर के पास रुकवाया था। उक्त मकान भी तिवारी ने एक सिपाही से खरीदा था। हालांकि विकास ने कहा कि वह किसका घर था, नहीं जानता लेकिन रातभर वहीं रहा। गुरुवार अलसुबह उठने के बाद नहाया, दाड़ी बनाई। उसका कहना था कि अकेला ही महाकाल दर्शन के लिए पहुंचा था। आईजी राकेश गुप्ता समेत अन्य अधिकारियों ने जब विकास से यह पूछा कि आठ पुलिसकर्मियों की हत्या क्यों की, वह बस इतना ही बोला कि मुझे पुलिस से दुश्मनी नहीं लेनी चाहिए थी। तिवारी के दादा के दाह संस्कार व बहन की शादी में भी गया था शराब कंपनी मैनेजर तिवारी का छोटा भाई कानपुर में ही रहता है। विकास उसका दोस्त है। इसी कारण उसके बड़े भाई आनंद के यहां भी उसका आना-जाना था। अक्सर जब भी महाकाल दर्शन को आता तो आनंद के यहां जरूर जाता था। चार महीने पहले आनंद के दादाजी का कानपुर में निधन हो गया था यहां भी विकास दाह संस्कार में शामिल हुआ था। इसके अलावा छह महीने पहले आनंद के यहां शादी में उज्जैन भी आया था। उसने पूछताछ में स्वीकारा कि महाकाल दर्शन को साल में दो से तीन बार वह आता था। पिछले महीने भी वह दर्शन कर गया था इसलिए उज्जैन से भलीभांति परिचित है। पूछताछ के दौरान कई बार अलग-अलग कहानियां बनाई। यह भी बोला बीपी का मरीज हूं। उज्जैन पुलिस विककास को गुना बॉर्डर तक छोड़ने गई, वहां से यूपी पुलिस साथ ले गई विकास के पकड़ाने से लेकर जाने और यहां कबूलनामे तक एसपी पूरे मामले में कुछ भी कहने से बचते रहे। यहां तक कि अफसरों का कहना है कि विकास को यहां गिरफ्तार तक नहीं किया गया है। वहीं पुलिस का कहना थआ कि यूपी एसटीएफ विकास को लेने आई थी, जबकि हकीकत यह है कि वहां से कोई टीम उज्जैन आई ही नहीं। उज्जैन पुलिस ने सीएसपी रजनीश कश्यप की सुरक्षा में विकास को गुना बॉर्डर तक भिजवाया है। रात करीब 12.30 बजे टीम ने गुना टोल नाका क्रॉस किया। इसके आगे जाकर कहीं पर यूपी पुलिस की टीम मिलेगी, जहां से उसे सुपुर्द किया जाएगा। उत्तप्रदेश पासिंग कार जब्त... इधर दिन में उज्जैन में पुलिस की कार्रवाई के तत्काल बाद देवासगेट क्षेत्र में पुलिस ने एक कार जब्त की, जो उत्तरप्रदेश पासिंग है और उस पर हाईकोर्ट लिखा है। बताया जा रहा है इसमेंे दो वकील थे। वहीं पुलिस ने नागझिरी क्षेत्र से शराब कंपनी के मैनेजर आनंद तिवारी से भी गुरुवार देर रात तक पुलिस महाकाल थाने में पूछताछ करती रही। कॉल डिटेल भी चैक कराई जा रही है। पुलिस की गांधीगिरी : कुख्यात को पकड़ने गई तो हाथ में डंडा तक नहीं था कुख्यात बदमाश विकास दुबे के पकड़ाने के दौरान पुलिस की गांधीगीरी भी नजर आई। जिस बदमाश पर 5 लाख का इनाम है। िजस पर 8 पुलिसकर्मियो की हत्या का आरोप है, उसे महज एक गार्ड ने पकड़ लिया। यही नहीं, जब पुलिस को सूचना मिली और उसे पकड़ने पहुंचे, तो भी खाली हाथ। एक डंडा तक पुलिस के पास नहीं था। अंदर विकास ऐसे घूम रहा था, जैसे उसे प्रोटोकाल मिला हुआ हो। किसी ने उसका हाथ तक नहीं पकड़ा था। विकास जब नजर में आ चुका था और पुलिस तक सूचना पहुंच गई थी, उसके बाद भी आसानी से घूमता रहा। न कोई बंदिश, न किसी ने हाथ पकड़े। गार्ड और पुलिस कर्मी पीछे-पीछे घूमते रहे। बाहर लाने के बाद पुलिस दिखावा करती रही। दुबे के पकड़े जाने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम में श्रेय लेने की होड़ महाकाल मंदिर परिसर से विकास दुबे के पकड़े जाने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम में श्रेय लेने की होड़ मच गईl कलेक्टर आशीष सिंह घटना की सूचना मिलते ही मंदिर पहुंच गए एसपी मनोज सिंह महाकाल थाने जा पहुंचेl फुल दुकानदार का कहना था कि सबसे पहले उसने विकास को देखा और पुलिस को सूचना दीl मंदिर में तैनात निजी सिक्योरिटी गार्ड का कहना था कि विकास के बारे में उसे पता चला था उसी ने उसका पीछा किया और पकड़ा जबकि चौकी पर तैनात पुलिस जवान का कहना था कि विकास दुबे को उसने दबोचा और चौकी पर ले गया इसके बाद अधिकारियों को सूचना दीl 5 लाख रुपए का इनाम पुलिस को मिलेगाl सुरक्षा गार्ड को जाएगा या हार फुल दुकान वाले को मिलेगा इसी को लेकर श्रेय लेने की होड़ मची रही। दिनभर चलता रहा सारा ड्रामा, फोटो और वीडियो कौन बनाता रहा पुलिस को पता ही नहीं, एसपी का सिर्फ एक ही जवाब- हमने पकड़ा विकास के पकड़ाने को लेकर जो कहानी सामने आ रही है वह यह है कि सुबह साढ़े सात बजे विकास दुबे हाथ में काला बैग लिए सुरेश कहार की धोती-सोला की दुकान पर पहुंचा। दुकान के बाहर विजय व राज कहार चाय पी रहे थे। दुबे ने इनसे पूछा- मंदिर जाने का रास्ता किधर है? दोनों युवकों ने उसे रास्ता बताया। साथ ही आपस में शक जताने लगे कि रात को न्यूज चैनल पर दिखाए जा रहे विकास दुबे से इस शख्स का चेहरा मिलता-जुलता है। दोनों ने दुकान के सीसीटीवी में कैद हुए विकास के चेहरे को गूगल पर उसका चित्र सर्च करके मिलान किया। आशंका बढ़ने पर इन्होंने इसकी सूचना लोकायुक्त के परिचित अधिकारी मिश्रा को दी। उन्होंने महाकाल थाने व पुलिस चौकी को फोन पर सूचना दी। गार्ड उसका पीछा करते रहे। शक के आधार पर जब उससे पूछताछ की तो वह गोलमोल करने लगा। हालांकि वह जिस तरह बिना मास्क के सही नाम लिखवाकर घम रहा था, उससे य है कि वह सरेंडर करने ही आया था। इसके बाद पुलिस को बुलाकर उसे सौंप दिया गया। वहां उसने जो पेनकार्ड दिखाया, उसमें शुभम दुबे नाम लिखा था। एएसआई ने उसका मोबाइल नंबर डायल किया तो ट्रू कॉलर में विकास दुबे नाम आया, जिसके बाद उसे पकड़कर महाकाल थाने ले गए। यहां कुछ ही देर में एसपी मनोजसिंह भी पहुंच गए। जब आरोपी को पकड़कर बाहर लाए, तो वह चिल्लाकर बोला- मैं विकास दुबे हूं, कानपुर वाला। इसके बाद एक पुलिसकर्मनी ने उसे चांटा भी मारा। इसके बाद आरोपी को पूछताछ के लिए लेकर गोपनीय स्थान पर रवाना हो गए। इधर, पुलिस ने चौकी को सूचना देने वाले लोकायुक्त में पदस्थ आरक्षक मिश्रा, सिक्याेरिटी गार्ड राहुल व हार-फूल दुकानदार सुरेश को से भी अलग-अलग पूछताछ की। पुलिस उनकी कॉल डिटेल भी चेक करवा रही है। हालांकि विकास के मंदिर में घूमने के दौरान कुछ फोटो क्लिक किए गए। वीडियो भी बनाए गए। लेकिन ये सब कौन कर रहा था, पुलिस को कुछ पता ही नहीं। यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे। सवाल जिनका जवाब सब चाहते थे लेकिन पुलिस चुप्पी साधे रही विकास दुबे चिल्ला-चिल्लाकर बोला कि मुझे पकड़ लो, मतलब वह सरेंडर हुआ, एसपी बोले गिरफ्तार किया। विकास खुद बोला कि मैं ही कानपुर वाला दुबे हूं, लेकिन एसपी को कानपुर से बात करने के बाद कंफर्म हुआ। विकास यहां कैसे आया, कहां रूका, किसने मदद की, उसके साथ और कौन था इसका एसपी ने जवाब नहीं दिया। विकास को यूपी रवाना करने के बाद प्रेस कांफ्रेंस बुलाई, हर सवाल पर ही एक जवाब था अभी इनवेस्टीगेशन कर रहे है। नागझिरी से पकड़े गए आनंद तिवारी व अन्य को लेकर जिक्र नहीं किया। साथी अधिकारी सिर्फ यह बोले पूछताछ जारी है। देवास गेट पुलिस द्वारा जब्त की गई यूपी पासिंग गाड़ी व उसमें सवार दो लोगों को लेकर भी कोई बात नहीं की। विकास के पास से क्या सामान जब्त हुआ, चाकू भी था, इस पर भी एसपी ने कोई जवाब नहीं दिया। प्रेस कान्फ्रेंस से चले गए। पुलिस का दावा था कि यूपी की घटना के बाद हमने पहले से ही नाकाबंदी की हुई थी। हकीकत यह थी कि ऐसे में विकास पकड़ाने की बजाय मंदिर तक आसानी से पहुंच गया। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today Vikas came from Delhi with friends, Tiwari stayed in Nagjhiri area, went to temple from here


