प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने लाॅकडाउन काे अवसराें वाला बताया था, उसके बाद निकलकर आए ये किस्से लाॅकडाउन के बीच दर्द और बेबसी की कहानियां सामने आईं, लेकिन इसी लाॅकडाउन ने लाेगाें काे बदलाव और सीखने के लिए अवसर भी दिए। जिले में ऐसे कई लाेग हैं जाे इस संक्रमण काल में भी अवसर तलाश कर उसका डटकर मुकाबला कर रहे हैं। भास्कर ने ऐसे ही लाेगाें काे तलाश कर उनसे उनके अनुभव जाने। गाैरतलब है कि मंगलवार रात देश काे पांचवी बार संबाेधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने लाॅकडाउन काे अवसराें वाला बताया था। ऑनलाइन शिक्षा और ट्रेनिंगसे जुड़ने का अवसर मिला जाे स्मार्टफाेन मनाेरंजन का साधन था उसी से जिले के 1 लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं और करीब 3 हजार शिक्षक घर बैठे ट्रेनिंग ले रहे हैं। डीपीसी कमलसिंह ठाकुर ने बताया स्कूल में बच्चे शिक्षक के निर्देश पर पढ़ते हैं मगर ऑनलाइन शिक्षा के कारण बच्चे आत्मनिर्भर बने हैं। वाट्सएप पर सामग्री मिलते ही बच्चे स्वेच्छा से पढ़ने बैठ जाते हैं। दूसरी तरफ तेज गर्मी में शिक्षकाें काे ट्रेनिंग के लिए जिला प्रशिक्षण संस्थान, इंदाैर, भाेपाल या जबलपुर नहीं जाना पड़ रहा। घर बैठे ही वे नए सत्र में बच्चोंकाे पढ़ाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। बैठकें भी ऑनलाइन ही हाे रही। डिजिटल बैंकिंग से जुड़े लाेग बैंकाें के बाहर से कतार कम हुई है क्याेंकि लाेग डिजिटल बैंकिंग से जुड़े। इसके लिए मप्र ग्रामीण आजीविका मिशन की बीसी सखी व डाक विभाग सक्रिय रहा। मिशन की प्रबंधक साैम्या जैन ने बताया जिले के 8 ब्लाॅक की 36 महिलाओं ने 86 लाख रुपए से ज्यादा राशि लाेगाें के घराें तक पहुंचाई है। इसी तरह डाक विभाग ने अपने पाेस्टमैन के माध्यम से महज 11 दिन में 48 लाख रुपए घराें तक पहुंचाने की सुविधा की। डाक विभाग के उपसंभागीय निरीक्षक मानव मित्रे ने बताया प्रतिदिन करीब चार लाख रुपए घराें तक पहुंचाए हैं। इसके अलावा पाेस्ट ऑफिस के माध्यम से किसी भी बैंक से रुपए निकालने की सुविधा भी हुई है। मास्क और सैनिटाइजर बनाना सीखा पुलिसकर्मियों नेपहली बार पुलिसकर्मियाें ने मास्क और सैनिटाइजर भी बनाए हैं। जबकि इस काम की उन्हें ट्रेनिंग भी नहीं मिली। इन 51दिनाें में ही उन्हें यह सीखने का अवसर मिला। आरआई रंजीतसिंह के मुताबिक फील्ड में तैनातसाथी पुलिसकर्मियाें की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी राेज करीब 10 से 20 लीटर सैनिटाइजर व 100 से 150 मास्क प्रतिदिन बनाए जा रहे हैं। Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today


प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने लाॅकडाउन काे अवसराें वाला बताया था, उसके बाद निकलकर आए ये किस्से लाॅकडाउन के बीच दर्द और बेबसी की कहानियां सामने आईं, लेकिन इसी लाॅकडाउन ने लाेगाें काे बदलाव और सीखने के लिए अवसर भी दिए। जिले में ऐसे कई लाेग हैं जाे इस संक्रमण काल में भी अवसर तलाश कर उसका डटकर मुकाबला कर रहे हैं।

भास्कर ने ऐसे ही लाेगाें काे तलाश कर उनसे उनके अनुभव जाने। गाैरतलब है कि मंगलवार रात देश काे पांचवी बार संबाेधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र माेदी ने लाॅकडाउन काे अवसराें वाला बताया था।

ऑनलाइन शिक्षा और ट्रेनिंगसे जुड़ने का अवसर मिला

जाे स्मार्टफाेन मनाेरंजन का साधन था उसी से जिले के 1 लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं और करीब 3 हजार शिक्षक घर बैठे ट्रेनिंग ले रहे हैं। डीपीसी कमलसिंह ठाकुर ने बताया स्कूल में बच्चे शिक्षक के निर्देश पर पढ़ते हैं मगर ऑनलाइन शिक्षा के कारण बच्चे आत्मनिर्भर बने हैं। वाट्सएप पर सामग्री मिलते ही बच्चे स्वेच्छा से पढ़ने बैठ जाते हैं। दूसरी तरफ तेज गर्मी में शिक्षकाें काे ट्रेनिंग के लिए जिला प्रशिक्षण संस्थान, इंदाैर, भाेपाल या जबलपुर नहीं जाना पड़ रहा। घर बैठे ही वे नए सत्र में बच्चोंकाे पढ़ाने की ट्रेनिंग ले रहे हैं। बैठकें भी ऑनलाइन ही हाे रही।

डिजिटल बैंकिंग से जुड़े लाेग

बैंकाें के बाहर से कतार कम हुई है क्याेंकि लाेग डिजिटल बैंकिंग से जुड़े। इसके लिए मप्र ग्रामीण आजीविका मिशन की बीसी सखी व डाक विभाग सक्रिय रहा। मिशन की प्रबंधक साैम्या जैन ने बताया जिले के 8 ब्लाॅक की 36 महिलाओं ने 86 लाख रुपए से ज्यादा राशि लाेगाें के घराें तक पहुंचाई है। इसी तरह डाक विभाग ने अपने पाेस्टमैन के माध्यम से महज 11 दिन में 48 लाख रुपए घराें तक पहुंचाने की सुविधा की। डाक विभाग के उपसंभागीय निरीक्षक मानव मित्रे ने बताया प्रतिदिन करीब चार लाख रुपए घराें तक पहुंचाए हैं। इसके अलावा पाेस्ट ऑफिस के माध्यम से किसी भी बैंक से रुपए निकालने की सुविधा भी हुई है।

मास्क और सैनिटाइजर बनाना सीखा पुलिसकर्मियों नेपहली बार पुलिसकर्मियाें ने

मास्क और सैनिटाइजर भी बनाए हैं। जबकि इस काम की उन्हें ट्रेनिंग भी नहीं मिली। इन 51दिनाें में ही उन्हें यह सीखने का अवसर मिला। आरआई रंजीतसिंह के मुताबिक फील्ड में तैनातसाथी पुलिसकर्मियाें की सुरक्षा के लिए पुलिसकर्मी राेज करीब 10 से 20 लीटर सैनिटाइजर व 100 से 150 मास्क प्रतिदिन बनाए जा रहे हैं।



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