मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 में संशोधन कर निजी कंपनियों के हाथ में फसल खरीदी की बागडोर देने का फैसला कर लिया है। इसके विरोध में 14 जुलाई को प्रदेश व्यापी हड़ताल को लेकर बदरवास कृषि उपज मंडी में काम करने वाले हम्माल, पल्लेदार तुलावटियों ने तहसीलदार दिव्यदर्शन शर्मा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें उल्लेख किया कि मंडी बंद होने से हम्माल, पल्लेदार, तुलावटी बेरोजगार हो जाएंगे। प्रदेश सरकार द्वारा कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 में संशोधन कर निजी कंपनियों के हाथ में मंडियों की कमान सौंपना गलत है। हम्माल बोले- परिवार का भरण पोषण करना हो जाएगा मुश्किल कृषि उपज मंडी में काम करने वाले मजदूरों ने कहा है कि यदि मंडी को निजी हाथों में सौंप दिया तो व्यापारी प्रदेश में कहीं भी इलेक्ट्रॉनिक कांटा लगाकर किसानों से सीधी फसल खरीदेंगे। इससे कृषि मंडी में काम करने वाले हम हम्माल, पल्लेदार, तुलावटियों का रोजगार छिन जाएगा। इससे हमारे परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो जाएगा इसलिए इस अधिनियम में संशोधन न किया जाए। 7 हजार 500 रुपए प्रत्येक व्यक्ति को दे सरकार हम्मालों ने कहा है कि हमें श्रमिकों की श्रेणी में रखा जाए। जब तक मंडी का काम सुचारू रूप से चालू नहीं होता तब तक सरकार 7 हजार 500 रुपए प्रत्येक व्यक्ति के हिसाब से 10 किलो गेहूं आदि की किट बनाकर 6 माह तक घर भेजेे साथ ही हमारे परिवार का नि:शुल्क इलाज किया जाए। वहीं कोरोना बचाव के लिए मास्क व सेनेटाइजर उपलब्ध कराए जाने की मांग की है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


मध्य प्रदेश सरकार द्वारा कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 में संशोधन कर निजी कंपनियों के हाथ में फसल खरीदी की बागडोर देने का फैसला कर लिया है। इसके विरोध में 14 जुलाई को प्रदेश व्यापी हड़ताल को लेकर बदरवास कृषि उपज मंडी में काम करने वाले हम्माल, पल्लेदार तुलावटियों ने तहसीलदार दिव्यदर्शन शर्मा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें उल्लेख किया कि मंडी बंद होने से हम्माल, पल्लेदार, तुलावटी बेरोजगार हो जाएंगे। प्रदेश सरकार द्वारा कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 में संशोधन कर निजी कंपनियों के हाथ में मंडियों की कमान सौंपना गलत है।
हम्माल बोले- परिवार का भरण पोषण करना हो जाएगा मुश्किल
कृषि उपज मंडी में काम करने वाले मजदूरों ने कहा है कि यदि मंडी को निजी हाथों में सौंप दिया तो व्यापारी प्रदेश में कहीं भी इलेक्ट्रॉनिक कांटा लगाकर किसानों से सीधी फसल खरीदेंगे। इससे कृषि मंडी में काम करने वाले हम हम्माल, पल्लेदार, तुलावटियों का रोजगार छिन जाएगा। इससे हमारे परिवार का भरण पोषण करना मुश्किल हो जाएगा इसलिए इस अधिनियम में संशोधन न किया जाए।
7 हजार 500 रुपए प्रत्येक व्यक्ति को दे सरकार
हम्मालों ने कहा है कि हमें श्रमिकों की श्रेणी में रखा जाए। जब तक मंडी का काम सुचारू रूप से चालू नहीं होता तब तक सरकार 7 हजार 500 रुपए प्रत्येक व्यक्ति के हिसाब से 10 किलो गेहूं आदि की किट बनाकर 6 माह तक घर भेजेे साथ ही हमारे परिवार का नि:शुल्क इलाज किया जाए। वहीं कोरोना बचाव के लिए मास्क व सेनेटाइजर उपलब्ध कराए जाने की मांग की है।



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