सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अंतर्गत विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन, विकलांग पेंशन एवं निराश्रित पेंशन योजना के पात्र हितग्राहियों को अपनी आजीविका चलाने के लिए ग्रामीण अंचलों से तहसील मुख्यालय के बैंकों में आकर राशि निकालने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार ने पात्र हितग्राहियों को केवल बैंकों से भुगतान किए जाने के आदेश दिए है, जिसके चलते हितग्राही बहुत ज्यादा परेशान हो रहे हैं। जो वृद्ध चलने फिरने में लाचार हैं या फिर उम्रदराज होने के बावजूद तहसील मुख्यालय पर आने को मजबूर हो रहे हैं। उन्हें ज्यादा परेशानी हो रही है। पूर्व में पिछली सरकार के समय ऐसे हितग्राहियों को पोस्ट ऑफिस से मनी ऑर्डर के द्वारा घर-घर पेंशन पहुंचाई जाती थी। जो कि पोस्टमैन संबंधित हितग्राही को सौंप देता था लेकिन अचानक तुगलकी आदेश जारी होते ही अब हितग्राहियों को राष्ट्रीयकृत बैंकों के चक्कर लगाना पड़ रहे हैं। गरीब हितग्राहियों को 2 किलोमीटर से लेकर 20-20 किलोमीटर दूर से अपनी पेंशन लेने के लिए तहसील मुख्यालय पर स्थित बैंकों में आना पड़ रहा है। गुरुवार को नगर के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में देखने को मिला 82 वर्षीय एक विधवा, निराश्रित महिला गेंदा बाई पति स्वर्गीय पंचे निवासी पांडाझिर गांव से 13 किलोमीटर दूर का सफर तय करके अपनी पेंशन लेने के लिए आई हुई थी। जिसने अपने खाते से 5 सौ रुपए निकाले थे। पूछे जाने पर गेंदा बाई ने बताया कि वह ऑटो में बैठ कर यहां तक आई है। क्या करें मजबूरी है, पेट पालने के लिए पैसे तो चाहिए ही। यदि पूर्व की भांति ऐसे मजबूर और लाचार लोगों को घर बैठे पेंशन उपलब्ध करा दी जाए तो परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अंतर्गत विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन, विकलांग पेंशन एवं निराश्रित पेंशन योजना के पात्र हितग्राहियों को अपनी आजीविका चलाने के लिए ग्रामीण अंचलों से तहसील मुख्यालय के बैंकों में आकर राशि निकालने में परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार ने पात्र हितग्राहियों को केवल बैंकों से भुगतान किए जाने के आदेश दिए है, जिसके चलते हितग्राही बहुत ज्यादा परेशान हो रहे हैं। जो वृद्ध चलने फिरने में लाचार हैं या फिर उम्रदराज होने के बावजूद तहसील मुख्यालय पर आने को मजबूर हो रहे हैं। उन्हें ज्यादा परेशानी हो रही है। पूर्व में पिछली सरकार के समय ऐसे हितग्राहियों को पोस्ट ऑफिस से मनी ऑर्डर के द्वारा घर-घर पेंशन पहुंचाई जाती थी। जो कि पोस्टमैन संबंधित हितग्राही को सौंप देता था लेकिन अचानक तुगलकी आदेश जारी होते ही अब हितग्राहियों को राष्ट्रीयकृत बैंकों के चक्कर लगाना पड़ रहे हैं। गरीब हितग्राहियों को 2 किलोमीटर से लेकर 20-20 किलोमीटर दूर से अपनी पेंशन लेने के लिए तहसील मुख्यालय पर स्थित बैंकों में आना पड़ रहा है। गुरुवार को नगर के सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में देखने को मिला 82 वर्षीय एक विधवा, निराश्रित महिला गेंदा बाई पति स्वर्गीय पंचे निवासी पांडाझिर गांव से 13 किलोमीटर दूर का सफर तय करके अपनी पेंशन लेने के लिए आई हुई थी। जिसने अपने खाते से 5 सौ रुपए निकाले थे। पूछे जाने पर गेंदा बाई ने बताया कि वह ऑटो में बैठ कर यहां तक आई है। क्या करें मजबूरी है, पेट पालने के लिए पैसे तो चाहिए ही। यदि पूर्व की भांति ऐसे मजबूर और लाचार लोगों को घर बैठे पेंशन उपलब्ध करा दी जाए तो परेशानियों से छुटकारा मिल सकता है।



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