उच्च न्यायालय की ओर से दो पालियों में न्यायाधीशों के मध्य कार्य विभाजन किये जाने पर अधिवक्ताओं ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इससे वकीलों का सुबह से शाम तक न्यायालय परिसर में बैठना होगा, जिससे उनके संक्रमित होने का भी खतरा रहेगा। अभिभाषक संघ के जिला निर्वाचन अधिकारी एवं पूर्व जिलाध्यक्ष एडवोकेट अभिलाख सिंह भदौरिया ने इस संबंध में मुख्य न्यायाधिपति उच्च न्यायालय जबलपुर को एक पत्र लिखकर मांग की है।
उन्होंने बताया कि 12 मई के आदेश के अनुसार सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक अपर सत्र न्यायाधीश और दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक प्रथम ओर द्वितीय श्रेणी न्यायाधीश कार्य करेंगे। ऐसे में वकीलों को सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक न्यायालय परिसर में रुकना पड़ेगा। इस कारण न्यायालय परिसर में भीड़ भाड़ भी अधिक होगी। साथ ही वकीलों के संक्रमित होने का डर रहेगा। वकीलों ने मांग की है कि सभी न्यायाधीशों के कार्य का समय एक ही रखा जाए। साथ ही जो निर्णय लिए जाएं उनमें अधिवक्ताओं का भी ख्याल किया जाए। इसके अलावा उन्होंने कुछ सुझाव भी दिए हैं।
संक्रमण से बचने यह दिए सुझाव
- संपूर्ण न्यायालय परिसर को सेनेटाइज किया जाए।
- दायरा और नकल सेक्शन में सोशल डिस्टेंस इन के पालन को सुनिश्चित किया जाए।
- सभी प्रकार की आवश्यक उपस्थिति को छोड़कर हाजिरी स्थगित रखी जाए।
- कोर्ट रूम के बाहर एक व्यक्ति को तैनात किया जाए, जो कि सभी को सेनेटाइज करने के बाद ही प्रवेश अंदर दें, अनावश्यक प्रवेश को प्रतिबंधित किया जाए।
- केस डायरी लेने के लिए न्यायालय के मुख्य द्वार पर एक खिड़की का प्रबंध किया जाए।
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