नवीन सिविल हॉस्पिटल का लोकार्पण 5 माह पहले हुआ था, लेकिन अभी तक पशुओं को रोकने के लिए कैटल पास छोटा होने से बदला नहीं जा सका है, जिससे पशुओं ने प्रवेश करना शुरू कर दिया है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जबकि कायाकल्प टीम भी सर्वे कर कैटल पास बड़ा करने के निर्देश दे चुकी है। नवीन सिविल हॉस्पिटल का निर्माण लोकार्पण 6 दिसंबर को किया गया था, इस भवन का निर्माण भानु प्रताप चौहान कंपनी ग्वालियर के द्वारा किया गया था। लेकिन इस समय स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालन यंत्री के द्वारा भवन में लेने से पहले यह नहीं देखा गया था कि आवारा पशुओं को रोकने के लिए बनाया गया कैटल पास छोटा है। इसके कारण मवेशी आसानी से प्रवेश कर सकते हैं और मरीजों से कोई भी घटना कर सकते हैं। लेकिन आज इसका खामियाजा हॉस्पिटल में आने वाले 6 सैकड़ा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, आवारा पशु अस्पताल परिसर व ओपीडी हाल में प्रवेश कर कचरा एकत्रित करने वाले वाहनों में मुंह लगाकर उड़ेल देते हैं, जिससे परिसर एवं हॉस्पिटल के अंदर गंदगी फैल जाती है। गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


नवीन सिविल हॉस्पिटल का लोकार्पण 5 माह पहले हुआ था, लेकिन अभी तक पशुओं को रोकने के लिए कैटल पास छोटा होने से बदला नहीं जा सका है, जिससे पशुओं ने प्रवेश करना शुरू कर दिया है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जबकि कायाकल्प टीम भी सर्वे कर कैटल पास बड़ा करने के निर्देश दे चुकी है। नवीन सिविल हॉस्पिटल का निर्माण लोकार्पण 6 दिसंबर को किया गया था, इस भवन का निर्माण भानु प्रताप चौहान कंपनी ग्वालियर के द्वारा किया गया था। लेकिन इस समय स्वास्थ्य विभाग के कार्यपालन यंत्री के द्वारा भवन में लेने से पहले यह नहीं देखा गया था कि आवारा पशुओं को रोकने के लिए बनाया गया कैटल पास छोटा है। इसके कारण मवेशी आसानी से प्रवेश कर सकते हैं और मरीजों से कोई भी घटना कर सकते हैं। लेकिन आज इसका खामियाजा हॉस्पिटल में आने वाले 6 सैकड़ा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है, आवारा पशु अस्पताल परिसर व ओपीडी हाल में प्रवेश कर कचरा एकत्रित करने वाले वाहनों में मुंह लगाकर उड़ेल देते हैं, जिससे परिसर एवं हॉस्पिटल के अंदर गंदगी फैल जाती है। गंभीर बीमारियां फैलने का खतरा पैदा हो गया है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है।



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