गैंगस्टर विकास दुबे खुद एनकाउंटर के डर से महाकाल की शरण मेें पहुंचा था। उसे दिल्ली से दोस्त कार में बैठाकर यहां छोड़ने आए थे। बुधवार शाम को वे उसे उज्जैन में उतारकर वापस चले गए। इसके बाद उसे नागझिरी क्षेत्र में रहने वाले शराब कंपनी के मैनेजर आनंद तिवारी निवासी कानपुर उत्तप्रदेश ने यहां रुकवाया था। गुरुवार सुबह महाकाल मंदिर में सरेंडर करने के बाद कई घंटे तक नरवर थाना व पुलिस ट्रेनिंग स्कूल में चली पूछताछ में विकास ने कहा उत्तरप्रदेश पुलिस उसका एनकाउंटर कर देती, इसी कारण 2 जुलाई से फरार होकर इधर-उधर छिपता रहा। दो दिन दिल्ली में दोस्तों के पास रुका। फिर तय हुआ कि उज्जैन महाकाल दर्शन करने जाऊंगा।
विकास ने कहा- मुझे पुलिस से दुश्मनी नहीं लेना चाहिए थी
विकास ने पुलिस को बताया कि दोस्तों के साथ बुधवार शाम को कार से उज्जैन पहुंचा। वे कुछ देर बाद वापस निकल गए। इसके बाद नागझिरी क्षेत्र निवासी शराब कंपनी मैनेजर आनंद तिवारी ने उसे नागझिरी क्षेत्र में ही एक नेता के घर के पास रुकवाया था। उक्त मकान भी तिवारी ने एक सिपाही से खरीदा था। हालांकि विकास ने कहा कि वह किसका घर था, नहीं जानता लेकिन रातभर वहीं रहा। गुरुवार अलसुबह उठने के बाद नहाया, दाड़ी बनाई। उसका कहना था कि अकेला ही महाकाल दर्शन के लिए पहुंचा था। आईजी राकेश गुप्ता समेत अन्य अधिकारियों ने जब विकास से यह पूछा कि आठ पुलिसकर्मियों की हत्या क्यों की, वह बस इतना ही बोला कि मुझे पुलिस से दुश्मनी नहीं लेनी चाहिए थी।
तिवारी के दादा के दाह संस्कार व बहन की शादी में भी गया था
शराब कंपनी मैनेजर तिवारी का छोटा भाई कानपुर में ही रहता है। विकास उसका दोस्त है। इसी कारण उसके बड़े भाई आनंद के यहां भी उसका आना-जाना था। अक्सर जब भी महाकाल दर्शन को आता तो आनंद के यहां जरूर जाता था। चार महीने पहले आनंद के दादाजी का कानपुर में निधन हो गया था यहां भी विकास दाह संस्कार में शामिल हुआ था। इसके अलावा छह महीने पहले आनंद के यहां शादी में उज्जैन भी आया था। उसने पूछताछ में स्वीकारा कि महाकाल दर्शन को साल में दो से तीन बार वह आता था। पिछले महीने भी वह दर्शन कर गया था इसलिए उज्जैन से भलीभांति परिचित है। पूछताछ के दौरान कई बार अलग-अलग कहानियां बनाई। यह भी बोला बीपी का मरीज हूं।

उज्जैन पुलिस विककास को गुना बॉर्डर तक
छोड़ने गई, वहां से यूपी पुलिस साथ ले गई
विकास के पकड़ाने से लेकर जाने और यहां कबूलनामे तक एसपी पूरे मामले में कुछ भी कहने से बचते रहे। यहां तक कि अफसरों का कहना है कि विकास को यहां गिरफ्तार तक नहीं किया गया है। वहीं पुलिस का कहना थआ कि यूपी एसटीएफ विकास को लेने आई थी, जबकि हकीकत यह है कि वहां से कोई टीम उज्जैन आई ही नहीं। उज्जैन पुलिस ने सीएसपी रजनीश कश्यप की सुरक्षा में विकास को गुना बॉर्डर तक भिजवाया है। रात करीब 12.30 बजे टीम ने गुना टोल नाका क्रॉस किया। इसके आगे जाकर कहीं पर यूपी पुलिस की टीम मिलेगी, जहां से उसे सुपुर्द किया जाएगा।
उत्तप्रदेश पासिंग कार जब्त... इधर दिन में उज्जैन में पुलिस की कार्रवाई के तत्काल बाद देवासगेट क्षेत्र में पुलिस ने एक कार जब्त की, जो उत्तरप्रदेश पासिंग है और उस पर हाईकोर्ट लिखा है। बताया जा रहा है इसमेंे दो वकील थे। वहीं पुलिस ने नागझिरी क्षेत्र से शराब कंपनी के मैनेजर आनंद तिवारी से भी गुरुवार देर रात तक पुलिस महाकाल थाने में पूछताछ करती रही। कॉल डिटेल भी चैक कराई जा रही है।

पुलिस की गांधीगिरी : कुख्यात को पकड़ने गई तो हाथ में डंडा तक नहीं था

कुख्यात बदमाश विकास दुबे के पकड़ाने के दौरान पुलिस की गांधीगीरी भी नजर आई। जिस बदमाश पर 5 लाख का इनाम है। िजस पर 8 पुलिसकर्मियो की हत्या का आरोप है, उसे महज एक गार्ड ने पकड़ लिया। यही नहीं, जब पुलिस को सूचना मिली और उसे पकड़ने पहुंचे, तो भी खाली हाथ। एक डंडा तक पुलिस के पास नहीं था। अंदर विकास ऐसे घूम रहा था, जैसे उसे प्रोटोकाल मिला हुआ हो। किसी ने उसका हाथ तक नहीं पकड़ा था।

विकास जब नजर में आ चुका था और पुलिस तक सूचना पहुंच गई थी, उसके बाद भी आसानी से घूमता रहा। न कोई बंदिश, न किसी ने हाथ पकड़े। गार्ड और पुलिस कर्मी पीछे-पीछे घूमते रहे। बाहर लाने के बाद पुलिस दिखावा करती रही।
दुबे के पकड़े जाने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम में श्रेय लेने की होड़
महाकाल मंदिर परिसर से विकास दुबे के पकड़े जाने के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम में श्रेय लेने की होड़ मच गईl कलेक्टर आशीष सिंह घटना की सूचना मिलते ही मंदिर पहुंच गए एसपी मनोज सिंह महाकाल थाने जा पहुंचेl फुल दुकानदार का कहना था कि सबसे पहले उसने विकास को देखा और पुलिस को सूचना दीl मंदिर में तैनात निजी सिक्योरिटी गार्ड का कहना था कि विकास के बारे में उसे पता चला था उसी ने उसका पीछा किया और पकड़ा जबकि चौकी पर तैनात पुलिस जवान का कहना था कि विकास दुबे को उसने दबोचा और चौकी पर ले गया इसके बाद अधिकारियों को सूचना दीl 5 लाख रुपए का इनाम पुलिस को मिलेगाl सुरक्षा गार्ड को जाएगा या हार फुल दुकान वाले को मिलेगा इसी को लेकर श्रेय लेने की होड़ मची रही।

दिनभर चलता रहा सारा ड्रामा, फोटो और वीडियो कौन बनाता रहा
पुलिस को पता ही नहीं, एसपी का सिर्फ एक ही जवाब- हमने पकड़ा
विकास के पकड़ाने को लेकर जो कहानी सामने आ रही है वह यह है कि सुबह साढ़े सात बजे विकास दुबे हाथ में काला बैग लिए सुरेश कहार की धोती-सोला की दुकान पर पहुंचा। दुकान के बाहर विजय व राज कहार चाय पी रहे थे। दुबे ने इनसे पूछा- मंदिर जाने का रास्ता किधर है? दोनों युवकों ने उसे रास्ता बताया। साथ ही आपस में शक जताने लगे कि रात को न्यूज चैनल पर दिखाए जा रहे विकास दुबे से इस शख्स का चेहरा मिलता-जुलता है। दोनों ने दुकान के सीसीटीवी में कैद हुए विकास के चेहरे को गूगल पर उसका चित्र सर्च करके मिलान किया। आशंका बढ़ने पर इन्होंने इसकी सूचना लोकायुक्त के परिचित अधिकारी मिश्रा को दी। उन्होंने महाकाल थाने व पुलिस चौकी को फोन पर सूचना दी। गार्ड उसका पीछा करते रहे। शक के आधार पर जब उससे पूछताछ की तो वह गोलमोल करने लगा। हालांकि वह जिस तरह बिना मास्क के सही नाम लिखवाकर घम रहा था, उससे य है कि वह सरेंडर करने ही आया था। इसके बाद पुलिस को बुलाकर उसे सौंप दिया गया। वहां उसने जो पेनकार्ड दिखाया, उसमें शुभम दुबे नाम लिखा था। एएसआई ने उसका मोबाइल नंबर डायल किया तो ट्रू कॉलर में विकास दुबे नाम आया, जिसके बाद उसे पकड़कर महाकाल थाने ले गए। यहां कुछ ही देर में एसपी मनोजसिंह भी पहुंच गए। जब आरोपी को पकड़कर बाहर लाए, तो वह चिल्लाकर बोला- मैं विकास दुबे हूं, कानपुर वाला। इसके बाद एक पुलिसकर्मनी ने उसे चांटा भी मारा। इसके बाद आरोपी को पूछताछ के लिए लेकर गोपनीय स्थान पर रवाना हो गए। इधर, पुलिस ने चौकी को सूचना देने वाले लोकायुक्त में पदस्थ आरक्षक मिश्रा, सिक्याेरिटी गार्ड राहुल व हार-फूल दुकानदार सुरेश को से भी अलग-अलग पूछताछ की। पुलिस उनकी कॉल डिटेल भी चेक करवा
रही है। हालांकि विकास के मंदिर में घूमने के दौरान कुछ फोटो क्लिक किए गए। वीडियो भी बनाए गए। लेकिन ये सब कौन कर रहा था, पुलिस
को कुछ पता ही नहीं। यही वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते रहे।

सवाल जिनका जवाब सब चाहते थे लेकिन पुलिस चुप्पी साधे रही

  • विकास दुबे चिल्ला-चिल्लाकर बोला कि मुझे पकड़ लो, मतलब वह सरेंडर हुआ, एसपी बोले गिरफ्तार किया।
  • विकास खुद बोला कि मैं ही कानपुर वाला दुबे हूं, लेकिन एसपी को कानपुर से बात करने के बाद कंफर्म हुआ।
  • विकास यहां कैसे आया, कहां रूका, किसने मदद की, उसके साथ और कौन था इसका एसपी ने जवाब नहीं दिया।
  • विकास को यूपी रवाना करने के बाद प्रेस कांफ्रेंस बुलाई, हर सवाल पर ही एक जवाब था अभी इनवेस्टीगेशन कर रहे है।
  • नागझिरी से पकड़े गए आनंद तिवारी व अन्य को लेकर जिक्र नहीं किया। साथी अधिकारी सिर्फ यह बोले पूछताछ जारी है।
  • देवास गेट पुलिस द्वारा जब्त की गई यूपी पासिंग गाड़ी व उसमें सवार दो लोगों को लेकर भी कोई बात नहीं की।
  • विकास के पास से क्या सामान जब्त हुआ, चाकू भी था, इस पर भी एसपी ने कोई जवाब नहीं दिया। प्रेस कान्फ्रेंस से चले गए।
  • पुलिस का दावा था कि यूपी की घटना के बाद हमने पहले से ही नाकाबंदी की हुई थी। हकीकत यह थी कि ऐसे में विकास पकड़ाने की बजाय मंदिर तक आसानी से पहुंच गया।


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